राऊज एवेन्यू अदालत में सुनवाई 21 फरवरी को, प्राथमिकी दर्ज कराने की मांग पर बहस जारी

सोनिया गांधी ने मतदाता सूची में नाम जोड़े जाने से जुड़े विवाद में राऊज एवेन्यू स्थित सत्र अदालत में अपना जवाब दाखिल कर दिया है। यह मामला उस आदेश को चुनौती देने से संबंधित है, जिसमें मजिस्ट्रेट अदालत ने प्राथमिकी दर्ज कराने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया था। अब इस प्रकरण में अगली सुनवाई 21 फरवरी को होगी।

मामले की सुनवाई कर रहे विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने पहले ही संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया था। अदालत ने 9 दिसंबर 2025 को सोनिया गांधी और दिल्ली पुलिस को नोटिस भेजते हुए जवाब मांगा था। उसी क्रम में अब जवाब अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया गया है।

क्या है पूरा विवाद

याचिका अधिवक्ता विकास त्रिपाठी की ओर से दायर की गई है। इसमें दावा किया गया है कि सोनिया गांधी का नाम नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में वर्ष 1980 में जोड़ा गया था, जबकि वह भारतीय नागरिक वर्ष 1983 में बनीं। याचिकाकर्ता का कहना है कि इस अंतर को देखते हुए नाम जुड़वाने के लिए कथित रूप से गलत दस्तावेजों का उपयोग किया गया होगा, जो संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।

याचिका में यह भी कहा गया कि बीच में वर्ष 1982 में नाम हटाया गया और फिर 1983 में दोबारा जोड़ा गया। साथ ही यह उल्लेख किया गया है कि भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन अप्रैल 1983 में दिया गया था। इन तथ्यों के आधार पर अदालत से प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश देने की मांग की गई।

पहले मजिस्ट्रेट अदालत ने खारिज की थी मांग

इससे पहले 11 सितंबर 2025 को अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट वैभव चौरसिया ने याचिका को खारिज कर दिया था। उस समय अदालत ने न तो सोनिया गांधी को नोटिस जारी किया था और न ही दिल्ली पुलिस को। मजिस्ट्रेट अदालत के इसी फैसले को अब सत्र अदालत में चुनौती दी गई है।

सत्र अदालत में चल रही कार्यवाही इस बात पर केंद्रित है कि क्या प्राथमिकी दर्ज कराने की मांग को दोबारा विचार के लिए स्वीकार किया जाए या मजिस्ट्रेट अदालत का आदेश बरकरार रखा जाए।

21 फरवरी पर टिकी निगाहें

अब सभी पक्षों की नजरें अगली तारीख पर हैं। अदालत में दायर जवाब और याचिकाकर्ता की दलीलों के आधार पर आगे की दिशा तय होगी। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला तकनीकी और विधिक पहलुओं से जुड़ा है, इसलिए अदालत हर तथ्य को विस्तार से परखेगी।

यह प्रकरण राजनीतिक हलकों में भी चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि अंतिम निर्णय न्यायालय की सुनवाई के बाद ही सामने आएगा।

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