गेट नंबर दो ढहने से एक और व्यक्ति जख्मी, सुरक्षा इंतजामों पर उठे सवाल

सूरजकुंड मेला में शनिवार को बड़ा हादसा हो गया, जब मेले में लगा एक झूला अचानक गिर पड़ा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार झूले में उस समय लगभग पंद्रह लोग सवार थे। झूला गिरते ही पूरे क्षेत्र में चीख-पुकार मच गई और कुछ ही पलों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। आसपास मौजूद लोगों ने तत्काल घायलों को बाहर निकालने की कोशिश शुरू की, जबकि सूचना मिलते ही प्रशासनिक अमला भी सक्रिय हो गया।

घटना की खबर मिलते ही जिला उपायुक्त मौके पर पहुंचे और राहत तथा उपचार की व्यवस्था का जायजा लिया। प्रशासन ने प्राथमिकता के आधार पर घायलों को तुरंत चिकित्सीय सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था की। पुलिस ने घटनास्थल को घेर लिया और मीडिया कर्मियों को दूर रखा, ताकि बचाव कार्यों में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो।

बचाव में जुटे लोग, स्टॉल संचालक भी घायल

हादसे के तुरंत बाद मेले में मौजूद कई लोग मदद के लिए आगे आए। इसी दौरान एक स्टॉल संचालक राघव भी घायलों को निकालने में जुट गए। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक राहत कार्य के बीच झूले की एक ग्रिल उनके ऊपर आ गिरी, जिससे उनके कंधे में चोट आई। घायल होने के बावजूद उन्होंने सहायता जारी रखने की कोशिश की। इस घटना ने वहां मौजूद लोगों को और अधिक विचलित कर दिया।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि झूला कुछ देर और ऊपर रहता या आसपास भीड़ ज्यादा होती, तो नुकसान और बड़ा हो सकता था। कई परिवार अपने परिजनों को ढूंढते नजर आए और हर तरफ बेचैनी का माहौल था।

प्रशासन की त्वरित सक्रियता

जिला प्रशासन के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर एंबुलेंस और चिकित्सकीय टीमों को बुलाया। घायलों को तुरंत उपचार के लिए भेजा गया। अधिकारियों का कहना है कि प्राथमिक लक्ष्य सभी प्रभावित लोगों को शीघ्र उपचार दिलाना है। पुलिस ने सुरक्षा घेरा बनाकर आम लोगों की आवाजाही सीमित कर दी, ताकि राहत कार्य तेजी से चल सके।

घटना के बाद मेले में लगे अन्य झूलों और संरचनाओं की स्थिति को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई। लोगों के बीच यह सवाल उठने लगे कि क्या सुरक्षा मानकों का पर्याप्त पालन किया गया था और क्या नियमित जांच की व्यवस्था थी।

गेट नंबर दो गिरने से एक और घायल

इसी बीच मेले के दूसरे हिस्से से भी एक चिंताजनक खबर सामने आई। गेट नंबर दो के गिरने से एक व्यक्ति घायल हो गया। उसे तुरंत बीके अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी जांच कराई गई। चिकित्सकों ने आवश्यक परीक्षण किए हैं और उसके उपचार की प्रक्रिया जारी है।

लगातार दो घटनाओं ने मेले में आए लोगों के मन में दहशत पैदा कर दी। कई परिवारों ने एहतियात के तौर पर मेला परिसर से बाहर निकलना ही बेहतर समझा।

सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न

इस हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल मेले में सुरक्षा प्रबंधों को लेकर खड़ा हो गया है। बड़ी संख्या में रोजाना आने वाले लोगों के बीच यदि इस तरह की घटनाएं होती हैं, तो व्यवस्थाओं की मजबूती पर चिंता स्वाभाविक है। उपस्थित लोगों का कहना है कि झूलों और प्रवेश द्वारों की मजबूती तथा नियमित निगरानी बेहद जरूरी है।

प्रशासन की ओर से फिलहाल प्राथमिकता राहत और उपचार पर रखी गई है, लेकिन आने वाले समय में जांच और जवाबदेही को लेकर भी चर्चा तेज होने की संभावना है। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि घायलों को बेहतर चिकित्सा सुविधा मिले और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

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