स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के दौरान सामने आई खामियां, बंगाल में सियासी माहौल गरम

चुनाव आयोग ने भारतीय क्रिकेट टीम के तेज गेंदबाज Mohammed Shami को नोटिस जारी किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार शमी और उनके भाई के मतदाता पंजीकरण से जुड़े प्रपत्रों में कुछ तकनीकी गड़बड़ियां पाई गई हैं। इन्हीं खामियों के आधार पर दोनों को सुनवाई के लिए बुलाया गया है। हालांकि, इस पूरे मामले पर अभी तक न तो मोहम्मद शमी की ओर से और न ही Election Commission of India की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने आया है।

बताया जा रहा है कि शमी के एन्यूमरेशन फॉर्म में संतानों से संबंधित मैपिंग और स्वयं की मैपिंग से जुड़ी प्रक्रियात्मक त्रुटियां दर्ज की गई हैं। इसके बाद दक्षिण कोलकाता के कोलकाता नगर निगम के वार्ड क्रमांक 93 से नोटिस जारी किया गया, जिसमें उन्हें सहायक निर्वाचक निबंधन अधिकारी के समक्ष उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने को कहा गया है। शमी इसी वार्ड में मतदाता के रूप में पंजीकृत हैं, जो रासबिहारी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है।

लोकसभा चुनाव में अमरोहा में किया था मतदान

दिलचस्प तथ्य यह है कि वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान मोहम्मद शमी ने उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले में स्थित अपने पैतृक गांव में मतदान किया था। इसके बावजूद उनका नाम कोलकाता के वार्ड क्रमांक 93 की मतदाता सूची में दर्ज है। विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान जब मतदाता सूची का मिलान और अद्यतन किया गया, तब यह विसंगति सामने आई। इसी आधार पर संबंधित अधिकारियों ने नोटिस जारी कर सुनवाई की तारीख तय की।

ड्राफ्ट मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नाम कटने से बढ़ा विवाद

पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद 16 दिसंबर को प्रारूप मतदाता सूची प्रकाशित की गई थी। इस सूची में राज्यभर से लगभग 58 लाख से अधिक नाम हटाए जाने की जानकारी सामने आई। इसके बाद दावा, आपत्ति और सुनवाई की प्रक्रिया शुरू की गई, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों को अपने दस्तावेजों के साथ उपस्थित होने के लिए बुलाया जा रहा है। चुनाव आयोग का कहना है कि यदि किसी फॉर्म में त्रुटि है, मैपिंग सही नहीं है या दस्तावेजों में कमी पाई जाती है, तो संबंधित व्यक्ति को सुनवाई का अवसर दिया जाता है ताकि मतदाता सूची शुद्ध और अद्यतन रह सके।

विजय हजारे ट्रॉफी के कारण पहली सुनवाई में नहीं पहुंचे शमी

आर्थिक समाचार पत्र की रिपोर्ट के अनुसार, मोहम्मद शमी तय तारीख पर होने वाली सुनवाई में शामिल नहीं हो सके। इन दिनों वह राजकोट में आयोजित विजय हजारे ट्रॉफी में बंगाल की टीम का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। इसी कारण उन्होंने अधिकारियों को अपनी व्यस्तता से अवगत कराया है। अब उनकी अगली सुनवाई 9 से 11 जनवरी के बीच निर्धारित की गई है। उल्लेखनीय है कि 11 जनवरी से शुरू हो रही न्यूजीलैंड के खिलाफ सीमित ओवरों की श्रृंखला के लिए भी शमी का चयन नहीं हुआ है।

चोट और सर्जरी के बाद वापसी की कोशिश

शमी ने पिछले वर्ष टखने की सर्जरी कराई थी। इसके बाद उनके दाएं घुटने में लगातार दर्द की शिकायत सामने आई, जिसके कारण वह ऑस्ट्रेलिया दौरे पर भारतीय टीम का हिस्सा नहीं बन सके थे। उन्होंने आखिरी टेस्ट मैच इंग्लैंड में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेला था और वर्ष 2023 में विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल के लिए भी भारतीय टीम में चुने गए थे। चोट से उबरने के बाद वह घरेलू क्रिकेट के माध्यम से अपनी लय वापस पाने की कोशिश कर रहे हैं।

विशेष गहन पुनरीक्षण पर बंगाल की राजनीति में उबाल

पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण की सुनवाई एक सप्ताह से अधिक समय से चल रही है और इस प्रक्रिया ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। पूर्व मंत्री से लेकर सांसदों के परिजनों तक को नोटिस भेजे जाने के बाद सत्तारूढ़ दल ने चुनाव आयोग पर लोगों को अनावश्यक रूप से परेशान करने का आरोप लगाया है। मुख्यमंत्री Mamata Banerjee ने मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखकर कहा है कि बिना ठोस योजना के की जा रही इस प्रक्रिया से आम नागरिकों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने मांग की है कि यदि राज्य सरकार की आपत्तियों पर विचार नहीं किया जाता है, तो इस प्रक्रिया को अस्थायी रूप से रोका जाए।

मुख्यमंत्री के इस पत्र के बाद राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता Suvendu Adhikari ने भी मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र भेजा। उन्होंने मुख्यमंत्री पर झूठे आरोप लगाने का दावा करते हुए कहा कि सत्तारूढ़ दल फर्जी मतदाताओं को बचाने की कोशिश कर रहा है। उनके अनुसार, विशेष गहन पुनरीक्षण से मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित होगी और इसी कारण सरकार घबराई हुई है।

देशभर में चल रही है विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया

बिहार के बाद देश के 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 28 अक्टूबर से विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया शुरू की गई है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची को अद्यतन करना, नए मतदाताओं के नाम जोड़ना और पुरानी त्रुटियों को सुधारना है। चुनाव आयोग का तर्क है कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए मतदाता सूची का सही और पारदर्शी होना बेहद जरूरी है। इसी क्रम में मशहूर हस्तियों सहित आम नागरिकों को भी नियमों के तहत जांच और सुनवाई से गुजरना पड़ रहा है।

मोहम्मद शमी को मिला नोटिस इसी व्यापक प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है। आने वाले दिनों में उनकी सुनवाई के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मामला केवल तकनीकी सुधार तक सीमित रहता है या इससे आगे कोई कार्रवाई होती है।

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