45 दिनों तक चलेगा पहला चरण, 33 सवालों के माध्यम से घरों की स्थिति, आय और सुविधाओं से जुड़ा डेटा डिजिटल माध्यम से दर्ज किया जाएगा
चेन्नई। तमिलनाडु सरकार ने राज्य में व्यापक स्तर पर जनगणना कराने के लिए आधिकारिक आदेश जारी कर दिया है। इस आदेश के अनुसार राज्य में 17 जुलाई से जनगणना का कार्य शुरू किया जाएगा। यह प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल पद्धति से संचालित की जाएगी, जिसमें सभी आंकड़ों को इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से दर्ज किया जाएगा। सरकार के अनुसार इस अभियान का पहला चरण 30 अगस्त तक चलेगा, जो कुल 45 दिनों की अवधि का होगा।
राज्य सरकार का कहना है कि इस जनगणना के माध्यम से तमिलनाडु के नागरिकों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति से जुड़ी विस्तृत जानकारी एकत्र की जाएगी। इसके लिए लगभग 50 हजार सरकारी कर्मचारियों की तैनाती की जाएगी, जो घर-घर जाकर लोगों से संपर्क करेंगे और निर्धारित प्रश्नों के आधार पर जानकारी एकत्र करेंगे। इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य राज्य के विकास से जुड़े आंकड़ों को अधिक सटीक और व्यवस्थित तरीके से संकलित करना है, ताकि भविष्य की योजनाओं और नीतियों को बेहतर ढंग से तैयार किया जा सके।
डिजिटल पद्धति से दर्ज किए जाएंगे सभी आंकड़े
इस बार की जनगणना में पारंपरिक कागजी प्रक्रिया के स्थान पर पूरी तरह डिजिटल व्यवस्था अपनाई जा रही है। कर्मचारियों द्वारा एकत्र की जाने वाली जानकारी सीधे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के माध्यम से दर्ज की जाएगी। इससे आंकड़ों को सुरक्षित रखने के साथ-साथ उनके विश्लेषण की प्रक्रिया भी तेज और अधिक प्रभावी हो सकेगी।
सरकार का मानना है कि डिजिटल पद्धति अपनाने से डेटा संग्रहण में पारदर्शिता बढ़ेगी और त्रुटियों की संभावना भी कम होगी। साथ ही जनगणना से संबंधित जानकारी को त्वरित रूप से संकलित कर नीति निर्माण में उपयोग किया जा सकेगा।
घर-घर जाकर जुटाई जाएगी जानकारी
राज्य सरकार के निर्देश के अनुसार लगभग 50 हजार कर्मचारी इस अभियान में शामिल होंगे। इन कर्मचारियों को अलग-अलग क्षेत्रों में तैनात किया जाएगा और वे निर्धारित समय अवधि के दौरान घर-घर जाकर लोगों से जानकारी प्राप्त करेंगे।
जनगणना कर्मचारियों को लोगों के घरों तक पहुंचकर उनसे बातचीत के माध्यम से आवश्यक जानकारी एकत्र करनी होगी। इसके लिए उन्हें विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा, ताकि वे डिजिटल उपकरणों का सही उपयोग कर सकें और जानकारी को व्यवस्थित तरीके से दर्ज कर सकें।
सरकार का कहना है कि इस प्रक्रिया के दौरान नागरिकों से सहयोग की अपेक्षा की जाएगी, ताकि सही और सटीक जानकारी एकत्र की जा सके।
लोगों से पूछे जाएंगे 33 महत्वपूर्ण सवाल
जनगणना के दौरान कर्मचारियों द्वारा नागरिकों से कुल 33 प्रश्न पूछे जाएंगे। इन प्रश्नों के माध्यम से परिवार की सामाजिक और आर्थिक स्थिति से जुड़ी जानकारी प्राप्त की जाएगी। इन सवालों के आधार पर सरकार को यह समझने में मदद मिलेगी कि राज्य में लोगों की जीवन परिस्थितियां किस प्रकार की हैं और उन्हें किन सुविधाओं की आवश्यकता है।
इन प्रश्नों में घर की स्थिति, संपत्ति और घरेलू सुविधाओं से संबंधित कई पहलुओं को शामिल किया गया है। कर्मचारियों द्वारा यह भी पूछा जाएगा कि घर स्वयं का है या किराये का, परिवार की आय कितनी है और घर में कौन-कौन सी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं।
घर की सुविधाओं और संपत्ति से जुड़े सवाल भी शामिल
जनगणना प्रक्रिया के दौरान कर्मचारियों द्वारा घर में उपलब्ध सुविधाओं के बारे में भी जानकारी ली जाएगी। इसमें यह जानने की कोशिश की जाएगी कि घर में शौचालय की सुविधा है या नहीं। इसके अलावा यह भी पूछा जाएगा कि परिवार के पास साइकिल, दोपहिया वाहन या कार है या नहीं।
इसी तरह घरेलू सुविधाओं के संबंध में भी जानकारी एकत्र की जाएगी, जैसे घर में फ्रिज, एयर कंडीशनर या अन्य आधुनिक उपकरण उपलब्ध हैं या नहीं। इन जानकारियों के आधार पर सरकार को यह समझने में मदद मिलेगी कि विभिन्न क्षेत्रों में जीवन स्तर कैसा है और किन क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की कमी है।
विकास योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण होंगे आंकड़े
राज्य सरकार का कहना है कि जनगणना से प्राप्त आंकड़े भविष्य की विकास योजनाओं के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। सामाजिक और आर्थिक स्थिति से जुड़े सटीक आंकड़े मिलने से सरकार को यह तय करने में आसानी होगी कि किन क्षेत्रों में विशेष योजनाओं की आवश्यकता है और किन वर्गों को अधिक सहायता की जरूरत है।
डिजिटल पद्धति के माध्यम से एकत्र किए गए आंकड़ों का विश्लेषण कर सरकार विभिन्न क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी योजनाओं को बेहतर ढंग से लागू कर सकेगी।
नागरिकों से सहयोग की अपील
सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे जनगणना कर्मचारियों के साथ सहयोग करें और सही जानकारी उपलब्ध कराएं। अधिकारियों का कहना है कि सटीक जानकारी मिलने से राज्य की योजनाएं अधिक प्रभावी बन सकेंगी और विकास कार्यों को सही दिशा मिल सकेगी।
तमिलनाडु में शुरू होने जा रही यह डिजिटल जनगणना राज्य के लिए एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक प्रक्रिया मानी जा रही है। इससे न केवल राज्य की सामाजिक और आर्थिक स्थिति का व्यापक चित्र सामने आएगा, बल्कि भविष्य की नीतियों और योजनाओं को भी अधिक प्रभावी ढंग से तैयार करने में मदद मिलेगी।
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