कुल 958 अभ्यर्थी विभिन्न सेवाओं के लिए चयनित, 180 उम्मीदवारों को भारतीय प्रशासनिक सेवा में स्थान
नई दिल्ली : संघ लोक सेवा आयोग ने सिविल सेवा परीक्षा 2025 का अंतिम परिणाम घोषित कर दिया है। इस प्रतिष्ठित परीक्षा में राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले के रावतभाटा निवासी अनुज अग्निहोत्री ने अखिल भारतीय स्तर पर पहला स्थान प्राप्त किया है। आयोग द्वारा जारी परिणाम के अनुसार कुल 958 अभ्यर्थियों का चयन विभिन्न अखिल भारतीय और केंद्रीय सेवाओं के लिए किया गया है। इनमें से 180 उम्मीदवारों को भारतीय प्रशासनिक सेवा में स्थान मिला है। अभ्यर्थी अपना परिणाम आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर देख सकते हैं।
इस वर्ष की परीक्षा में अनुज अग्निहोत्री की सफलता विशेष रूप से चर्चा का विषय बनी हुई है, क्योंकि उन्होंने पहले भी दो बार सिविल सेवा परीक्षा उत्तीर्ण की थी और वर्तमान में प्रशासनिक सेवा में कार्यरत थे। अब तीसरे प्रयास में उन्होंने देशभर में पहला स्थान प्राप्त कर अपनी प्रतिभा और मेहनत का परिचय दिया है।
परिवार और शिक्षा से जुड़ी पृष्ठभूमि
अनुज अग्निहोत्री का संबंध राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले के रावतभाटा क्षेत्र से है। उनके पिता केबी अग्निहोत्री राजस्थान परमाणु बिजलीघर की इकाइयों में कार्यरत हैं, जबकि उनकी माता मंजू अग्निहोत्री गृहिणी हैं। साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि से आने वाले अनुज ने अपनी मेहनत और अनुशासन के बल पर यह बड़ी उपलब्धि हासिल की है।
उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा रावतभाटा स्थित परमाणु ऊर्जा केंद्रीय विद्यालय से प्राप्त की। विद्यालयी शिक्षा के दौरान भी उनका प्रदर्शन उत्कृष्ट रहा। बारहवीं कक्षा में उन्होंने 94 प्रतिशत अंक प्राप्त किए थे। पढ़ाई के साथ-साथ उन्हें खेलों में भी रुचि रही है और विशेष रूप से टेबल टेनिस उनका पसंदीदा खेल है।
पहले प्रयास में बने थे उपजिलाधिकारी
अनुज अग्निहोत्री की सफलता की कहानी निरंतर प्रयास और लक्ष्य के प्रति समर्पण का उदाहरण है। उन्होंने पहले प्रयास में ही सिविल सेवा परीक्षा उत्तीर्ण कर ली थी और उन्हें दिल्ली में उपजिलाधिकारी के पद पर नियुक्ति मिली थी। इसके बाद भी उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी और बेहतर रैंक प्राप्त करने के उद्देश्य से दोबारा परीक्षा दी। अंततः सिविल सेवा परीक्षा 2025 में उन्होंने अखिल भारतीय स्तर पर पहला स्थान प्राप्त किया।
उनकी यह उपलब्धि उन युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है जो प्रशासनिक सेवा में जाने का सपना देखते हैं। अनुज की सफलता यह दर्शाती है कि निरंतर प्रयास, धैर्य और स्पष्ट लक्ष्य के साथ कोई भी विद्यार्थी बड़ी उपलब्धि हासिल कर सकता है।
कुल 958 अभ्यर्थियों का चयन
संघ लोक सेवा आयोग द्वारा जारी अंतिम परिणाम में कुल 958 अभ्यर्थियों को विभिन्न सेवाओं के लिए चयनित किया गया है। इनमें भारतीय प्रशासनिक सेवा, भारतीय पुलिस सेवा, भारतीय विदेश सेवा सहित कई अन्य केंद्रीय सेवाएं शामिल हैं।
इस परिणाम में 180 उम्मीदवारों को भारतीय प्रशासनिक सेवा के लिए चुना गया है। इसके अलावा अन्य अभ्यर्थियों को विभिन्न सेवाओं में उनकी रैंक और प्राथमिकताओं के आधार पर स्थान दिया जाएगा। चयनित उम्मीदवारों को आगे प्रशिक्षण के लिए भेजा जाएगा, जिसके बाद उन्हें उनके-अपने कैडर में नियुक्ति दी जाएगी।
कई चरणों में पूरी होती है सिविल सेवा परीक्षा
सिविल सेवा परीक्षा देश की सबसे प्रतिष्ठित और कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। यह परीक्षा तीन चरणों में आयोजित की जाती है, जिनमें प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और व्यक्तित्व परीक्षण शामिल हैं।
सिविल सेवा परीक्षा 2026 की प्रारंभिक परीक्षा 25 मई 2025 को आयोजित की गई थी। इसके बाद मुख्य परीक्षा का आयोजन 22 अगस्त से 31 अगस्त 2025 तक किया गया। मुख्य परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों को व्यक्तित्व परीक्षण के लिए बुलाया गया था। इन साक्षात्कारों की प्रक्रिया 27 फरवरी 2026 को समाप्त हुई, जिसके बाद अंतिम परिणाम जारी किया गया।
कैडर आवंटन नियमों में बड़ा बदलाव
इस वर्ष एक और महत्वपूर्ण बदलाव कैडर आवंटन व्यवस्था में किया गया है। केंद्र सरकार ने 2017 से लागू जोन प्रणाली को समाप्त कर नई कैडर आवंटन नीति 2026 लागू कर दी है। नई व्यवस्था के तहत अब अधिकारियों के कैडर का निर्धारण ‘साइकिल प्रणाली’ के माध्यम से किया जाएगा।
यह नीति भारतीय प्रशासनिक सेवा, भारतीय पुलिस सेवा और भारतीय वन सेवा में चयनित अभ्यर्थियों पर लागू होगी। पहले व्यवस्था के तहत देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 25 कैडरों को पांच भौगोलिक क्षेत्रों में बांटा गया था, जिनमें उत्तर, पश्चिम, दक्षिण, मध्य और पूर्व जोन शामिल थे।
नए समूहों के आधार पर होगा कैडर निर्धारण
नई नीति के तहत अब सभी 25 कैडरों को वर्णानुक्रम के आधार पर व्यवस्थित कर चार समूहों में विभाजित किया गया है। पहले समूह में दिल्ली तथा अन्य केंद्र शासित प्रदेशों के साथ आंध्र प्रदेश, असम-मेघालय, बिहार और छत्तीसगढ़ शामिल हैं। दूसरे समूह में गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, कर्नाटक, केरल और मध्य प्रदेश को रखा गया है।
तीसरे समूह में महाराष्ट्र, मणिपुर, नागालैंड, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, सिक्किम और तमिलनाडु को शामिल किया गया है। चौथे समूह में तेलंगाना, त्रिपुरा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल को रखा गया है।
पहले जोन प्रणाली में उम्मीदवार किसी विशेष क्षेत्र के राज्यों को प्राथमिकता देते थे। यदि पहला राज्य नहीं मिलता था तो उसी क्षेत्र के अन्य राज्यों में नियुक्ति मिलने की संभावना रहती थी। नई व्यवस्था में वर्णानुक्रम के आधार पर समूह बनाए गए हैं, जिससे एक ही समूह में भौगोलिक रूप से अलग-अलग राज्यों में नियुक्ति मिलने की संभावना बढ़ गई है।
इस नई नीति का उद्देश्य कैडर आवंटन प्रक्रिया को अधिक संतुलित और पारदर्शी बनाना है। इसके माध्यम से अधिकारियों को देश के विभिन्न क्षेत्रों में सेवा देने का अवसर मिलेगा और प्रशासनिक अनुभव भी व्यापक होगा।
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