नागपुर में मतदान के बाद बोले आरएसएस प्रमुख, कहा– नोटा लोकतंत्र की सबसे खराब स्थिति

नागपुर, 15 जनवरी (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत ने मतदान के अधिकार को लोकतंत्र की आत्मा बताते हुए नागरिकों से अपील की कि वे ‘नोटा’ का प्रयोग करने के बजाय उपलब्ध उम्मीदवारों में से योग्य और सर्वश्रेष्ठ व्यक्ति का चयन करें। महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनाव के लिए गुरुवार को जारी मतदान के बीच नागपुर में वोट डालने के बाद उन्होंने यह महत्वपूर्ण बयान दिया।

नागपुर में सबसे पहले मतदान करने पहुंचे

डॉ. मोहन भागवत गुरुवार सुबह नागपुर के महाल क्षेत्र स्थित नागपुर नाइट हाईस्कूल के मतदान केंद्र पहुंचे। उनके साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व सरकार्यवाह सुरेश उपाख्य जोशी भी मौजूद रहे। दोनों नेता मतदान केंद्र पर पहुंचने वाले शुरुआती मतदाताओं में शामिल थे। मतदान प्रक्रिया पूरी करने के बाद उन्होंने लोकतंत्र और मतदान से जुड़े मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी।

नोटा का प्रयोग लोकतंत्र को कमजोर करता है

मतदान के बाद डॉ. भागवत ने कहा कि ‘नोटा’ का अर्थ सभी उम्मीदवारों को नकारना है, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे खराब स्थिति मानी जा सकती है। उनके अनुसार नोटा का उपयोग करने से वास्तव में अवांछित उम्मीदवारों को अप्रत्यक्ष रूप से लाभ मिल सकता है, क्योंकि इससे योग्य विकल्प के पक्ष में मतों का एक हिस्सा बंट जाता है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि लोकतंत्र में विकल्पहीनता नहीं होती और हर परिस्थिति में उपलब्ध विकल्पों में से सर्वश्रेष्ठ को चुनना ही समाज के हित में होता है।

मतदान नागरिक का कर्तव्य, जनहित सर्वोपरि

आरएसएस प्रमुख ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में मतदान केवल अधिकार नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य भी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि मतदान करते समय व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर उठकर जनहित और समाज के दीर्घकालिक हितों को ध्यान में रखा जाना चाहिए। उन्होंने चेताया कि यदि नागरिक अपने कर्तव्यों के प्रति उदासीन हो जाते हैं, तो इसका परिणाम अराजकता के रूप में सामने आ सकता है।

अराजकता समाज के लिए घातक

डॉ. भागवत ने कहा कि अराजकता का अर्थ राजा या नेतृत्व के अभाव की स्थिति है। जब समाज में सही नेतृत्व का चयन नहीं होता, तो अव्यवस्था जन्म लेती है, जो अंततः पूरे समाज के लिए घातक साबित होती है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती तभी संभव है, जब नागरिक जिम्मेदारी के साथ मतदान करें और नेतृत्व के चयन में सक्रिय भूमिका निभाएं।

महाभारत से दिया नेतृत्व का संदेश

अपने वक्तव्य में डॉ. भागवत ने महाभारत का संदर्भ देते हुए कहा कि इस महान ग्रंथ में भी सही नेतृत्व के चयन के महत्व को रेखांकित किया गया है। उन्होंने कहा कि इतिहास और धर्मग्रंथ हमें यह सिखाते हैं कि समाज की दिशा और दशा नेतृत्व पर निर्भर करती है, इसलिए नेतृत्व का चयन सोच-समझकर और विवेकपूर्ण ढंग से किया जाना चाहिए।

मतदाता जागरूकता अभियानों का दिखेगा असर

डॉ. भागवत ने यह भी कहा कि चुनाव आयोग द्वारा मतदान को लेकर लगातार जनजागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। इन अभियानों का उद्देश्य नागरिकों को उनके मताधिकार और जिम्मेदारी के प्रति जागरूक करना है। उन्होंने विश्वास जताया कि इन प्रयासों का सकारात्मक प्रभाव धीरे-धीरे दिखाई देगा और लोग अधिक जिम्मेदारी के साथ मतदान प्रक्रिया में भाग लेंगे।

उन्होंने अंत में एक बार फिर दोहराया कि लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए ‘नोटा नहीं, उपलब्ध विकल्पों में से सर्वश्रेष्ठ के चयन’ की सोच को अपनाना आवश्यक है।

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