हमारा दिल बिना रुके दिन-रात काम करता है। यही अंग पूरे शरीर में खून पंप करके हमें जीवित और सक्रिय रखता है। जब दिल सही तरीके से काम करता है तो शरीर स्वस्थ रहता है, लेकिन जैसे ही दिल या उससे जुड़ी नसों में कोई गड़बड़ी आती है, उसका असर पूरे शरीर पर पड़ता है। इसी वजह से दिल की बीमारियों की समय पर पहचान बेहद जरूरी मानी जाती है। आज के समय में डॉक्टर अक्सर एंजियोग्राफी कराने की सलाह देते हैं, लेकिन बहुत से लोगों के मन में इसे लेकर भ्रम और डर बना रहता है।

एंजियोग्राफी क्या है और क्यों जरूरी है

एंजियोग्राफी एक विशेष जांच है, जिसके जरिए यह पता लगाया जाता है कि दिल, दिमाग या शरीर के अन्य हिस्सों की नसों और धमनियों में खून का बहाव ठीक से हो रहा है या नहीं। अगर कहीं नस में संकुचन या ब्लॉकेज है, तो यह जांच उसे साफ तौर पर दिखा देती है।
सीने में दर्द, सांस फूलना, बार-बार थकान महसूस होना, बेचैनी या अचानक पसीना आना—इन लक्षणों में डॉक्टर अक्सर एंजियोग्राफी की सलाह देते हैं, ताकि समय रहते समस्या की सही वजह सामने आ सके।

एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी में अंतर

अक्सर लोग एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी को एक ही समझ लेते हैं, जबकि दोनों अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं।
एंजियोग्राफी सिर्फ जांच है, जिससे यह पता चलता है कि नस या आर्टरी में कहां और कितनी रुकावट है।
एंजियोप्लास्टी इलाज की प्रक्रिया है, जिसमें उस रुकावट को खोला जाता है, कई बार स्टेंट भी लगाया जाता है। यानी पहले जांच होती है, फिर जरूरत पड़ने पर उपचार किया जाता है।

एंजियोग्राफी कैसे की जाती है

इस प्रक्रिया में डॉक्टर सबसे पहले उस जगह को चुनते हैं, जहां से नसों तक पहुंचना आसान हो—अक्सर यह हाथ या पैर होता है। वहां से एक पतली नली, जिसे कैथेटर कहा जाता है, नस में डाली जाती है।
इसके बाद कैथेटर के जरिए एक विशेष रंगीन द्रव्य नसों में भेजा जाता है। जब यह द्रव्य खून के साथ बहता है, तो एक्स-रे मशीन उसकी तस्वीरें लेती है। इन्हीं तस्वीरों से डॉक्टर यह देख पाते हैं कि खून का बहाव सामान्य है या कहीं रुकावट मौजूद है।
यह पूरी प्रक्रिया आमतौर पर एक घंटे के आसपास पूरी हो जाती है। जांच के बाद कैथेटर निकाल दिया जाता है और मरीज को कुछ समय के लिए आराम करने की सलाह दी जाती है।

जांच के बाद क्या सावधानियां जरूरी हैं

अगर एंजियोग्राफी में ब्लॉकेज पाया जाता है और एंजियोप्लास्टी या स्टेंट लगाया जाता है, तो इसके बाद कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना जरूरी होता है।
मरीज को भारी वजन उठाने से बचना चाहिए और धूम्रपान व शराब से पूरी तरह दूरी बनानी चाहिए। डॉक्टर द्वारा दी गई दवाइयों को नियमित लेना बेहद जरूरी है।
खान-पान में भी सुधार करना चाहिए—फल, सब्जियां, साबुत अनाज और अच्छे तेल का सेवन बढ़ाएं, जबकि नमक, चीनी और तले-भुने खाद्य पदार्थ कम करें। हल्की-फुल्की एक्सरसाइज या रोजाना टहलना दिल की सेहत के लिए फायदेमंद होता है।

समय पर जांच, लंबी उम्र की कुंजी

एंजियोग्राफी डरने की नहीं, बल्कि समय पर बीमारी पकड़ने की एक महत्वपूर्ण जांच है। सही समय पर की गई यह जांच दिल के गंभीर दौरे और जटिलताओं से बचा सकती है। अगर डॉक्टर एंजियोग्राफी की सलाह दें, तो इसे टालने के बजाय सही जानकारी के साथ इसे कराना दिल की सेहत के लिए एक समझदारी भरा कदम माना जाता है।