78वीं सेना दिवस परेड में अत्याधुनिक हथियारों, शौर्य और परंपरा का भव्य प्रदर्शन, गुलाबी नगरी बनी सैन्य गौरव की साक्षी
जयपुर, 15 जनवरी (हि.स.)। भारतीय सेना की 78वीं सेना दिवस परेड बुधवार को ऐतिहासिक रूप से पहली बार किसी सैन्य क्षेत्र से बाहर आयोजित की गई। इस गौरवपूर्ण आयोजन का साक्षी बना राजस्थान की राजधानी जयपुर, जहां जगतपुरा के महल रोड पर सेना की शक्ति, अनुशासन और परंपरा का भव्य प्रदर्शन देखने को मिला। सड़कों के दोनों ओर हजारों की संख्या में नागरिक एकत्र हुए और उन्होंने भारतीय सेना के अत्याधुनिक हथियारों, सैन्य वाहनों और साहसिक प्रदर्शनों को बेहद करीब से देखा। पूरे आयोजन में देशभक्ति और गर्व का वातावरण साफ झलक रहा था।
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आम जनता के बीच सेना की परेड, ऐतिहासिक पहल
सेना दिवस परेड का आयोजन आमतौर पर सैन्य छावनियों तक सीमित रहता है, लेकिन इस बार इसे आम नागरिकों के बीच लाकर सेना ने जनता से अपने गहरे जुड़ाव का संदेश दिया। महल रोड पर लगभग तीन किलोमीटर लंबे मार्ग में आयोजित परेड ने जयपुर को सैन्य गौरव के रंग में रंग दिया। जीवन रेखा हॉस्पिटल चौराहे से बॉम्बे हॉस्पिटल चौराहे तक फैले परेड मार्ग पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। दर्शकों की सुविधा के लिए शहर के विभिन्न हिस्सों में 18 स्थानों पर पार्किंग की व्यवस्था की गई, जिससे लोगों को आयोजन स्थल तक पहुंचने में कोई परेशानी न हो।
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— सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग, राजस्थान सरकार (@DIPRRajasthan) January 15, 2026
ब्रह्मोस और पिनाका ने खींचा लोगों का ध्यान
परेड के दौरान भारतीय सेना की आधुनिक सैन्य क्षमता का प्रभावशाली प्रदर्शन किया गया। आम नागरिकों ने पहली बार ब्रह्मोस मिसाइल, पिनाका मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर और अन्य अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों को नजदीक से देखा। ये हथियार भारत की सामरिक शक्ति और आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता के प्रतीक माने जाते हैं। हथियारों को देखकर लोगों में उत्साह और गर्व का भाव साफ नजर आया, वहीं युवाओं में सेना के प्रति आकर्षण और सम्मान और भी गहरा होता दिखा।
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आकाश में अपाचे हेलीकॉप्टरों का रोमांचक प्रदर्शन
परेड के दौरान आसमान में अपाचे अटैक हेलीकॉप्टरों ने फ्लाई-पास्ट कर अपनी युद्धक क्षमताओं का प्रदर्शन किया। हेलीकॉप्टरों की गड़गड़ाहट और सटीक उड़ान ने दर्शकों को रोमांच से भर दिया। इसके साथ ही हेलीकॉप्टरों से पुष्पवर्षा कर शहीदों और वीर सैनिकों को नमन किया गया, जिससे पूरे माहौल में भावुकता और सम्मान का भाव घुल गया।
शहीदों को श्रद्धांजलि से हुई परेड की शुरुआत
सेना दिवस परेड की शुरुआत ऑपरेशन ‘सिंदूर’ में शहीद हुए जवानों को मरणोपरांत सेना मेडल (वीरता) प्रदान करने के साथ हुई। इस भावुक क्षण के दौरान 1 पैरा स्पेशल फोर्स के शहीद लांस नायक प्रदीप कुमार की मां सम्मान ग्रहण करते समय मंच पर अचानक बेहोश हो गईं। मौके पर मौजूद सैन्य अधिकारियों और चिकित्सकीय टीम ने तुरंत उन्हें संभाला और एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाया। यह दृश्य शहीद परिवारों के त्याग और पीड़ा को उजागर करता नजर आया।
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वीरता पुरस्कारों से सजे अधिकारी बने परेड का नेतृत्व
इसके बाद गैलेंट्री अवॉर्ड से सम्मानित अधिकारियों ने परेड कमांडर को सलामी दी। परमवीर चक्र, अशोक चक्र और महावीर चक्र से सम्मानित अधिकारी परेड का नेतृत्व कर रहे थे। इन वीर सैनिकों को सामने देखकर दर्शकों में देशभक्ति का जोश और सम्मान की भावना और भी प्रबल हो गई। परेड अनुशासन, तालमेल और सैन्य गरिमा का जीवंत उदाहरण बनी।
मॉड्यूलर ब्रिज और घुड़सवार दल बने आकर्षण
परेड में भारतीय सेना के 46 मीटर लंबे मॉड्यूलर ब्रिज का भी प्रदर्शन किया गया, जिसका उपयोग नदियों और गहरी खाइयों को तेजी से पार करने के लिए किया जाता है। इसके अलावा 61वीं कैवेलरी के घुड़सवार दल ने भी परेड में हिस्सा लिया। यह विश्व की एकमात्र सक्रिय घुड़सवार कैवेलरी रेजिमेंट है, जिसकी स्थापना वर्ष 1953 में हुई थी और जिसे इतिहास में अंतिम घुड़सवार चार्ज का नेतृत्व करने का गौरव प्राप्त है। घोड़ों की सधी हुई चाल और सैनिकों का अनुशासन दर्शकों के लिए खास आकर्षण रहा।
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नेपाल आर्मी बैंड और राजस्थानी संस्कृति की झलक
परेड में नेपाल आर्मी बैंड की सहभागिता ने भारत और नेपाल के बीच सैन्य मित्रता और सहयोग का संदेश दिया। इसके साथ ही राजस्थानी संस्कृति की झलक भी परेड में देखने को मिली, जिसने आयोजन को स्थानीय रंग और सांस्कृतिक गरिमा प्रदान की।
मुख्य अतिथि और विशिष्ट जनों की मौजूदगी
सेना दिवस परेड के मुख्य अतिथि मिजोरम के राज्यपाल जनरल वीके सिंह रहे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान सहित सेना के वरिष्ठ अधिकारी और अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सभी ने भारतीय सेना के शौर्य, अनुशासन और राष्ट्र सेवा की भावना की सराहना की।
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