नई दिल्ली: भारत मंडपम में वीर बाल दिवस का भव्य आयोजन
नई दिल्ली के भारत मंडपम में शुक्रवार को ‘वीर बाल दिवस’ के अवसर पर एक विशेष और भावनात्मक कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शामिल हुए। कार्यक्रम की शुरुआत प्रधानमंत्री द्वारा मत्था टेकने के साथ हुई। इस अवसर पर उन्होंने साहिबजादों की शहादत को नमन करते हुए कहा कि उनका अद्वितीय बलिदान भारत की आत्मा में सदैव जीवित रहेगा और आने वाली पीढ़ियों को अन्याय के विरुद्ध खड़े होने की प्रेरणा देता रहेगा।
साहिबजादों का बलिदान: भारतीय इतिहास का अमर अध्याय
‘वीर बाल दिवस’ श्री गुरु गोबिंद सिंह के छोटे पुत्रों बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह की शहादत और अदम्य साहस को स्मरण करने के लिए मनाया जाता है। बहुत कम आयु में उन्होंने अत्याचार और धर्म परिवर्तन के दबाव के सामने झुकने से इनकार कर दिया और अपने प्राणों की आहुति दे दी। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह बलिदान केवल इतिहास की घटना नहीं, बल्कि साहस, धर्मनिष्ठा और आत्मसम्मान की अमर प्रेरणा है।
Veer Baal Diwas is a day of reverence, dedicated to remembering the sacrifice of the brave Sahibzades. We recall the unshakeable faith of Mata Gujri Ji and the immortal teachings of Sri Guru Gobind Singh Ji. This day is associated with courage, conviction and righteousness. Their…
— Narendra Modi (@narendramodi) December 26, 2025
प्रधानमंत्री का संबोधन: बच्चों और युवाओं के लिए संदेश
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि साहिबजादों की गाथा बच्चों और युवाओं को सिखाती है कि सत्य और धर्म के मार्ग पर चलना कितना महत्वपूर्ण है, चाहे परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों। उन्होंने कहा कि ‘वीर बाल दिवस’ का उद्देश्य केवल स्मरण नहीं, बल्कि उन मूल्यों को जीवन में उतारना है जिनके लिए साहिबजादों ने अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।
Addressing a programme on Veer Baal Diwas. We remember the exemplary courage and sacrifice of the Sahibzades.
— Narendra Modi (@narendramodi) December 26, 2025
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देशभर में आयोजन: बच्चों को जोड़ने का प्रयास
इस अवसर पर भारत सरकार की ओर से देशभर में विविध कार्यक्रम आयोजित किए गए। स्कूलों, आंगनवाड़ी केंद्रों, चाइल्ड केयर संस्थानों और अन्य शिक्षण स्थलों पर कहानी सुनाने के सत्र, कविता पाठ, पोस्टर निर्माण और निबंध लेखन जैसी गतिविधियां आयोजित की गईं। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य बच्चों और युवाओं को साहिबजादों की विरासत, उनके साहस और उनके आदर्शों से जोड़ना है।
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डिजिटल मंचों पर सहभागिता
सरकार ने डिजिटल माध्यमों को भी इस अभियान से जोड़ा। माईगव और माईभारत पोर्टल पर ऑनलाइन कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिससे देश के दूर-दराज़ क्षेत्रों के बच्चे और युवा भी ‘वीर बाल दिवस’ से जुड़ सकें। प्रधानमंत्री ने कहा कि डिजिटल माध्यमों से इतिहास और मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है।
राष्ट्रीय बाल पुरस्कार विजेताओं की उपस्थिति
भारत मंडपम में आयोजित इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार प्राप्त करने वाले बच्चे भी उपस्थित रहे। प्रधानमंत्री ने इन बच्चों की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि ये बच्चे आधुनिक भारत की आशा और भविष्य हैं। उन्होंने कहा कि साहिबजादों के साहस से प्रेरणा लेकर आज के बच्चे भी समाज और राष्ट्र के लिए असाधारण योगदान दे सकते हैं।
वीर बाल दिवस की घोषणा और उसका महत्व
प्रधानमंत्री ने स्मरण कराया कि ‘वीर बाल दिवस’ की घोषणा उन्होंने जनवरी 2022 में गुरु गोबिंद सिंह के प्रकाश पर्व के अवसर पर की थी। तब से हर वर्ष यह दिन साहिबजादों की शहादत को सम्मान देने और उनके अद्वितीय साहस को याद करने के लिए मनाया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह दिवस हमें यह याद दिलाता है कि भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक शक्ति त्याग, बलिदान और सत्य पर आधारित है।
साहिबजादों की गाथा: वर्तमान और भविष्य के लिए प्रेरणा
अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने कहा कि साहिबजादों की गाथा केवल अतीत की कहानी नहीं है, बल्कि यह आज और आने वाले समय के लिए भी मार्गदर्शक है। उन्होंने कहा कि जब भी देश और समाज कठिन परिस्थितियों से गुजरेगा, साहिबजादों का साहस हमें सही दिशा दिखाता रहेगा।
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