इतिहास के आघातों के बावजूद आस्था, पुनर्निर्माण और आत्मबल का अमर उदाहरण बना सोमनाथ
नई दिल्ली, 05 जनवरी (हि.स.)। भारत की सनातन चेतना, आस्था और आध्यात्मिक शक्ति के प्रतीक सोमनाथ मंदिर के विध्वंस को एक हजार वर्ष पूरे होने के अवसर पर भारतीय जनता पार्टी ने इसे भारत की अविनाशी आध्यात्मिक ऊर्जा का ज्योति प्रतीक बताया है। पार्टी का कहना है कि इतिहास में बार-बार हुए आक्रमणों और विध्वंस के बावजूद सोमनाथ मंदिर का पुनः खड़ा होना इस बात का प्रमाण है कि भारत की आत्मा को कभी नष्ट नहीं किया जा सकता।
भाजपा मुख्यालय में प्रेसवार्ता, इतिहास और वर्तमान का जोड़ा गया संदर्भ
सोमवार को नई दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि आज का दिन केवल एक ऐतिहासिक घटना को याद करने का नहीं है, बल्कि यह उस चेतना को स्मरण करने का अवसर है, जिसने भारत को हर बार अंधकार से प्रकाश की ओर अग्रसर किया। उन्होंने कहा कि जब-जब इतिहास में बर्बर आक्रमणों के माध्यम से भारत की धार्मिक और आध्यात्मिक शक्ति को नष्ट करने का प्रयास किया गया, तब-तब भारत की सनातन चेतना एक ज्योति शक्ति के रूप में प्रकट होकर विश्व को नया मार्ग दिखाती रही।
आज हम एक ऐसे विषय पर आपका ध्यान आकृष्ट करना चाहते हैं, जो राजनीति का विषय नहीं है। जो भारत की पहचान, अस्मिता, अस्तित्व और भविष्य की संभावना और स्वरूप से संबंधित है।आज 6 जनवरी, 2026 है।
— Dr. Sudhanshu Trivedi (@SudhanshuTrived) January 5, 2026
आज से ठीक 1 हजार साल पहले महमूद गजनवी के द्वारा श्री सोमनाथ मंदिर का विध्वंस किया गया था, जो… pic.twitter.com/sy1STpG11A
इतिहास की पीड़ा और स्मरण की आवश्यकता
सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि हर देश के इतिहास में कुछ ऐसे क्षण और तिथियां होती हैं, जो अत्यंत पीड़ादायक और असहनीय आघातों से जुड़ी होती हैं। इन घटनाओं को याद रखना इसलिए आवश्यक होता है, ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदियों की पुनरावृत्ति न हो। उन्होंने कहा कि सोमनाथ मंदिर का विध्वंस केवल एक धार्मिक स्थल पर आक्रमण नहीं था, बल्कि भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक आत्मा को तोड़ने का प्रयास था, जो कभी सफल नहीं हो सका।
/filters:format(webp)/swadeshjyoti/media/media_files/2026/01/05/somanath_mandir-2026-01-05-18-30-11.jpg)
सोमनाथ केवल मंदिर नहीं, आस्था और मोक्ष का मार्ग
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि सोमनाथ केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि ऐसा शिवलिंग है, जिसके दर्शन मात्र से पापों का नाश होता है, पुण्य की प्राप्ति होती है और मनोवांछित फल सिद्ध होते हैं। उन्होंने कहा कि यह आस्था का विषय होने के साथ-साथ भारत की आध्यात्मिक परंपरा का केंद्र है, जो सदियों से लोगों को मोक्ष और आत्मिक शांति की ओर प्रेरित करता रहा है।
1951 की पुनर्स्थापना और राष्ट्र निर्माण का स्वप्न
प्रेसवार्ता में सुधांशु त्रिवेदी ने 11 मई 1951 का ऐतिहासिक संदर्भ भी प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि सोमनाथ मंदिर की पुनर्स्थापना के समय भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने कहा था कि सोमनाथ की पूर्ण प्रतिष्ठा केवल मंदिर के भव्य रूप में खड़े होने से नहीं होगी, बल्कि उस दिन मानी जाएगी, जब भारत की समृद्धि भी उसी शिखर पर पहुंचेगी, जिसकी ओर आकर्षित होकर अतीत में क्रूर आक्रमण किए गए थे।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि उस समय तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के विरोध के बावजूद, राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की उपस्थिति में सोमनाथ पुनर्निर्माण का स्वप्न साकार हुआ था।
वर्तमान भारत और सोमनाथ के संकल्प की पूर्ति
सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि आज एक हजार वर्ष बाद जब हम पीछे मुड़कर देखते हैं, तो यह स्पष्ट होता है कि सोमनाथ का संकल्प केवल मंदिर तक सीमित नहीं था, बल्कि वह भारत की पुनः समृद्धि और आत्मगौरव से जुड़ा हुआ था। उन्होंने कहा कि आज नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत आर्थिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक रूप से निरंतर आगे बढ़ रहा है और वह स्वप्न अब पूर्णता की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है।
भाजपा प्रवक्ता के अनुसार, सोमनाथ मंदिर आज केवल अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के भारत के आत्मविश्वास, आत्मबल और सनातन चेतना का जीवंत प्रतीक बन चुका है।
✨ स्वदेश ज्योति के द्वारा | और भी दिलचस्प खबरें आपके लिए… सिर्फ़ स्वदेश ज्योति पर!
पोत ‘समुद्र प्रताप’ का नाम इसकी गरिमा और शक्ति का प्रतीक: राजनाथ सिंह
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को अकाल तख्त साहिब से नोटिस जारी
बांग्लादेश ने IPL प्रसारण पर लगाया बैन, टी-20 वर्ल्ड कप में भारत नहीं भेजेगा टीम
दीपिका पादुकोण का बर्थडे बना खास, AA22xA6 से जुड़ा लुक हुआ वायरल
/swadeshjyoti/media/agency_attachments/2025/11/09/2025-11-09t071157234z-logo-640-swadesh-jyoti-1-2025-11-09-12-41-56.png)
/swadeshjyoti/media/agency_attachments/2025/11/09/2025-11-09t071151025z-logo-640-swadesh-jyoti-1-2025-11-09-12-41-50.png)
/swadeshjyoti/media/media_files/2026/01/05/bjp-2026-01-05-18-29-53.jpg)