गोवा में भारतीय तटरक्षक बल के सबसे बड़े स्वदेशी प्रदूषण नियंत्रण पोत का जलावतरण

पणजी, 5 जनवरी (हि.स.)। भारत की समुद्री सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण क्षमताओं को नई मजबूती देते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गोवा में भारतीय तटरक्षक बल के अत्याधुनिक पोत ‘समुद्र प्रताप’ का जलावतरण किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि ‘समुद्र प्रताप’ का नाम ही इसकी गरिमा, शक्ति और उद्देश्य को दर्शाता है। यह पोत समुद्री प्रदूषण नियंत्रण के साथ-साथ खोज एवं बचाव अभियानों, तटीय गश्त और समुद्री सुरक्षा को और अधिक प्रभावी बनाएगा।

समुद्री सीमाओं की सुरक्षा में तटरक्षक बल की अहम भूमिका

रक्षा मंत्री ने भारतीय तटरक्षक बल के अधिकारियों और जवानों को बधाई देते हुए कहा कि वे समय, मौसम और परिस्थितियों की परवाह किए बिना देश की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा में लगातार जुटे रहते हैं। उन्होंने कहा कि समुद्र में सेवा देना अत्यंत चुनौतीपूर्ण कार्य है, लेकिन तटरक्षक बल राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए अपने दायित्वों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करता है। उन्होंने इसे देश के लिए गर्व का विषय बताया।

स्वदेशी निर्माण और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ी उपलब्धि

राजनाथ सिंह ने इस पोत के निर्माण में योगदान देने वाली गोवा शिपयार्ड लिमिटेड की टीम की सराहना करते हुए कहा कि ‘समुद्र प्रताप’ भारत की स्वदेशी रक्षा उत्पादन क्षमता का सशक्त उदाहरण है। उन्होंने कहा कि यह पोत आत्मनिर्भर भारत की सोच को मजबूती देता है और देश की तकनीकी दक्षता को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित करता है।

भारत का पहला स्वदेशी प्रदूषण नियंत्रण पोत

रक्षा मंत्री ने जानकारी दी कि ‘समुद्र प्रताप’ भारत का पहला स्वदेशी रूप से डिजाइन किया गया प्रदूषण नियंत्रण पोत है और यह अब तक भारतीय तटरक्षक बल के बेड़े में शामिल सबसे बड़ा जहाज है। इसका डिस्प्लेसमेंट 4170 टन और लंबाई 150 मीटर है, जबकि इसकी अधिकतम गति 22 नॉटिकल मील प्रति घंटा है। ये विशेषताएं इसे समुद्र में लंबे समय तक टिके रहकर प्रभावी संचालन में सक्षम बनाती हैं।

SAMUDRA PRATAP
SAMUDRA PRATAP

प्रदूषण नियंत्रण और आपदा प्रबंधन में उन्नत क्षमताएं

‘समुद्र प्रताप’ में उन्नत प्रदूषण डिटेक्शन सिस्टम लगाए गए हैं, जो समुद्र में तेल रिसाव और अन्य प्रदूषकों का सटीक पता लगाने में सक्षम हैं। इसमें समर्पित प्रदूषण प्रतिक्रिया नौकाएं, आधुनिक अग्निशमन प्रणाली और उच्च क्षमता वाला बाहरी अग्निशमन तंत्र मौजूद है। इसके अलावा, हेलीकॉप्टर हैंगर और एविएशन सपोर्ट की सुविधा इसे खोज एवं बचाव अभियानों में और अधिक प्रभावी बनाती है।

विशेष आर्थिक क्षेत्र में प्रदूषण-रोधी अभियानों को मिलेगी मजबूती

भारतीय तटरक्षक बल के अनुसार यह पोत चिपचिपे तेल से प्रदूषकों को पुनः प्राप्त करने, दूषित पदार्थों का विश्लेषण करने और दूषित पानी से तेल को अलग करने में सक्षम है। विशेष आर्थिक क्षेत्र के भीतर और उसके बाहर समुद्री प्रदूषण से निपटने के लिए यह जहाज अहम भूमिका निभाएगा। तेल रिसाव जैसी घटनाओं में यह लंबे समय तक समुद्र में रहकर व्यापक प्रदूषण-रोधी अभियान चला सकता है।

SAMUDRA PRATAP

अत्याधुनिक हथियार और तकनीकी प्रणालियां

गोवा शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा निर्मित इस पोत में 60 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है। इसमें 30 मिलीमीटर सीआरएन-91 गन, दो 12.7 मिलीमीटर स्थिरीकृत रिमोट-नियंत्रित गन, स्वदेशी एकीकृत ब्रिज सिस्टम, एकीकृत मंच प्रबंधन प्रणाली और स्वचालित ऊर्जा प्रबंधन प्रणाली जैसी आधुनिक तकनीकें शामिल हैं, जो इसे भविष्य की समुद्री चुनौतियों के लिए पूरी तरह तैयार बनाती हैं।

कार्यक्रम में कई प्रमुख हस्तियां रहीं मौजूद

जलावतरण कार्यक्रम में गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह, दक्षिण गोवा के सांसद विरयाटो फर्नांडीस सहित कई जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ अधिकारी और तटरक्षक बल के अधिकारी उपस्थित रहे। सभी ने ‘समुद्र प्रताप’ को भारत की समुद्री सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया।

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