15 जनवरी को अकाल तख्त सचिवालय में पेश होने के निर्देश, पंथक मर्यादा से जुड़े गंभीर आरोप
चंडीगढ़, 05 जनवरी (हि.स.)। पंजाब में गुरु ग्रंथ साहिब के पावर स्वरूप के कथित रूप से गायब होने के मामले ने सोमवार को नया और संवेदनशील मोड़ ले लिया। सिख पंथ की सर्वोच्च धार्मिक संस्था अकाल तख्त साहिब की ओर से पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को औपचारिक नोटिस जारी किया गया है। इस नोटिस में मुख्यमंत्री को 15 जनवरी को सुबह 10 बजे अकाल तख्त सचिवालय में उपस्थित होकर अपना स्पष्टीकरण देने के आदेश दिए गए हैं।
यह नोटिस अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गडग़ज की ओर से जारी किया गया है। इसमें मुख्यमंत्री पर पंथ विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा देने, सिख मर्यादा को ठेस पहुंचाने और अकाल तख्त की सर्वोच्चता के प्रति असम्मानजनक रवैया अपनाने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
पत्र में लगाए गए आरोप और पंथक आपत्तियां
अकाल तख्त सचिवालय की ओर से मुख्यमंत्री के नाम भेजे गए पत्र में कहा गया है कि लंबे समय से चले आ रहे पंथक मामलों के संदर्भ में यह सामने आया है कि मुख्यमंत्री द्वारा जानबूझकर अकाल तख्त साहिब की सिख रहित मर्यादा और उसकी सर्वोच्च हैसियत को ठेस पहुंचाई गई है। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि गुरु की गोलक से संबंधित विषयों पर बार-बार अभद्र और आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं, जिससे सिख समुदाय की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।
पत्र के अनुसार, अकाल तख्त साहिब के समक्ष कुछ आपत्तिजनक वीडियो भी प्रस्तुत किए गए हैं। इन वीडियो में मुख्यमंत्री भगवंत मान को गुरु साहिबान और महान कौमी शहीद जरनैल सिंह भिंडरावाला की तस्वीरों के साथ आपत्तिजनक गतिविधियों में संलिप्त बताया गया है। अकाल तख्त का कहना है कि इस तरह की गतिविधियां न केवल सिख परंपरा और आस्था के विरुद्ध हैं, बल्कि एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा सत्ता के अहंकार को भी दर्शाती हैं।
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संवैधानिक पद और धार्मिक मर्यादा का सवाल
अकाल तख्त के सिंह साहिबानों द्वारा जारी आदेश का हवाला देते हुए पत्र में स्पष्ट किया गया है कि मुख्यमंत्री एक संवैधानिक पद पर आसीन हैं, इसलिए सिख परंपरा के अनुसार उन्हें अकाल तख्त की फसील के समक्ष पेश नहीं किया जा सकता। इसी कारण उन्हें सीधे अकाल तख्त सचिवालय में उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं। वहां उन्हें संबंधित वीडियो, बयानों और लगाए गए आरोपों पर अपना पक्ष और स्पष्टीकरण प्रस्तुत करना होगा।
धार्मिक मामलों के जानकारों का कहना है कि अकाल तख्त साहिब द्वारा किसी मुख्यमंत्री को इस तरह तलब किया जाना अत्यंत गंभीर और असाधारण कदम माना जाता है। यह कदम इस बात को रेखांकित करता है कि पंथक मर्यादा और धार्मिक संस्थाओं की सर्वोच्चता को लेकर सिख समाज में कितनी संवेदनशीलता है।
सियासी और सामाजिक हलकों में हलचल
इस नोटिस के बाद पंजाब की राजनीति और सिख समाज दोनों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। जहां एक ओर सिख संगठनों का कहना है कि अकाल तख्त ने पंथक मर्यादा की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाया है, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक हलकों में इसे राज्य की राजनीति पर दूरगामी प्रभाव डालने वाला घटनाक्रम माना जा रहा है।
अब सभी की नजरें 15 जनवरी पर टिकी हैं, जब मुख्यमंत्री भगवंत मान को अकाल तख्त सचिवालय में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखना है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि उनके स्पष्टीकरण के बाद अकाल तख्त साहिब क्या रुख अपनाता है और इसका पंजाब की राजनीति व सिख समाज पर क्या असर पड़ता है।
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