संविधान, लोकतंत्र, नारी शक्ति और समावेशी भारत की सशक्त तस्वीर प्रस्तुत की

नई दिल्ली, 25 जनवरी (हि.स.)। 77वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति Droupadi Murmu ने रविवार को राष्ट्र के नाम संदेश दिया। अपने संबोधन में उन्होंने देशवासियों को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हम, भारत के लोग, देश और विदेश में पूरे उत्साह और गर्व के साथ यह राष्ट्रीय पर्व मनाने जा रहे हैं। यह पावन अवसर हमें भारत के अतीत, वर्तमान और भविष्य की दिशा पर आत्मचिंतन का अवसर देता है। राष्ट्रपति ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम की शक्ति ने 15 अगस्त 1947 को भारत का भाग्य बदल दिया और हम अपने राष्ट्र के भविष्य के स्वयं निर्माता बने।

संविधान ने दी भारत को नई पहचान

राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि 26 जनवरी 1950 से भारत ने एक संप्रभु लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में अपने सफर की शुरुआत की। इसी दिन संविधान पूरी तरह लागू हुआ और भारत ने संविधानिक आदर्शों के मार्ग पर आगे बढ़ना शुरू किया। उन्होंने कहा कि भारत, जो लोकतंत्र की जन्मभूमि माना जाता है, औपनिवेशिक शासन से मुक्त होकर एक जीवंत लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में स्थापित हुआ। हमारा संविधान विश्व इतिहास के सबसे बड़े गणराज्य की आधारशिला है, जिसमें न्याय, स्वतंत्रता, समानता और भ्रातृत्व के आदर्श निहित हैं। संविधान निर्माताओं ने देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता की भावना को संवैधानिक प्रावधानों के माध्यम से मजबूत आधार प्रदान किया।

वंदे मातरम ने जोड़ा जनमानस

राष्ट्रपति ने अपने संदेश में वंदे मातरम की ऐतिहासिक और भावनात्मक भूमिका को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय महाकवि Subramania Bharati ने तमिल भाषा में ‘वंदे मातरम येन्बोम’ की रचना कर इस भावना को जन-जन तक पहुंचाया। अन्य भारतीय भाषाओं में इसके अनुवाद भी व्यापक रूप से लोकप्रिय हुए। उन्होंने बताया कि Sri Aurobindo ने वंदे मातरम का अंग्रेजी अनुवाद किया, जबकि ऋषितुल्य Bankim Chandra Chattopadhyay द्वारा रचित यह गीत राष्ट्र-वंदना का अमर स्वर बन गया। वंदे मातरम ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान जनमानस को एक सूत्र में बांधने का कार्य किया।

नेताजी से प्रेरणा लें युवा

राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि 23 जनवरी को देशवासियों ने Subhas Chandra Bose की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। वर्ष 2021 से नेताजी की जयंती को पराक्रम दिवस के रूप में मनाया जा रहा है, ताकि देशवासी, विशेषकर युवा, उनकी अदम्य देशभक्ति और साहस से प्रेरणा ले सकें। उन्होंने कहा कि नेताजी का नारा ‘जय हिंद’ आज भी हमारे राष्ट्र-गौरव और आत्मसम्मान का उद्घोष है।

देश को सशक्त बना रहे हर वर्ग के नागरिक

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत का गणतंत्र उसके नागरिकों से सशक्त होता है। हमारी तीनों सेनाओं के बहादुर जवान मातृभूमि की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहते हैं। कर्तव्यनिष्ठ पुलिसकर्मी और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल देश की आंतरिक सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। हमारे अन्नदाता किसान देशवासियों के लिए भोजन उत्पन्न करते हैं और देश की खाद्य सुरक्षा की रीढ़ हैं। उन्होंने कहा कि महिलाएं अनेक क्षेत्रों में नए प्रतिमान स्थापित कर रही हैं और राष्ट्र निर्माण में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं।

वैज्ञानिक, इंजीनियर और कर्मयोगी नागरिक

राष्ट्रपति ने डॉक्टरों, नर्सों और स्वास्थ्य कर्मियों की सेवाभावना की सराहना करते हुए कहा कि वे देशवासियों के स्वास्थ्य की रक्षा में दिन-रात जुटे रहते हैं। सफाई मित्रों की भूमिका को उन्होंने स्वच्छ भारत की आधारशिला बताया। शिक्षकों को भावी पीढ़ी का निर्माता बताते हुए राष्ट्रपति ने वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की प्रशंसा की, जो देश के विकास को नई दिशाएं दे रहे हैं। श्रमिकों, युवाओं, बच्चों, कलाकारों, शिल्पकारों और साहित्यकारों के योगदान को उन्होंने भारत की समृद्ध परंपरा और उज्ज्वल भविष्य का आधार बताया।

नारी शक्ति बन रही विकसित भारत की मजबूत नींव

महिलाओं और लड़कियों की भूमिका पर विशेष जोर देते हुए राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि बहनें और बेटियां परंपरागत रूढ़ियों को तोड़कर हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। दस करोड़ से अधिक स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं विकास की नई परिभाषा लिख रही हैं। महिलाएं खेतों से लेकर अंतरिक्ष तक, स्वरोजगार से लेकर सेनाओं तक अपनी प्रभावी पहचान बना रही हैं। खेल जगत में बेटियों की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि भारत की बेटियों ने महिला क्रिकेट विश्व कप, नेत्रहीन महिला टी20 विश्व कप और शतरंज विश्व कप जैसे आयोजनों में देश का नाम रोशन किया है। पंचायती राज संस्थाओं में लगभग 46 प्रतिशत महिला जनप्रतिनिधित्व इस बात का प्रमाण है कि भारत का लोकतंत्र समावेशी बन रहा है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम से महिलाओं के नेतृत्व द्वारा विकास को नई शक्ति मिलेगी।

वंचित वर्गों के कल्याण पर विशेष फोकस

राष्ट्रपति ने कहा कि समावेशी सोच के साथ वंचित वर्गों के कल्याण और विकास के लिए अनेक योजनाएं लागू की जा रही हैं। उन्होंने बताया कि 15 नवंबर को धरती आबा Birsa Munda की जयंती पर पांचवां जनजातीय गौरव दिवस मनाया गया और उनकी 150वीं जयंती के अवसर पर देशभर में कार्यक्रम आयोजित किए गए। आदि कर्मयोगी अभियान के माध्यम से जनजातीय समुदाय में नेतृत्व क्षमता विकसित करने का कार्य किया जा रहा है, जिससे समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास की रोशनी पहुंचे।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने संदेश के माध्यम से यह स्पष्ट किया कि भारत का गणतंत्र केवल एक शासन व्यवस्था नहीं, बल्कि साझा मूल्यों, समावेशी विकास और नागरिक कर्तव्यों का जीवंत उत्सव है, जो देश को विकसित भारत की ओर निरंतर आगे ले जा रहा है।

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