भारत-इजराइल रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती देने वाला दौरा, ड्रोन और एंटी बैलिस्टिक मिसाइल प्रणाली पर अहम बातचीत संभव
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नौ वर्ष बाद दो दिवसीय इजराइल दौरे पर रवाना हो गए हैं। वर्ष 2017 में ऐतिहासिक यात्रा के बाद यह उनका दूसरा इजराइल दौरा माना जा रहा है, जिसे भारत और इजराइल के बीच बढ़ते रणनीतिक, रक्षा और तकनीकी संबंधों के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस यात्रा पर पूरी दुनिया की नजर इसलिए भी टिकी हुई है क्योंकि दोनों देशों के बीच रक्षा क्षेत्र में बड़े समझौते होने की संभावना जताई जा रही है।
प्रधानमंत्री के तेल अवीव पहुंचने के बाद इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ उनकी विस्तृत द्विपक्षीय वार्ता निर्धारित है। दोनों नेताओं के बीच होने वाली यह निजी बैठक क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी सहयोग, रक्षा तकनीक और पश्चिम एशिया की बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों पर केंद्रित रहने की संभावना है।
इजराइल की संसद को संबोधित करेंगे प्रधानमंत्री मोदी
इस दौरे का सबसे ऐतिहासिक पहलू यह है कि प्रधानमंत्री मोदी इजराइल की संसद को संबोधित करेंगे। ऐसा करने वाले वे भारत के पहले प्रधानमंत्री बनेंगे। इस संबोधन को भारत-इजराइल संबंधों में नए अध्याय के रूप में देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि अपने भाषण में प्रधानमंत्री दोनों देशों के साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, सुरक्षा सहयोग और नवाचार आधारित साझेदारी को प्रमुखता देंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि संसद में दिया जाने वाला यह संबोधन केवल औपचारिक कार्यक्रम नहीं बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका और पश्चिम एशिया क्षेत्र में उसकी रणनीतिक उपस्थिति का संकेत भी होगा।
Honoured by the gesture. Looking forward to addressing the Knesset later today. @KnessetENGhttps://t.co/0PaG9Nutmy
— Narendra Modi (@narendramodi) February 25, 2026
रक्षा सहयोग और हथियार समझौतों पर चर्चा की संभावना
प्रधानमंत्री मोदी के इस दौरे का सबसे महत्वपूर्ण आयाम रक्षा क्षेत्र से जुड़ा माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार भारत और इजराइल के बीच अत्याधुनिक ड्रोन प्रणाली तथा एंटी बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा प्रणाली को लेकर बातचीत हो सकती है। भारत पहले से ही इजराइल के साथ रक्षा तकनीक और सुरक्षा उपकरणों के क्षेत्र में मजबूत सहयोग बनाए हुए है।
भारत अपनी सीमाओं की सुरक्षा और आधुनिक युद्ध प्रणाली को मजबूत करने के लिए उन्नत तकनीकों पर तेजी से काम कर रहा है। ऐसे में इजराइल की उन्नत रक्षा तकनीक भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। संभावित समझौते भविष्य में भारत की वायु रक्षा क्षमता को और मजबूत कर सकते हैं।
भारतीय समुदाय और तकनीकी सहयोग पर विशेष जोर
दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी इजराइल में बसे भारतीय समुदाय को भी संबोधित करेंगे। यह कार्यक्रम प्रवासी भारतीयों के साथ भारत के संबंधों को और सुदृढ़ करने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री एक प्रमुख तकनीकी प्रदर्शनी का भी दौरा करेंगे, जहां कृषि, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा और नवाचार से जुड़ी आधुनिक तकनीकों का प्रदर्शन किया जाएगा।
भारत और इजराइल के बीच कृषि तकनीक, जल प्रबंधन और स्टार्टअप सहयोग पहले से ही मजबूत रहा है। इस यात्रा के दौरान इन क्षेत्रों में नए सहयोग कार्यक्रमों की घोषणा की संभावना भी जताई जा रही है।
नेतन्याहू ने जताया विशेष उत्साह
प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा से पहले इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि वे अपने प्रिय मित्र के इजराइल आगमन का इंतजार कर रहे हैं। नेतन्याहू का यह बयान दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत और राजनीतिक विश्वास को दर्शाता है, जिसने पिछले वर्षों में भारत-इजराइल संबंधों को नई ऊंचाई दी है।
विश्लेषकों के अनुसार दोनों देशों के नेतृत्व के बीच मजबूत तालमेल ने रक्षा, व्यापार, कृषि और तकनीकी क्षेत्रों में सहयोग को तेजी से आगे बढ़ाया है।
वैश्विक परिदृश्य में दौरे का महत्व
प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब पश्चिम एशिया क्षेत्र लगातार सुरक्षा चुनौतियों और भू-राजनीतिक बदलावों से गुजर रहा है। ऐसे में भारत का इजराइल के साथ रणनीतिक सहयोग न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करेगा बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन में भारत की भूमिका को भी अधिक प्रभावशाली बना सकता है।
भारत लंबे समय से संतुलित विदेश नीति अपनाते हुए पश्चिम एशिया के विभिन्न देशों के साथ संबंध बनाए रखता आया है। इस यात्रा को उसी संतुलन और रणनीतिक विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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