अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा: हस्तक्षेप नहीं करता तो पाकिस्तान के साढ़े तीन करोड़ लोगों की जान जा सकती थी, भारत ने फिर दोहराया द्विपक्षीय समाधान का रुख

वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल के पहले स्टेट ऑफ यूनियन संबोधन में भारत और पाकिस्तान के बीच वर्ष 2025 में पैदा हुए सैन्य तनाव को लेकर ऐसा बयान दिया है, जिसने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। ट्रंप ने अपने संबोधन के दौरान दावा किया कि यदि उन्होंने समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया होता तो भारत और पाकिस्तान के बीच स्थिति परमाणु युद्ध तक पहुंच सकती थी और पाकिस्तान में साढ़े तीन करोड़ लोगों की जान खतरे में पड़ जाती।

ट्रंप के इस बयान को वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती सैन्य शक्ति और रणनीतिक प्रभाव के संदर्भ में देखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने स्वयं उनसे बातचीत के दौरान यह आशंका जताई थी कि हालात अत्यंत गंभीर हो चुके थे और बड़े स्तर पर जनहानि हो सकती थी। अमेरिकी राष्ट्रपति के अनुसार उस समय क्षेत्रीय तनाव इतना अधिक बढ़ चुका था कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी चिंतित हो गया था।

भारत-पाकिस्तान तनाव और युद्ध की आशंका का दावा

करीब सौ मिनट से अधिक समय तक चले अपने संबोधन में ट्रंप ने कहा कि उनके कार्यकाल के शुरुआती महीनों में दुनिया के कई संभावित युद्धों को रोका गया। उन्होंने विशेष रूप से भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच टकराव ऐसे मोड़ पर पहुंच गया था जहां परमाणु संघर्ष की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता था।

ट्रंप के अनुसार वाशिंगटन की सक्रिय कूटनीतिक पहल के बाद दोनों देशों ने युद्धविराम का रास्ता अपनाया। हालांकि इस दावे को लेकर भारत का रुख पहले की तरह स्पष्ट बना हुआ है। भारत लगातार यह कहता आया है कि किसी भी तीसरे देश की मध्यस्थता स्वीकार नहीं की गई और सभी निर्णय दोनों देशों के बीच सीधे संवाद के माध्यम से लिए गए।

भारत ने खारिज किया तीसरे पक्ष की भूमिका का दावा

अमेरिकी राष्ट्रपति के दावों के विपरीत भारत सरकार पहले भी कई बार स्पष्ट कर चुकी है कि भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम का निर्णय सैन्य स्तर पर आपसी बातचीत के बाद लिया गया था। विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक रूप से कहा था कि किसी बाहरी देश की मध्यस्थता नहीं हुई और यह पूरी प्रक्रिया द्विपक्षीय ढंग से संपन्न हुई।

भारत की नीति लंबे समय से यही रही है कि पाकिस्तान से जुड़े सभी मुद्दे केवल द्विपक्षीय वार्ता के माध्यम से ही सुलझाए जाएंगे। यही कारण है कि ट्रंप के ताजा बयान के बाद भी भारतीय पक्ष ने अपने पूर्व रुख में कोई बदलाव नहीं दिखाया है।

ऑपरेशन सिंदूर: भारत की सैन्य कार्रवाई ने बदले समीकरण

भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव की पृष्ठभूमि में मई 2025 में शुरू किया गया ऑपरेशन सिंदूर महत्वपूर्ण माना जाता है। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम क्षेत्र में हुए आतंकी हमले में 26 नागरिकों की हत्या के बाद भारत ने कड़ा सैन्य जवाब देने का निर्णय लिया था।

7 मई 2025 से शुरू हुए इस संयुक्त सैन्य अभियान में भारतीय थलसेना, वायुसेना और नौसेना ने समन्वित कार्रवाई करते हुए पाकिस्तान स्थित आतंकी ढांचों और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया। यह अभियान 10 मई तक चला और भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने दावा किया कि बड़ी संख्या में आतंकी संरचनाएं नष्ट कर दी गईं।

भारत ने इस कार्रवाई को आत्मरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ आवश्यक कदम बताया था। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कई देशों ने आतंकवाद के विरुद्ध भारत के अधिकार को स्वीकार किया था। विश्लेषकों के अनुसार ऑपरेशन सिंदूर के बाद क्षेत्रीय शक्ति संतुलन में भारत की सैन्य क्षमता का स्पष्ट संदेश गया।

ट्रंप का बार-बार युद्ध रोकने का दावा

डोनाल्ड ट्रंप इससे पहले भी कई सार्वजनिक मंचों पर भारत-पाकिस्तान संघर्ष को रोकने का श्रेय लेते रहे हैं। पिछले वर्ष मई के बाद से वह अस्सी से अधिक बार यह दावा दोहरा चुके हैं कि उनकी पहल के कारण संभावित युद्ध टल गया।

उन्होंने अपने संबोधन में यह भी कहा कि भारत-पाकिस्तान के अलावा इस्राइल-ईरान, आर्मेनिया-अजरबैजान, कांगो-रवांडा तथा कंबोडिया-थाईलैंड जैसे क्षेत्रों में भी अमेरिका की कूटनीतिक कोशिशों से संघर्ष कम हुआ। ट्रंप ने अपने सहयोगियों स्टीव विटकॉफ, जेरेड कुशनर और विदेश मंत्री मार्को रुबियो की भी सराहना करते हुए उन्हें शांति प्रयासों का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।

हालांकि अंतरराष्ट्रीय राजनीति के जानकार यह भी मानते हैं कि ट्रंप कई बार अपने बयानों में बदलाव करते रहे हैं और उनके दावों को लेकर पहले भी विवाद खड़े होते रहे हैं।

वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती रणनीतिक स्थिति

ट्रंप के बयान ने एक बार फिर यह संकेत दिया है कि दक्षिण एशिया में शक्ति संतुलन तेजी से बदल रहा है और भारत की सैन्य तथा कूटनीतिक क्षमता वैश्विक चर्चाओं का केंद्र बनती जा रही है। ऑपरेशन सिंदूर जैसी कार्रवाई ने यह संदेश दिया कि भारत आतंकवाद के मुद्दे पर निर्णायक कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की मजबूत सैन्य प्रतिक्रिया और अंतरराष्ट्रीय समर्थन ने पाकिस्तान पर दबाव बढ़ाया, जिसके कारण उसे वैश्विक स्तर पर समर्थन तलाशना पड़ा। यही संदर्भ ट्रंप के बयान को अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक विमर्श में महत्वपूर्ण बना रहा है।

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