गैस रिसाव के बाद इरुसुमंडा ब्लोआउट में लगी आग से दहशत, तीन गांव खाली, दिल्ली से विशेषज्ञ टीम तैनात
अमलापुरम, 06 जनवरी (हि.स.)। आंध्र प्रदेश के बीआर अंबेडकर कोनासीमा जिले में स्थित इरुसुमंडा गांव के पास ओएनजीसी के एक तेल कुएं में हुए जबरदस्त गैस रिसाव के बाद लगी भीषण आग पर अब तक काबू नहीं पाया जा सका है। लगातार कई घंटों से जल रही आग को बुझाने के लिए ओएनजीसी, फायर ब्रिगेड और विशेषज्ञों की टीमें युद्धस्तर पर प्रयास कर रही हैं, लेकिन हालात अब भी चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। प्रशासन और तकनीकी एजेंसियां पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
घटना अमलापुरम क्षेत्र के राजोल मंडल अंतर्गत इरुसुमंडा गांव में उस समय हुई, जब कुएं पर हवा के दबाव से जुड़े उपकरणों की मरम्मत का काम चल रहा था। इसी दौरान अचानक तेज गैस रिसाव हुआ और देखते ही देखते भीषण धमाके के साथ आग भड़क उठी। आग की लपटें सैकड़ों फीट ऊंचाई तक उठती दिखाई दीं, जिससे पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया। दूर-दूर तक धुएं का गुबार फैल गया और ग्रामीणों में भय व्याप्त हो गया।
आग बुझाने के लिए व्यापक प्रयास, कूलेंट फ्लूइड पर विचार
ओएनजीसी के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, आग की तीव्रता में बीते दिन की तुलना में कुछ कमी जरूर आई है, लेकिन अब भी स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में नहीं है। मौके पर मौजूद तकनीकी दल आग बुझाने के लिए हर संभव विकल्प पर काम कर रहे हैं। गोदावरी नदी से जुड़ी गुडावल्ली सिंचाई नहर से पाइपलाइन के माध्यम से पानी मोड़कर आग पर काबू पाने का प्रयास किया जा रहा है। इसके साथ ही राजामहेंद्रवरम और नरसापुरम से ओएनजीसी की विशेष टीमें कुएं के भीतर दबाव कम करने की कोशिशों में लगी हुई हैं।
इस बीच दिल्ली से विशेषज्ञों की एक उच्चस्तरीय टीम घटनास्थल पर पहुंच चुकी है। यह टीम आग पर नियंत्रण के लिए कूलेंट फ्लूइड के इस्तेमाल की रणनीति पर गंभीरता से विचार कर रही है। ओएनजीसी अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल कुएं को पूरी तरह बंद करने की स्थिति नहीं है, क्योंकि अत्यधिक दबाव के चलते ऐसा करना जोखिम भरा हो सकता है। आग पर काबू पाने और दबाव सामान्य होने के बाद ही कुएं को सील करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
तीन गांव खाली, प्रशासन अलर्ट मोड पर
आग की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने एहतियातन आसपास के तीन गांवों को खाली करा लिया है। लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है और इलाके में बिजली आपूर्ति बंद कर दी गई है। साथ ही नागरिकों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे घरों में गैस चूल्हे, माचिस या किसी भी प्रकार की आग का इस्तेमाल न करें। पुलिस और प्रशासनिक टीमें लगातार गश्त कर रही हैं ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके।
हताहत नहीं, लेकिन खतरा बरकरार
खबर लिखे जाने तक किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है, जो राहत की बात मानी जा रही है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह इलाका कृष्णा–गोदावरी बेसिन का हिस्सा है, जहां गैस का दबाव स्वाभाविक रूप से काफी अधिक रहता है। ऐसे में जब तक गैस पूरी तरह जल नहीं जाती या कुएं का दबाव नियंत्रित नहीं हो जाता, तब तक स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं मानी जा सकती। इसी कारण कई विशेषज्ञ टीमें मौके पर डेरा डाले हुए हैं और चौबीसों घंटे निगरानी की जा रही है।
जांच के बाद तय होगी जिम्मेदारी
ओएनजीसी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि आग पर पूरी तरह काबू पाने के बाद ही इस घटना की विस्तृत जांच की जाएगी। जांच के माध्यम से यह पता लगाया जाएगा कि गैस रिसाव और आग लगने की वास्तविक वजह क्या थी और इसमें किसी स्तर पर लापरवाही तो नहीं हुई। इसके आधार पर आगे की जिम्मेदारी तय की जाएगी।
फिलहाल प्रशासन, ओएनजीसी और आपदा प्रबंधन एजेंसियों की प्राथमिकता आग पर जल्द से जल्द काबू पाना और आसपास के लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। पूरे क्षेत्र में हाई अलर्ट जारी है और हालात पर पल-पल की निगरानी की जा रही है।
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