आरडीएसओ ने शुरू किए अंतिम परीक्षण, जींद–सोनीपत रूट पर जल्द दौड़ेगी हरित ट्रेन
जींद, 06 जनवरी (हि.स.)। भारतीय रेलवे के इतिहास में एक नई और पर्यावरण के अनुकूल शुरुआत होने जा रही है। देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन पूरी तरह बनकर तैयार हो चुकी है और इसे पटरी पर उतारने से पहले अंतिम तकनीकी परीक्षण शुरू कर दिए गए हैं। रेलवे के अभिकल्प, विकास एवं मानक संगठन आरडीएसओ की विशेषज्ञ तकनीकी टीम इस अत्याधुनिक ट्रेन के हर पहलू की गहन जांच कर रही है, ताकि संचालन के दौरान सुरक्षा और मानकों से कोई समझौता न हो।
तकनीकी मानकों पर कड़ी निगरानी, हर सिस्टम की गहन जांच
लखनऊ स्थित आरडीएसओ के वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी फिलहाल ट्रेन संचालन से जुड़े सभी महत्वपूर्ण बिंदुओं पर काम कर रहे हैं। परीक्षण के दौरान टीम का विशेष फोकस ट्रेन की पावर कार और उससे जुड़े सुरक्षा एवं नियंत्रण उपकरणों पर रहा। स्पीड सेंसर, कंट्रोल सिस्टम और स्वचालित सुरक्षा तंत्र को अलग-अलग गति पर परखा गया। ट्रेन को धीमी और मध्यम रफ्तार पर चलाकर उपकरणों की कार्यक्षमता का विस्तृत रिकॉर्ड तैयार किया गया, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि सभी सिस्टम निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप सुचारु रूप से कार्य कर रहे हैं।
यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता
टेस्टिंग के दौरान केवल तकनीकी उपकरणों ही नहीं, बल्कि यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा से जुड़े पहलुओं की भी जांच की गई। ट्रेन के पायदानों की ऊंचाई, मजबूती और संरचनात्मक संतुलन को बारीकी से परखा गया। अधिकारियों का कहना है कि हाइड्रोजन जैसे संवेदनशील ईंधन पर आधारित इस ट्रेन में सुरक्षा मानकों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है और हर स्तर पर बहु-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है।
जींद–सोनीपत रूट पर संचालन की तैयारी पूरी
उत्तर रेलवे के अधिकारियों के अनुसार हरियाणा में जींद और सोनीपत के बीच इस हाइड्रोजन ट्रेन को चलाने की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। यह रूट पायलट परियोजना के रूप में चुना गया है, जहां इस ट्रेन के संचालन से जुड़े अनुभवों के आधार पर भविष्य में अन्य रूटों पर भी हाइड्रोजन ट्रेनों को उतारने की योजना है। रेलवे का मानना है कि यह परियोजना डीजल ट्रेनों पर निर्भरता कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगी।
हरियाणा के जींद में चलेगी भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन pic.twitter.com/Sxa9vFw9Zj
— Haryana BJP (@BJP4Haryana) January 6, 2026
हाइड्रोजन प्लांट को मिली निर्बाध बिजली आपूर्ति
इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए जींद में स्थापित हाइड्रोजन प्लांट को अंतिम कमीशनिंग के चरण में लाया जा चुका है। ट्रेन को ईंधन आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए प्लांट को नियमित और निर्बाध 11 केवी बिजली आपूर्ति दी जा रही है। यह व्यवस्था इसलिए भी अहम है क्योंकि हाइड्रोजन उत्पादन और भंडारण की प्रक्रिया पूरी तरह विद्युत आपूर्ति पर निर्भर करती है।
राज्य सरकार की सक्रिय निगरानी
इस परियोजना की प्रगति को लेकर राज्य के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम के अधिकारियों के साथ हाइब्रिड मोड में एक उच्चस्तरीय बैठक की। बैठक में हाइड्रोजन प्लांट की वर्तमान विद्युत आपूर्ति स्थिति, बैकअप व्यवस्थाओं और भविष्य की जरूरतों पर विस्तार से चर्चा हुई। मुख्य सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिए कि इस राष्ट्रीय महत्व की परियोजना में किसी भी प्रकार की बाधा नहीं आनी चाहिए। इसके लिए बिजली आपूर्ति प्रणाली की नियमित समीक्षा, वैकल्पिक व्यवस्था और त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र को मजबूत रखने पर जोर दिया गया।
देश का सबसे बड़ा हाइड्रोजन भंडारण प्लांट
बैठक में अधिकारियों ने जानकारी दी कि इस हाइड्रोजन ट्रेन परियोजना के लिए जींद में तीन हजार किलोग्राम भंडारण क्षमता वाला देश का सबसे बड़ा हाइड्रोजन प्लांट स्थापित किया गया है। यह प्लांट अब कमीशनिंग के अंतिम चरण में है और 24 घंटे के आधार पर संचालित होगा। रेलवे और ऊर्जा विभाग के विशेषज्ञों के अनुसार यह प्लांट न केवल इस ट्रेन की जरूरतों को पूरा करेगा, बल्कि भविष्य में अन्य हाइड्रोजन आधारित परियोजनाओं के लिए भी एक मॉडल के रूप में काम करेगा।
हरित रेल परिवहन की दिशा में बड़ा कदम
हाइड्रोजन ट्रेन को भारतीय रेलवे के हरित और टिकाऊ परिवहन मिशन का अहम हिस्सा माना जा रहा है। इससे न केवल कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि सफल परीक्षण और संचालन के बाद यह तकनीक देशभर में रेलवे के स्वरूप को बदलने की क्षमता रखती है।
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