मंत्रि-परिषद की बैठक में ग्रामीण सड़क, पीएम जनमन और नर्मदा बेसिन परियोजनाओं पर बड़े फैसले

भोपाल। मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय में आयोजित मंत्रि-परिषद की बैठक में प्रदेश के कृषि, सिंचाई और ग्रामीण अधोसंरचना को मजबूत करने से जुड़े कई अहम निर्णय लिए गए। बैठक में बुरहानपुर जिले की दो प्रमुख सिंचाई परियोजनाओं के लिए कुल 2,598 करोड़ रुपए से अधिक की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई। इसके साथ ही प्रधानमंत्री जनमन योजना, प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना और ग्रामीण सड़कों के नवीनीकरण एवं उन्नयन के लिए हजारों करोड़ रुपए की मंजूरी दी गई।

बुरहानपुर में सिंचाई क्षमता बढ़ाने पर बड़ा निवेश

मंत्रि-परिषद ने बुरहानपुर जिले की खकनार तहसील में झिरमिटी मध्यम सिंचाई परियोजना को 922 करोड़ 91 लाख रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति दी। इस परियोजना के पूर्ण होने पर खकनार तहसील के 42 ग्रामों की लगभग 17 हजार 700 हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। इससे करीब 11 हजार 800 कृषक परिवारों को प्रत्यक्ष लाभ मिलने की उम्मीद है। परियोजना से क्षेत्र में फसल उत्पादकता बढ़ने के साथ-साथ किसानों की आय में भी स्थायी वृद्धि होने की संभावना जताई जा रही है।

इसके अलावा मंत्रि-परिषद ने बुरहानपुर जिले की नेपानगर तहसील की नावथा वृहद सिंचाई परियोजना को 1,676 करोड़ 6 लाख रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की। इस परियोजना के माध्यम से खकनार तहसील के 90 ग्रामों की लगभग 34 हजार 100 हेक्टेयर भूमि में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इससे अनुमानित रूप से 22 हजार 600 कृषक परिवार लाभांवित होंगे। दोनों परियोजनाओं को मिलाकर बुरहानपुर जिले में सिंचाई नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में इसे एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।

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पीएम जनमन योजना को 2028 तक निरंतरता

बैठक में मध्यप्रदेश ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण की प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान, यानी पीएम जनमन योजना को 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2028 तक निरंतर रखने की स्वीकृति दी गई। इस योजना पर अनुमानित 795 करोड़ 45 लाख रुपए खर्च किए जाएंगे। इसके अंतर्गत 1,039 किलोमीटर सड़कों का निर्माण और 112 पुलों का निर्माण प्रस्तावित है। यह योजना प्रदेश के 22 जिलों में निवास करने वाली विशेष जनजातियों बैगा, भारिया और सहरिया के लिए लागू है, जिससे दूरस्थ और वंचित इलाकों को मुख्यधारा से जोड़ने में मदद मिलेगी।

प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के लिए 17,196 करोड़ की मंजूरी

मंत्रि-परिषद ने प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना को भी 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक निरंतर रखने का निर्णय लिया। इस योजना के तहत अनुमानित 17,196 करोड़ 21 लाख रुपए व्यय किए जाएंगे। इसके माध्यम से प्रदेश में लगभग 20 हजार किलोमीटर ग्रामीण सड़कों और 1,200 पुलों का निर्माण किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन सुगम होगा, बाजारों तक पहुंच आसान बनेगी और आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी।

ग्रामीण सड़कों के नवीनीकरण और उन्नयन पर जोर

बैठक में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के अंतर्गत पहले से निर्मित सड़कों के नवीनीकरण और उन्नयन के लिए भी बड़ा फैसला लिया गया। मंत्रि-परिषद ने 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक इस योजना को निरंतर रखने की स्वीकृति दी, जिसके लिए 10 हजार 196 करोड़ 42 लाख रुपए का अनुमानित व्यय तय किया गया है। इसके तहत प्रदेश के 88 हजार 517 किलोमीटर ग्रामीण मार्गों का नवीनीकरण और उन्नयन किया जाएगा, जिससे सड़क सुरक्षा और परिवहन गुणवत्ता में सुधार होगा।

नर्मदा बेसिन प्रोजेक्ट्स के माध्यम से सिंचाई परियोजनाओं का वित्तपोषण

मंत्रि-परिषद ने नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के अंतर्गत आने वाली सिंचाई परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने के लिए नर्मदा बेसिन प्रोजेक्ट्स कंपनी लिमिटेड के माध्यम से वित्तपोषण की स्वीकृति भी दी। निर्णय के अनुसार जिन परियोजनाओं का निर्माण कार्य कंपनी द्वारा वित्तीय व्यवस्था के जरिए पूरा कराया जाएगा, उनका संपूर्ण स्वामित्व कंपनी के पास रहेगा। राज्य शासन द्वारा बजट के माध्यम से किए गए व्यय के समतुल्य अंश पूंजी कंपनी द्वारा राज्य शासन को जारी की जाएगी। परियोजनाओं के पूर्ण होने के बाद प्राप्त राजस्व कंपनी की आय के रूप में लिया जाएगा।

वर्तमान में कंपनी द्वारा दो प्रमुख परियोजनाएं वित्तपोषित की जा रही हैं, जिनमें नर्मदा क्षिप्रा बहुउद्देशीय परियोजना, जिसकी लागत 2,489 करोड़ 65 लाख रुपए है, और बदनावर माइक्रो लिफ्ट इरिगेशन परियोजना, जिसकी लागत 1,520 करोड़ 92 लाख रुपए है, शामिल हैं। इन परियोजनाओं से प्रदेश में जल प्रबंधन और सिंचाई क्षमता को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।

ई-कैबिनेट की दिशा में कदम

बैठक के दौरान मंत्रि-परिषद के सदस्यों और उनके भारसाधक सचिवों को ई-कैबिनेट प्रणाली के लिए टैबलेट वितरित किए गए और उन्हें आवश्यक प्रशिक्षण भी दिया गया। सरकार का उद्देश्य निर्णय प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, तेज और डिजिटल बनाना है।

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