वित्तीय सेवाओं, निवेश और नवाचार में सहयोग बढ़ाने पर हुई व्यापक चर्चा

लक्जमबर्ग सिटी, 06 जनवरी (हि.स.)। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने लक्जमबर्ग की आधिकारिक यात्रा के दौरान मंगलवार को देश के प्रधानमंत्री ल्यूक फ्रीडेन से मुलाकात की। इस अवसर पर जयशंकर ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ओर से उन्हें शुभकामनाएं और सद्भावना संदेश सौंपा। यह मुलाकात भारत और लक्जमबर्ग के बीच द्विपक्षीय संबंधों को नई गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी पर जोर

बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने वित्तीय सेवाओं, निवेश, प्रोद्योगिकी और नवाचार जैसे अहम क्षेत्रों में बढ़ते सहयोग की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की। विदेश मंत्री ने कहा कि लक्जमबर्ग यूरोप का एक प्रमुख वित्तीय केंद्र है और भारत के लिए यह निवेश, बैंकिंग, फिनटेक तथा हरित वित्त के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण साझेदार बनकर उभरा है। उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि भारत में तेज़ी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था और स्टार्टअप संस्कृति, लक्जमबर्ग के निवेशकों के लिए नए अवसर खोल रही है।

भारत–यूरोपीय संघ संबंधों में लक्जमबर्ग की भूमिका

जयशंकर ने प्रधानमंत्री फ्रीडेन को भारत–यूरोपीय संघ संबंधों को मजबूत करने में उनके निरंतर समर्थन के लिए धन्यवाद दिया। बातचीत में इस बात पर सहमति बनी कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार, प्रौद्योगिकी सहयोग और वैश्विक चुनौतियों पर समन्वय को और गहरा किया जाना चाहिए। लक्जमबर्ग, यूरोपीय संघ के एक प्रभावशाली सदस्य के रूप में, भारत के साथ रणनीतिक संवाद को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकता है।

वैश्विक मुद्दों पर साझा दृष्टिकोण

मुलाकात के दौरान अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, जलवायु परिवर्तन और सतत विकास जैसे विषयों पर भी विचार-विमर्श हुआ। दोनों पक्षों ने बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग बढ़ाने और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई। जयशंकर ने कहा कि भारत और लक्जमबर्ग लोकतांत्रिक मूल्यों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग में विश्वास साझा करते हैं।

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यूरोप यात्रा का अहम पड़ाव

उल्लेखनीय है कि विदेश मंत्री जयशंकर 4 से 10 जनवरी तक फ्रांस और लक्जमबर्ग की आधिकारिक यात्रा पर हैं। इस दौरे का उद्देश्य यूरोप के प्रमुख देशों के साथ राजनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को और सुदृढ़ करना है। लक्जमबर्ग यात्रा के दौरान उनकी अन्य वरिष्ठ नेताओं और उद्योग प्रतिनिधियों से भी मुलाकातें प्रस्तावित हैं, जिनसे भारत–यूरोप साझेदारी को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

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