जम्मू-कश्मीर ऑपरेशन थिएटर के जवानों को सर्वाधिक वीरता पदक, 982 कर्मियों को उत्कृष्ट सेवा सम्मान
नई दिल्ली, 25 जनवरी (हि.स.)। 77वें गणतंत्र दिवस से एक दिन पहले रविवार को केंद्र सरकार ने गैलेंट्री अवॉर्ड्स और सर्विस मेडल्स की घोषणा कर देश की सुरक्षा और सेवा में समर्पित कर्मियों को सम्मानित करने का बड़ा निर्णय लिया। इस वर्ष भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन, टेस्ट पायलट और अंतरिक्ष यात्री Shubhanshu Shukla को देश के सर्वोच्च शांति कालीन वीरता सम्मान अशोक चक्र से सम्मानित किए जाने की घोषणा की गई है। इसके साथ ही तीन अधिकारियों को कीर्ति चक्र और 13 अधिकारियों को शौर्य चक्र प्रदान किया जाएगा।
गणतंत्र दिवस, 2026 के अवसर पर पुलिस, अग्निशमन, होमगार्ड एवं सिविल डिफेंस (एचजीएंडसीडी) तथा करेक्शनल सर्विसेज (सुधारात्मक सेवा)के कुल 982 कर्मियों को वीरता और सेवा पदकों से सम्मानित किया गया है। इसका ब्यौरा इस प्रकार है👇
— पीआईबी हिंदी (@PIBHindi) January 25, 2026
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982 कर्मियों को उत्कृष्ट सेवा के लिए सम्मान
इस वर्ष पुलिस, फायर ब्रिगेड, होम गार्ड, सिविल डिफेंस और करेक्शनल सर्विस से जुड़े कुल 982 कर्मियों को उत्कृष्ट सेवा के लिए सम्मानित किया जाएगा। इनमें 125 वीरता पदक शामिल हैं, जो असाधारण साहस, कर्तव्य के दौरान जान जोखिम में डालकर किए गए कार्यों और नागरिकों की सुरक्षा में अद्वितीय योगदान के लिए प्रदान किए जाते हैं। यह सम्मान उन कर्मियों को दिया गया है जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए देश और समाज की रक्षा की।
जम्मू-कश्मीर ऑपरेशन थिएटर को सर्वाधिक वीरता पदक
वीरता पदकों में सबसे अधिक सम्मान जम्मू और कश्मीर ऑपरेशन थिएटर में तैनात कर्मियों को मिला है। यहां से 45 वीरता पदक दिए गए हैं। ऑपरेशन थिएटर से आशय उन क्षेत्रों से है, जहां लंबे समय से आतंकवाद, घुसपैठ और कानून-व्यवस्था से जुड़े गंभीर अभियान संचालित होते रहे हैं। इसके अलावा नक्सल हिंसा से प्रभावित क्षेत्रों में तैनात 35 कर्मियों और पूर्वोत्तर भारत में कार्यरत 5 कर्मियों को भी वीरता पदकों से सम्मानित किया गया है। फायर ब्रिगेड सेवा के चार बहादुर बचावकर्मियों को भी उनके साहसिक कार्यों के लिए वीरता पदक दिए जाएंगे।
पदकों की श्रेणी और सेवा का व्यापक सम्मान
इस वर्ष कुल 101 राष्ट्रपति सेवा पदक प्रदान किए जाएंगे, जो सेवा में विशिष्ट और उत्कृष्ट रिकॉर्ड के लिए दिए जाते हैं। इनमें अधिकांश पुलिस कर्मी हैं, जबकि फायर ब्रिगेड, सिविल डिफेंस, होम गार्ड और करेक्शनल सर्विस से जुड़े कर्मियों को भी यह सम्मान मिला है। इसके अलावा 756 मेधावी सेवा पदक घोषित किए गए हैं, जो लंबे समय तक कर्तव्यनिष्ठा, संसाधनों के कुशल उपयोग और ईमानदार सेवा के लिए प्रदान किए जाते हैं। इन पदकों में भी पुलिस बल की संख्या सर्वाधिक है, लेकिन अन्य सेवाओं के कर्मियों को भी इसमें शामिल किया गया है।
सीएपीएफ और जांच एजेंसियों का योगदान
केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में सीआरपीएफ एकमात्र ऐसा बल रहा, जिसे 12 वीरता पदकों के साथ सम्मानित किया गया है। वहीं केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो के 31 अधिकारियों को राष्ट्रपति सेवा पदक और मेधावी सेवा पदक प्रदान किए गए हैं। इनमें वरिष्ठ अधिकारी वी चंद्रशेखर भी शामिल हैं, जिन्होंने कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर के साथ हुए रेप और हत्या के मामले की जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनके नेतृत्व में की गई जांच को देशभर में सराहा गया।
राज्यों की पुलिस को मिला विशेष सम्मान
राज्य पुलिस बलों में जम्मू-कश्मीर पुलिस को सर्वाधिक 33 वीरता पदक प्राप्त हुए हैं। इसके बाद महाराष्ट्र पुलिस को 31, उत्तर प्रदेश पुलिस को 18 और दिल्ली पुलिस को 14 वीरता पदक मिले हैं। यह सम्मान उन पुलिसकर्मियों के साहस, बलिदान और जोखिम भरे अभियानों में योगदान को दर्शाता है, जिन्होंने नागरिकों की सुरक्षा के लिए अपने प्राणों की परवाह नहीं की।
वीरता और सेवा पदकों का महत्व
वीरता पदक उन दुर्लभ और असाधारण कार्यों के लिए दिया जाता है, जिनमें किसी व्यक्ति ने गंभीर खतरे के बीच जीवन और संपत्ति की रक्षा की हो, अपराध को रोका हो या अपराधियों को पकड़ने में असाधारण साहस दिखाया हो। राष्ट्रपति सेवा पदक सेवा में विशिष्ट और अनुकरणीय रिकॉर्ड के लिए प्रदान किया जाता है, जबकि मेधावी सेवा पदक लंबे समय तक ईमानदारी, निष्ठा और मूल्यवान योगदान के लिए दिया जाता है।
अशोक चक्र विजेता शुभांशु शुक्ला का प्रेरक सफर
अशोक चक्र से सम्मानित किए जा रहे शुभांशु शुक्ला भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन होने के साथ-साथ एक प्रतिष्ठित टेस्ट पायलट और Indian Space Research Organisation के अंतरिक्ष यात्री हैं। उन्होंने 25 जून 2025 को नासा के एक्सियम मिशन के तहत International Space Station की यात्रा की थी, जहां वे 18 दिनों तक रहे। वह 1984 में राकेश शर्मा के बाद अंतरिक्ष में जाने वाले दूसरे भारतीय बने और भारत के पहले ऐसे अंतरिक्ष यात्री हैं जिन्होंने आईएसएस की यात्रा की। वे गगनयान मिशन का भी हिस्सा हैं, जिससे भारत की मानव अंतरिक्ष उड़ान क्षमताओं को नई मजबूती मिली है।
लखनऊ से अंतरिक्ष तक की यात्रा
शुभांशु शुक्ला मूल रूप से उत्तर प्रदेश के लखनऊ के रहने वाले हैं। उनकी प्रारंभिक शिक्षा अलीगंज, लखनऊ स्थित सिटी मॉन्टेसरी स्कूल में हुई। बारहवीं के बाद उन्होंने National Defence Academy की प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण की और यहीं से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद भारतीय वायुसेना में कमीशन लेकर उन्होंने अपनी प्रतिभा, अनुशासन और साहस के बल पर न केवल सैन्य क्षेत्र में बल्कि अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में भी देश का नाम रोशन किया।
केंद्र सरकार द्वारा घोषित ये सम्मान न केवल वीरता और कर्तव्यनिष्ठा का प्रतीक हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा भी हैं कि राष्ट्र सेवा सर्वोच्च सम्मान का मार्ग है।
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