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वर्ष 2026 का केंद्रीय बजट भले ही आर्थिक दस्तावेज हो, लेकिन उसका 1 घंटा 24 मिनट का संक्षिप्त भाषण दरअसल एक गहरा राजनीतिक संकेत है। यह केवल समय की बचत नहीं, बल्कि उस रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत सरकार बजट को सत्ता-प्रदर्शन के मंच से हटाकर प्रशासनिक औजार में बदलना चाहती है। यह संयोग नहीं है कि पिछले नौ वर्षों में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बजट भाषण लगातार छोटे होते गए हैं। 2019–20 में ढाई घंटे से अधिक लंबे भाषणों से लेकर आज के अपेक्षाकृत संक्षिप्त वक्तव्य तक का सफर यह बताता है कि सरकार अब ‘बजट से चौंकाने’ की राजनीति से दूरी बना रही है। आर्थिक विकास की गति हासिल करने के लिए प्रक्रियाओं का सरलीकरण बहुत जरूरी है और वही इस बजट का फोकस है।
सरकार यह तर्क देती है कि अब बड़े आर्थिक फैसले साल भर लिए जाते हैं जैसे जीएसटी में बदलाव, टैक्स सुधार, उद्योग नीति, डिजिटल अर्थव्यवस्था से जुड़े निर्णय बजट के बाहर घोषित होते हैं। ऊपर से देखने पर यह परिपक्व शासन का संकेत लगता है, लेकिन इसके भीतर एक राजनीतिक सोच भी छिपी है। जब फैसले पूरे साल बजट के बाहर भी लिए जाते हैं तो औपचारिक राजनीतिक बहस का दायरा सिमटता है, विपक्ष की भूमिका प्रतिक्रियात्मक हो जाती है और आर्थिक नीति धीरे-धीरे कार्यपालिका के नियंत्रण में केंद्रित होती जाती है।
‘बजट डे’ से ‘सरप्राइज़ फ्री पॉलिटिक्स’ की ओर
पहले बजट राजनीतिक जोखिम का दिन होता था- कर बढ़े तो नाराज़गी, सब्सिडी बढ़े तो तालियां। अब सरकार उस जोखिम को पूरे साल में बाँट देना चाहती है। यह एक सोची-समझी राजनीतिक रणनीति है- जनता को एक दिन झटका देने के बजाय, फैसलों को किस्तों में परोसना। इससे न केवल विरोध की तीव्रता कम होती है, बल्कि हर कुछ महीनों में सरकार के पास नई उपलब्धि गिनाने का अवसर भी बना रहता है। इस बदले हुए ढांचे में विपक्ष के लिए चुनौती दोहरी है। पहली, वह बजट पर हमला करे भी तो किस पर। दूसरी, जब बड़े फैसले बजट के बाहर हो रहे हों, तो विरोध का मंच बिखर जाता है। यही कारण है कि बजट अब सरकार के लिए राजनीतिक जोखिम कम और नियंत्रण ज्यादा देने वाला उपकरण बन गया है।
बजट भाषण छोटा है, सत्ता की परिधि बड़ी
1 घंटा 24 मिनट का बजट भाषण किसी तकनीकी दक्षता का प्रमाण भर नहीं है। यह उस राजनीति का प्रतिबिंब है जिसमें फैसले केंद्रीकृत हैं, घोषणाएं चरणबद्ध हैं, और लोकतांत्रिक बहस नियंत्रित। इस बजट के माध्यम से सरकार का लक्ष्य आर्थिक विकास को बनाए रखना, 2047 के विकसित भारत के लिए विकास की नींव को मज़बूत करना, जन-केंद्रित विकास, विश्वास आधारित शासन, व्यापार करने के लिए प्रक्रियाओं का सरलीकरण है।
वित्त मंत्री का तीसरा सबसे छोटा बजट भाषण
1 घंटे 24 मिनट का 2026 का भाषण पिछले सालों के 2 घंटे के स्तर से काफी कम रहा
- 2026-1 घंटा 24 मिनट
- 2025-1 घंटा 14 मिनट
- 2024-1 घंटा 25 मिनट
- 2024-*57 मिनट (अंतरिम)
- 2023-1 घंटा 27 मिनट
- 2022-1 घंटा 32 मिनट
- 2021-1 घंटा 40 मिनट
- 2020-2 घंटे 42 मिनट
- 2019-2 घंटे 15 मिनट
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