/filters:format(webp)/swadeshjyoti/media/media_files/2026/02/26/sudesh-goad-ji-2026-02-26-18-10-40.jpeg)
वरिष्ठ पत्रकार
वस्त्रों के माध्यम से विश्व मंच पर छाया भारत
वैश्विक राजनीति के मंच पर अब केवल सैन्य शक्ति, आर्थिक सामर्थ्य या रणनीतिक गठजोड़ ही प्रभाव नहीं डालते, बल्कि सांस्कृतिक प्रतीक भी उतने ही निर्णायक और प्रभावशाली बन चुके हैं। 21वीं सदी की कूटनीति में संस्कृति और पहचान, शक्ति के नए आयाम बनकर उभरे हैं। भारत ने इस क्षेत्र में अपने परिधानों के माध्यम से एक विशिष्ट और प्रभावी पहचान गढ़ी है। विशेष रूप से नरेंद्र मोदी के नेतृत्व काल में भारतीय वस्त्र न केवल राष्ट्रीय गौरव के प्रतीक बने हैं, बल्कि वैश्विक कूटनीति के सशक्त उपकरण के रूप में भी स्थापित हुए हैं।
बहुत ही शानदार!
— Narendra Modi (@narendramodi) February 26, 2026
भारतीय परिधान के प्रति आपका ये लगाव हमारे देश की समृद्ध संस्कृति और परंपराओं के प्रति आपके सम्मान को दर्शाता है। @netanyahuhttps://t.co/YxbNVqwyTi
हाल में बेंजामिन नेतन्याहू द्वारा संयुक्त भोज के अवसर पर भारतीय शैली की जैकेट धारण करना केवल एक औपचारिकता नहीं थी, बल्कि यह भारत-इजरायल संबंधों की गहराई, सम्मान और आत्मीयता का सांस्कृतिक संदेश है। यह घटना इस व्यापक परिवर्तन का हिस्सा है, जिसमें भारतीय परिधान वैश्विक मंच पर मित्रता, साझेदारी और सांस्कृतिक सम्मान की भाषा बनते जा रहे हैं।
परिधान बने पहचान और कूटनीति का नया माध्यम
इतिहास साक्षी है कि वस्त्र केवल शरीर ढकने का माध्यम नहीं होते, बल्कि वे पहचान, परंपरा और विचारधारा के प्रतीक भी होते हैं। महात्मा गांधी द्वारा खादी को स्वतंत्रता आंदोलन का प्रतीक बनाना इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। उसी परंपरा को आधुनिक संदर्भ में आगे बढ़ाते हुए आज भारतीय नेतृत्व ने परिधानों को सांस्कृतिक कूटनीति का प्रभावी माध्यम बना दिया है।जब कोई राष्ट्राध्यक्ष किसी दूसरे देश की यात्रा के दौरान उस देश की पारंपरिक पोशाक धारण करता है या उसे स्वीकार करता है, तो यह केवल औपचारिकता नहीं होती; यह उस देश की संस्कृति और परंपरा के प्रति सम्मान का सार्वजनिक प्रदर्शन होता है। भारतीय परिधानों के साथ भी यही हो रहा है।
‘मोदी जैकेट’: आधुनिक भारतीय कूटनीति की पहचान
नेहरू जैकेट लंबे समय से भारतीय राजनीतिक और सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा रही है, लेकिन हाल के वर्षों में इसे नया वैश्विक आयाम मिला है। नरेंद्र मोदी द्वारा विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों जैसे जी-20, संयुक्त राष्ट्र महासभा, ब्रिक्स सम्मेलन और द्विपक्षीय बैठकों में विविध रंगों और डिजाइनों में पहनी गई जैकेट ने इसे आधुनिक भारतीय कूटनीति का प्रतीक बना दिया है।
यह जैकेट भारत की परंपरा और आधुनिकता का संगम प्रस्तुत करती है। इसका सरल लेकिन आकर्षक डिजाइन भारतीय सौंदर्यबोध और व्यावहारिकता दोनों को दर्शाता है। परिणामस्वरूप, यह केवल भारत में ही नहीं, बल्कि वैश्विक फैशन और कूटनीतिक परिधानों का हिस्सा बन चुकी है।
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक द्वारा भारतीय त्योहारों के अवसर पर पारंपरिक भारतीय परिधान धारण करना और कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो द्वारा भारत यात्रा के दौरान कुर्ता-पायजामा पहनना इस प्रवृत्ति के महत्वपूर्ण उदाहरण हैं। यह दर्शाता है कि भारतीय परिधान अब केवल भारत तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वैश्विक सांस्कृतिक संवाद का हिस्सा बन चुके हैं।
गमछा, गमोसा और शॉल: लोक संस्कृति की वैश्विक पहचान
भारतीय सांस्कृतिक कूटनीति की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें केवल शाही या औपचारिक परिधान ही नहीं, बल्कि लोक संस्कृति से जुड़े वस्त्र भी शामिल हैं। असम का गमोसा, उत्तर भारत का गमछा और विभिन्न राज्यों की पारंपरिक शॉल आज वैश्विक मंच पर भारतीय संस्कृति के प्रतीक बन चुके हैं।
विदेशी राष्ट्राध्यक्षों और गणमान्य व्यक्तियों को गमोसा या शॉल भेंट करना केवल सम्मान की परंपरा नहीं, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक विविधता और समृद्धि का प्रदर्शन भी है। जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे की वाराणसी यात्रा के दौरान भारतीय शॉल स्वीकार करना और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों द्वारा भारतीय पारंपरिक वस्त्रों को सम्मानपूर्वक ग्रहण करना इस सांस्कृतिक कूटनीति की सफलता का प्रमाण है।यह प्रवृत्ति दर्शाती है कि भारत अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े प्रतीकों को वैश्विक मंच पर आत्मविश्वास के साथ प्रस्तुत कर रहा है।
आर्थिक आयाम: परिधान से बढ़ती अर्थव्यवस्था
भारतीय परिधानों की वैश्विक स्वीकार्यता का सबसे महत्वपूर्ण प्रभाव आर्थिक क्षेत्र में दिखाई दे रहा है। भारत का वस्त्र उद्योग देश के सबसे बड़े उद्योगों में से एक है, जो करोड़ों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार प्रदान करता है।
खादी, हैंडलूम, सिल्क और कॉटन जैसे पारंपरिक भारतीय वस्त्र अब वैश्विक बाजार में नई पहचान बना रहे हैं। पिछले दशक में खादी उत्पादों की बिक्री में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। “वोकल फॉर लोकल” और “मेक इन इंडिया” जैसे अभियानों ने भारतीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा दिया है।
भारत का वस्त्र निर्यात 40 अरब डॉलर से अधिक के स्तर तक पहुंच चुका है, और आने वाले वर्षों में इसके और बढ़ने की संभावना है। भारतीय कारीगरों द्वारा निर्मित हस्तशिल्प और पारंपरिक वस्त्र अब यूरोप, अमेरिका और एशिया के बाजारों में लोकप्रिय हो रहे हैं।
इससे न केवल भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आय के नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं।वैश्विक फैशन उद्योग में भी भारतीय कपड़ों और डिजाइन का प्रभाव बढ़ रहा है। भारतीय सिल्क, कढ़ाई, ब्लॉक प्रिंट और हैंडलूम तकनीकों का उपयोग अंतरराष्ट्रीय डिजाइनर अपने संग्रह में कर रहे हैं।योग, आयुर्वेद और भारतीय त्योहारों की वैश्विक लोकप्रियता ने भी भारतीय परिधानों की मांग को बढ़ाया है।
सॉफ्ट पावर के रूप में भारतीय परिधान
सॉफ्ट पावर का अर्थ है-बिना दबाव या बल प्रयोग के, संस्कृति और मूल्यों के माध्यम से प्रभाव स्थापित करना। भारतीय परिधान इस सॉफ्ट पावर का प्रभावी उदाहरण बन चुके हैं।
जब कोई विदेशी नेता भारतीय परिधान धारण करता है, तो यह भारत के प्रति सम्मान और विश्वास का संकेत होता है। यह सांस्कृतिक जुड़ाव राजनीतिक और आर्थिक संबंधों को भी मजबूत करता है।भारतीय परिधान भारत की प्राचीन सभ्यता, सांस्कृतिक विविधता और आधुनिक आत्मविश्वास का प्रतिनिधित्व करते हैं।
परिधान के माध्यम से वैश्विक नेतृत्व की स्थापना
भारतीय परिधानों की बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता इस बात का संकेत है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत केवल आर्थिक और राजनीतिक शक्ति के रूप में ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक शक्ति के रूप में भी उभर रहा है।
जब विश्व के नेता भारतीय जैकेट, गमछा या शॉल धारण करते हैं, तो वे केवल एक वस्त्र नहीं पहनते, वे भारत की सभ्यता, परंपरा और सांस्कृतिक गौरव को सम्मान देते हैं।
भारत ने यह सिद्ध कर दिया है कि सांस्कृतिक आत्मविश्वास ही वैश्विक नेतृत्व की वास्तविक आधारशिला है। वस्त्रों के माध्यम से भारत न केवल अपनी परंपराओं को पुनर्जीवित कर रहा है, बल्कि विश्व मंच पर अपनी सॉफ्ट पावर को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा रहा है।
Expert opinions:
परिधान, पहचान से मजबूत होती भारतीय ‘सॉफ्ट पावर’ - सुदेश गौड़
धन शोधन मामला: अनिल अंबानी पर 40 हजार करोड़ का बैंक कर्ज; 3,716 करोड़ का बंगला 'अबोड' कुर्क
/swadeshjyoti/media/agency_attachments/2025/11/09/2025-11-09t071157234z-logo-640-swadesh-jyoti-1-2025-11-09-12-41-56.png)
/swadeshjyoti/media/agency_attachments/2025/11/09/2025-11-09t071151025z-logo-640-swadesh-jyoti-1-2025-11-09-12-41-50.png)
/swadeshjyoti/media/media_files/2026/02/26/pm-modi-israel-visit-2026-02-26-18-14-29.jpg)