होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर चिंता के बीच केंद्र ने जताई पूरी तैयारी
नई दिल्ली, 03 मार्च: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति को लेकर पैदा हुई अनिश्चितता के बीच केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि भारत में कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति पर किसी प्रकार का असर नहीं पड़ेगा। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री Hardeep Singh Puri ने मंगलवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि देश में तेल और गैस की पर्याप्त उपलब्धता है और मौजूदा परिस्थितियों से निपटने के लिए सभी आवश्यक कदम पहले से उठाए जा चुके हैं।
उन्होंने कहा कि भारत के पास कच्चे तेल, पेट्रोल, डीजल और विमान ईंधन जैसे आवश्यक पेट्रोलियम उत्पादों का पर्याप्त भंडार मौजूद है। इस भंडार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यदि पश्चिम एशिया से आपूर्ति में अल्पकालिक बाधा आती भी है तो उसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर न पड़े। मंत्री ने भरोसा दिलाया कि सरकार हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है और किसी भी संभावित संकट से निपटने के लिए तैयार है।
ऊर्जा क्षेत्र में भारत की वैश्विक स्थिति
हरदीप सिंह पुरी ने देश की ऊर्जा क्षमता का उल्लेख करते हुए बताया कि भारत विश्व में पेट्रोलियम उत्पादों का तीसरा सबसे बड़ा आयातक, चौथा सबसे बड़ा परिष्करणकर्ता और पांचवां सबसे बड़ा निर्यातक है। यह स्थिति भारत को वैश्विक ऊर्जा बाजार में एक महत्वपूर्ण स्थान प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में भारत ने अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाकर आयात निर्भरता के जोखिम को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।
उनके अनुसार, सरकार की नीति केवल ऊर्जा उपलब्धता सुनिश्चित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे किफायती बनाए रखना भी प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से भारत ने अलग-अलग देशों से दीर्घकालिक और लचीले आपूर्ति समझौते किए हैं, जिससे किसी एक क्षेत्र विशेष पर अत्यधिक निर्भरता कम हो सके।
/filters:format(webp)/swadeshjyoti/media/media_files/2026/03/03/west-asia-crisis-india-oil-supply-no-impact-hardeep-puri-2026-03-03-19-36-37.jpg)
होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भरता कम करने की रणनीति
पश्चिम एशिया के तनावपूर्ण हालात के बीच सबसे अधिक चर्चा Strait of Hormuz को लेकर हो रही है। यह जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण मार्ग है। यदि यहां किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न होती है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों पर तात्कालिक प्रभाव पड़ सकता है।
इस संदर्भ में मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारतीय ऊर्जा कंपनियों के पास अब ऐसे वैकल्पिक स्रोत और मार्ग उपलब्ध हैं, जो होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर नहीं गुजरते। उन्होंने बताया कि ऐसे कार्गो की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है, ताकि यदि किसी कारणवश इस मार्ग से आपूर्ति प्रभावित होती है तो उसका असर सीमित रखा जा सके। यह रणनीति भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
चौबीसों घंटे निगरानी के लिए नियंत्रण कक्ष स्थापित
हरदीप सिंह पुरी ने यह भी जानकारी दी कि मंत्रालय ने देशभर में पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति और भंडारण की स्थिति पर लगातार नजर रखने के लिए चौबीसों घंटे संचालित होने वाला एक नियंत्रण कक्ष स्थापित किया है। यह नियंत्रण कक्ष विभिन्न तेल कंपनियों और आपूर्ति श्रृंखलाओं से वास्तविक समय की जानकारी प्राप्त कर रहा है। इससे किसी भी संभावित कमी या बाधा की स्थिति में तुरंत निर्णय लिया जा सकेगा।
उन्होंने कहा कि सरकार और तेल कंपनियां आपसी समन्वय के साथ काम कर रही हैं, ताकि बाजार में घबराहट या अनावश्यक अटकलों को रोका जा सके। मंत्री ने आम नागरिकों से अपील की कि वे किसी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें, क्योंकि देश में पर्याप्त भंडार उपलब्ध है।
भारत की आयात निर्भरता और वैश्विक आपूर्ति स्रोत
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का लगभग 88 से 90 प्रतिशत कच्चा तेल आयात के माध्यम से पूरा करता है। इस कारण अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों का भारत पर प्रभाव पड़ना स्वाभाविक है। हालांकि, भारत ने समय के साथ अपने आयात स्रोतों में विविधता लाई है। वर्तमान में भारत रूस, सऊदी अरब, इराक, संयुक्त अरब अमीरात और अमेरिका जैसे देशों से कच्चा तेल खरीदता है।
दुनिया में कच्चे तेल का सबसे बड़ा उत्पादक अमेरिका है। इसके अलावा सऊदी अरब, रूस, कनाडा, चीन, इराक, ईरान, ब्राजील, संयुक्त अरब अमीरात और कुवैत भी प्रमुख उत्पादक देशों में शामिल हैं। भारत ने इन देशों के साथ व्यापारिक संबंधों को संतुलित रखते हुए अपने आयात विकल्प खुले रखे हैं, ताकि किसी एक क्षेत्र विशेष में संकट आने पर अन्य विकल्पों का उपयोग किया जा सके।
ऊर्जा सुरक्षा पर सरकार का भरोसा
पश्चिम एशिया संकट के बीच सरकार का यह बयान बाजार और आम जनता के लिए आश्वस्त करने वाला माना जा रहा है। ऊर्जा क्षेत्र विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तनाव लंबा खिंचता है तो अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उतार-चढ़ाव संभव है, लेकिन भारत की तैयारियां अल्पकालिक झटकों को संभालने में सक्षम हैं।
हरदीप सिंह पुरी ने दोहराया कि भारत की प्राथमिकता देश की ऊर्जा सुरक्षा और नागरिकों की आवश्यकताओं की पूर्ति है। उन्होंने कहा कि सरकार किसी भी अप्रत्याशित परिस्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह सतर्क और सक्रिय है।
✨ स्वदेश ज्योति के द्वारा | और भी दिलचस्प खबरें आपके लिए… सिर्फ़ स्वदेश ज्योति पर!
मध्य प्रदेश में फिल्म ‘शतक’ टैक्स फ्री, मुख्यमंत्री ने की घोषणा
ईरान का दावा होर्मुज स्ट्रेट को कब्जे में किया, ट्रंप ने कहा बंद नही हुआ है मार्ग
हकीकत और कल्पना में फर्क मिटा रहा डिजीटल कंटेंट, बच्चे नकली को ही असल जिंदगी मान बैठे
/swadeshjyoti/media/agency_attachments/2025/11/09/2025-11-09t071157234z-logo-640-swadesh-jyoti-1-2025-11-09-12-41-56.png)
/swadeshjyoti/media/agency_attachments/2025/11/09/2025-11-09t071151025z-logo-640-swadesh-jyoti-1-2025-11-09-12-41-50.png)
/swadeshjyoti/media/media_files/2026/03/03/46162a1abcc6819efb853e6c9cf9af8e_1244792005west-asia-crisis-india-oil-supply-no-impact-hardeep-puri-2026-03-03-19-36-23.jpg)