अदाणी अब अमेरिकी SEC का समन स्वीकारने को तैयार, 14 महीने बाद केस में आया नया मोड़
गौतम अदाणी और उनके भतीजे सागर अदाणी के विरोध में अमेरिकी स्टॉक मार्केट रेगुलेटर सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) से लगाए हुए धोखाधड़ी के आरोपों के मामले में एक बड़ी घटना सामने आई है। पहली बार अदाणी पक्ष ने लगभग 14 महीने बाद अमेरिकी अदालत में अपनी तरफ से सक्रिय कदम उठाते हुए यह संकेत दिया है कि वह अब SEC के समन (सम्मन) को स्वीकार करने के तरीके पर बातचीत के लिए तैयार है।
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न्यूयॉर्क की फेडरल कोर्ट में 23 जनवरी को अदाणी की ओर से सुलिवन एंड क्रॉमवेल LLP लॉ फर्म ने जज निकोलस जी. गारौफिस को एक पत्र सौंपा। जिसमें यह बताया गया कि अदाणी पक्ष और SEC समन की सर्विस को लेकर आपसी सहमति बनाने पर चर्चा कर रहे हैं। इसी तहत अदालत से अनुरोध किया गया कि फिलहाल कोई आदेश पारित न किया जाए, ताकि दोनों पक्षों को बातचीत का समय मिल सके। पत्र में चर्चा की जा रही शर्तों का कोई विवरण साझा नहीं किया गया।
यह घटनाक्रम उस समय बाहर आया है, जब SEC ने इससे मात्र दो दिन पहले अदालत से यह अनुरोध किया था कि भारतीय सरकार को बायपास करते हुए समन को ईमेल के द्वारा और अदाणी के अमेरिकी वकीलों के माध्यम से सीधे सौंपने की अनुमति दी जाए। SEC ने यह कदम इसलिए उठाया क्योंकि भारत के कानून मंत्रालय ने हैग कन्वेंशन के तहत दो बार समन सर्व करने से इनकार कर दिया था।
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कानून मंत्रालय ने मई में पहली बार समन यह कहते हुए लौटाया था कि SEC के कवर लेटर पर स्याही से हस्ताक्षर और आधिकारिक मुहर नहीं थी। SEC ने इस आपत्ति को खारिज करते हुए कहा था कि हैग कन्वेंशन में ऐसी कोई अनिवार्यता नहीं है। इसके बाद 27 मई को SEC ने दोबारा समन भेजा, लेकिन दिसंबर में मंत्रालय ने फिर से इनकार कर दिया। इस बार नवंबर 2025 की तारीख वाली चिट्ठियों में मंत्रालय ने SEC के आंतरिक नियम 5(b) का हवाला देते हुए कहा कि यह समन उन मामलों की श्रेणी में नहीं आता, जिन्हें मंत्रालय संभालता है। इन पत्रों पर डिप्टी लीगल एडवाइजर कृष्ण मोहन आर्य और सेक्शन ऑफिसर निरंजन प्रसाद के हस्ताक्षर थे।
SEC ने अदालत में दर्ज हलफनामे में मंत्रालय के इस रुख को पूरी तरह रद्द कर दिया है। SEC का कहना है कि मंत्रालय की आपत्तियां हैग कन्वेंशन के नियमों पर आधारित नहीं हैं, बल्कि SEC की जांच और उसकी वैधता को चुनौती देने जैसी हैं। SEC के अनुसार, भारतीय कानून के तहत अब कोई वैकल्पिक रास्ता नहीं बचा है, जिससे हैग कन्वेंशन के जरिए समन देना संभव हो सके। नई दिल्ली स्थित कानून मंत्रालय के अधिकारियों ने इस पूरे मामले पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है।
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SEC के प्रवक्ता ने बताया कि, “हम अपनी सार्वजनिक फाइलिंग्स से आगे कोई टिप्पणी नहीं करेंगे।” वहीं, अदाणी की तरफ से सुलिवन एंड क्रॉमवेल ने भी फिलहाल प्रतिक्रिया देने से इनकार किया है। उल्लेखनीय है कि SEC ने 20 नवंबर 2024 को गौतम अदाणी और सागर अदाणी पर सिविल धोखाधड़ी के आरोप लगाए थे। आरोप है कि उन्होंने 750 मिलियन डॉलर के बॉन्ड इश्यू में कथित धोखाधड़ी कर अमेरिकी निवेशकों से 17.5 करोड़ डॉलर से अधिक जुटाए।
अदाणी ग्रुप ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद बताया है। SEC के इस फैसले की खबर मिलते ही अदाणी ग्रुप की कंपनियों के शेयरों में शुक्रवार को भारी गिरावट नजर आई है और कुछ शेयर 3.4 प्रतिशत से लेकर 14.54 प्रतिशत तक टूट गए।
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