क्या अमेरिका से डील के बाद रूस से तेल आयात बंद कर देगा भारत
बिजनेस: अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते के बाद भारत अब रूस से कच्चा तेल खरीदना धीरे-धीरे कम कर सकता है। अमेरिका के भारत पर लगाए गए 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ को हटाने के बाद केंद्र सरकार इस पर योजना बना रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने बयान में बार-बार कहा है भारत को रूस से अपना तेल आयात कम करना होगा। अमेरिका से व्यापार समझौते के बाद भारत की रूसी तेल आयात रोकने की प्रतिबद्धता के बाद यह कदम उठाया गया है। हालांकि, यह आयात नायरा एनर्जी जैसी कुछ रिफाइनरियों के पास दूसरे विकल्प सीमित होने के कारण अभी पूरी तरह बंद नहीं होगा।
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रिफाइनरियों को दिए गए अनौपचारिक आदेश
सूत्रों के अनुसार, भारतीय रिफाइनरियों को अभी तक रूस से तेल खरीद पूरी तरह रोकने का कोई औपचारिक आदेश नहीं मिला है, लेकिन अनौपचारिक तौर पर खरीद कम करने को कह दिया गया है। आमतौर पर तेल के ऑर्डर 6 से 8 हफ्ते पहले दिए जाते हैं, इसलिए पहले से तय सौदों को पूरा किया जाएगा, लेकिन नए ऑर्डर नहीं दिए जाएंगे।
पहले ही घट गया है रूस से तेल आयात
अमेरिका द्वारा रूस के तेल प्रमुख कंपनियों रोसनेफ्ट और लुकोइल पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद से भारत का रूस से तेल आयात पहले ही घटा दिया है। दिसंबर 2025 में औसतन आयात 12 लाख बैरल प्रतिदिन रहा, जो मई 2023 में 21 लाख बैरल प्रतिदिन के शिखर के स्तर से काफी कम है। जनवरी में यह घटकर 11 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया। अनुमान है कि फरवरी या मार्च में यह 10 लाख बैरल प्रतिदिन से भी नीचे जा सकता है। आंकड़ों से साफ है भारत अपनी ऊर्जा का विकल्प अन्य देशों में भी तलाश रहा है।
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विशेषज्ञों की क्या है राय
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केपलर के लीड रिसर्च एनालिस्ट सुमित रितोलिया के अनुसार अगले 8 से 10 हफ्तों तक रूसी तेल की सप्लाई पहले से तय है। यह भारत की जटिल रिफाइनिंग प्रणाली के लिए आर्थिक रूप से अहम है। पहली तिमाही और दूसरी तिमाही की शुरुआत तक आयात 11 से 13 लाख बैरल प्रतिदिन के बीच बना रह सकता है।
इस समझौते के तहत भारत अमेरिका से तेल खरीद बढ़ा सकता है और वेनेजुएला से भी आयात शुरू कर सकता है। वित्त वर्ष 2023 से पहले रूस का भारत के कुल तेल आयात में हिस्सा 2 फीसदी से भी कम था। इसलिए रूसी तेल की जगह दूसरे स्रोतों से तेल लेने पर आयात बिल में 2 फीसदी से कम का ही इजाफा होगा।
वेनेजुएला का तेल भारी और खट्टा (हेवी और सॉर) होता है, जो आमतौर पर सस्ता होता है और भारत की कई रिफाइनरियां इसे प्रोसेस करने में सक्षम हैं।
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