ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज पर जीएसटी चोरी का आरोप: 4.24 करोड़ रुपये जुर्माना, कुल 6.37 करोड़ की मांग

नई दिल्ली, 03 मार्च: देश की प्रमुख खाद्य उत्पाद निर्माता कंपनी Britannia Industries पर माल और सेवा कर GST की चोरी के मामले में 4.24 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है। विभाग की ओर से कंपनी को कुल 6.37 करोड़ रुपये का नोटिस जारी किया गया है, जिसमें कर, जुर्माना और ब्याज की मांग शामिल है। यह मामला आपूर्ति किए गए सामान के कथित गलत वर्गीकरण से जुड़ा है, जिसके कारण कर भुगतान में कमी का आरोप लगाया गया है।

कंपनी ने शेयर बाजार को दी जानकारी में बताया कि यह आदेश केंद्रीय माल एवं सेवा कर तथा केंद्रीय उत्पाद शुल्क आयुक्त, ठाणे कार्यालय की ओर से जारी किया गया है। विभाग का कहना है कि वित्त वर्ष 2020-21 से 2023-24 के बीच कंपनी ने कुछ उत्पादों का वर्गीकरण सही श्रेणी में नहीं दिखाया, जिससे कर देनदारी कम हो गई। इसी आधार पर यह कार्रवाई की गई है।

धारा 74 के तहत कार्रवाई

यह आदेश माल और सेवा कर अधिनियम की धारा 74 के अंतर्गत जारी किया गया है। इस धारा के तहत उन मामलों में कार्रवाई की जाती है, जहां कर चोरी, गलत विवरण या जानबूझकर तथ्यों को छिपाने का आरोप हो। विभाग ने  FMCG कंपनी से 2.12 करोड़ रुपये कर के रूप में और 4.24 करोड़ रुपये जुर्माने के रूप में जमा कराने का निर्देश दिया है। इस प्रकार कुल 6.37 करोड़ रुपये की मांग की गई है। इसके अतिरिक्त देरी के अनुसार ब्याज भी अदा करना होगा।

विभाग का आरोप है कि आपूर्ति किए गए कुछ सामान का वर्गीकरण ऐसी श्रेणी में दिखाया गया, जहां कर दर कम थी, जबकि वास्तविक श्रेणी में कर दर अधिक लागू होती थी। इसी कथित अंतर के आधार पर कर की गणना दोबारा की गई और मांग पत्र जारी किया गया।

कंपनी ने जताया असहमति

ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज ने अपने बयान में कहा है कि वह इस आदेश से सहमत नहीं है और उपलब्ध कानूनी विकल्पों पर विचार कर रही है। कंपनी का कहना है कि इस नोटिस का उसके कारोबार या वित्तीय स्थिति पर कोई बड़ा प्रभाव नहीं पड़ेगा। कंपनी प्रबंधन के अनुसार, वह कानून के दायरे में रहते हुए उचित मंच पर अपील दायर करेगी।

कंपनी ने स्पष्ट किया है कि उसका संचालन सामान्य रूप से जारी रहेगा और इस कार्रवाई से उत्पादन, वितरण या बाजार में आपूर्ति पर कोई असर नहीं पड़ेगा। निवेशकों को भी आश्वस्त किया गया है कि कंपनी की वित्तीय स्थिति मजबूत है और यह विवाद सीमित दायरे का है।

वित्त वर्ष 2020-21 से 2023-24 तक का मामला

यह पूरा प्रकरण चार वित्त वर्षों से जुड़ा है। विभाग ने इस अवधि के दौरान किए गए लेन-देन की समीक्षा के बाद यह मांग तय की है। कर विशेषज्ञों के अनुसार, वस्तुओं के वर्गीकरण को लेकर कई बार उद्योग और विभाग के बीच व्याख्या को लेकर मतभेद उत्पन्न होते हैं। ऐसे मामलों में अंतिम निर्णय प्रायः अपीलीय प्राधिकरण या न्यायिक मंच पर होता है।

ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज खाद्य क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों में से एक है, जो बिस्कुट, ब्रेड और अन्य पैक्ड खाद्य उत्पादों का निर्माण करती है। देशभर में इसका व्यापक वितरण नेटवर्क है। ऐसे में इस प्रकार की कर संबंधी कार्रवाई का बाजार में चर्चा होना स्वाभाविक है, हालांकि कंपनी ने इसे सीमित वित्तीय प्रभाव वाला मामला बताया है।

आगे की कानूनी प्रक्रिया

अब निगाहें इस बात पर होंगी कि कंपनी किस स्तर पर अपील करती है और विभाग इस मामले में क्या रुख अपनाता है। यदि कंपनी अपीलीय प्राधिकरण के समक्ष जाती है, तो सुनवाई के बाद ही अंतिम निर्णय स्पष्ट होगा। फिलहाल विभाग की ओर से जारी आदेश प्रभावी है और निर्धारित समयसीमा में राशि जमा करने या अपील दायर करने का विकल्प कंपनी के पास उपलब्ध है।

इस घटनाक्रम ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया है कि कर अनुपालन के मामलों में विभाग सख्त रुख अपना रहा है और बड़े कॉरपोरेट समूहों पर भी नियमों का समान रूप से पालन सुनिश्चित किया जा रहा है।

✨ स्वदेश ज्योति के द्वारा | और भी दिलचस्प खबरें आपके लिए… सिर्फ़ स्वदेश ज्योति पर!

पश्चिम एशिया संकट का भारत में कच्चे तेल और गैस आपूर्ति पर असर नहीं: हरदीप सिंह पुरी का बड़ा बयान

मध्य प्रदेश में फिल्म ‘शतक’ टैक्स फ्री, मुख्यमंत्री ने की घोषणा

ईरान का दावा होर्मुज स्ट्रेट को कब्जे में किया, ट्रंप ने कहा बंद नही हुआ है मार्ग

हकीकत और कल्पना में फर्क मिटा रहा डिजीटल कंटेंट, बच्चे नकली को ही असल जिंदगी मान बैठे