महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का बुधवार 28 जनवरी को विमान दुर्घटना में निधन हो गया। वह मुंबई से अमरावती की ओर आ रहे थे। उनके साथ चार्टर प्लैन में बैठ 4 अन्य लोगों की भी इस हादसे में जान चली गई। आज जानिए अजित पवार से जुड़े कुछ किस्से
शुरूआती जीवन
अजित पवार का जन्म 22 जुलाई 1959 को अहमदनगर जिले के देवलाली प्रवरा में हुआ था। वो शरद पवार के बड़े भाई अनंतराव पवार के बेटे हैं। अजित के पिता फिल्म जगत से जुड़े हुए थे और मुंबई में मौजूद वी. शांताराम के राजकमल स्टूडियो में काम करते थे।
बारामती से उन्होंने शुरूआती पढ़ाई की। कॉलेज के दिनों में ही उनके पिता का निधन हो गया। अजित ने महाराष्ट्र के कोल्हापुर में शिवाजी विश्वविद्यालय से स्नातक किया है।
आगे चल कर अजित ने महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री पदम सिंह पाटिल की बहन सुनेत्रा पवार से शादी की है। इनके दो बेटे, जय पवार और पार्थ पवार हैं। सुप्रिया सुले, अजित की चचेरी बहन हैं।
चाचा शरद पवार के निजी सचिव रहे
अजित शुरुआत में शरद पवार के निजी सचिव रहे। एक चैनल को दिए इंटरव्यू में बचपन का जिक्र करते हुए अजित ने कहा था,
मैं शुरुआत से अपने चाचा से डरता था, लेकिन हम भाई-बहनों में हमेशा प्यार था। मुझे लगता है पार्टी और परिवार को अलग-अलग रखा जाना चाहिए।
अजित की सत्ता यात्रा
अजित पवार ने 1982 में राजनीति में कदम रखा। तब वे एक सहकारी चीनी फैक्ट्री बोर्ड के लिए चुने गए थे। इसके बाद वे 1991 में पुणे जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष बने और 16 साल तक इस पद पर रहे।
चाचा शरद पवार के लिए सीट छोड़ी
1991 में पहली बार बारामती से सांसद बने। उपचुनाव हुआ, तो चाचा शरद पवार के लिए सीट छोड़ दी। यहीं से जीतकर शरद, पीवी नरसिम्हा राव की सरकार में रक्षा मंत्री बने। शरद पवार 1996 से 2004 तक बारामती से सांसद रहे।
इस दौरान अजित 1995 में बारामती विधानसभा क्षेत्र से विधायक बने। फिर 1999, 2004, 2009 और 2014 में भी यहीं से विधायक चुने गए। 1999 में विलासराव देशमुख की सरकार में उन्हें सिंचाई विभाग में कैबिनेट मंत्री बनाया गया।
शरद का फैसला नहीं आया था पसंद
2004 में जब राकंपा की 71 सीटें आईं, तब शरद ने कांग्रेस (69 सीटें) को सरकार बनाने का मौका दिया। अजित, शरद के इस फैसले से नाराज हुए थे। अजित पवार के सहयोगियों का मानना था कि ये उनको दरकिनार करने के लिए किया जा रहा है। उनके चाचा उनको मुख्यमंत्री बनाने से रोकने के लिए ये सब कर रहे हैं।
वरिष्ट पत्रकार मयूर पारेख बताते हैं कि अजित पवार और शरद पवार भले ही एक ही राजनीतिक घराने से आते हैं लेकिन दोनों की राजनीति में बहुत ज्यादा अंतर है। शरद पवार कभी भी स्पष्ट बात नहीं कहते हैं, जबकि अजित को अगर किसी बात को लेकर ना कहना है तो वो कभी भी बोलने से चूकते नहीं हैं।
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घोटाले से जुड़े विवाद में आया जिसके बाद उन्हें इस्तीफा देना पड़ा
महाराष्ट्र की राजनीति में महत्वाकांक्षी और प्रभावशाली नेता माने जाने वाले अजित पवार ने 2009 के विधानसभा चुनाव के बाद उप मुख्यमंत्री बनने की इच्छा जताई, लेकिन उस समय यह पद छगन भुजबल को मिला। हालांकि, दिसंबर 2010 में वह पहली बार उप मुख्यमंत्री बने। 2013 में उनका नाम सिंचाई घोटाले से जुड़े विवाद में आया जिसके बाद उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। हालांकि बाद में उन्हें क्लीन चिट मिली और वह फिर से पद पर लौटे।
विवदों से भी जुड़े रहे अजित पवार-
· अजित पवार का राजनीतिक जीवन विवादों से भी जुड़ा रहा।
· 2013: में अजित ने “अगर बांध में पानी नहीं है तो क्या पेशाब करके भरें?” वाला बयान, जिसकी काफी आलोचना हुई। बाद में इस बयान को लेकर माफी मांगनी पड़ी।
· 2014: लोकसभा चुनाव के दौरान मतदाताओं को धमकाने के आरोप।
· भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग के आरोप भी अजित पर समय-समय पर लगे
· लवासा लेक सिटी प्रोजेक्ट में कथित मदद और अन्य मामलों को लेकर विवाद।
हालांकि, इन विवादों के बावजूद अजित पवार महाराष्ट्र की राजनीति में रांकपा के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते रहे।
जब बगावत पर उतर उपमुख्यमंत्री बने अजित
22 नवंबर 2019 बीजेपी और शिवसेना का गठबंधन टूटने के बाद महाराष्ट्र में पिछले चार हफ्ते से तय नहीं हो पाया था कि सरकार कौन बनाएगा और किसके साथ मिलकर बनाएगा। कांग्रेस, शिवसेना और एनसीपी के सभी दिग्गज नेता नेहरू सेंटर मुंबई में एक-एक कर पहुंच रहे थे। इस लिहाज से ये बैठक बेहद अहम थी।
वरिष्ठ पत्रकार जितेंद्र दीक्षित अपनी किताब ‘35 डेज’ में लिखते हैं,
22 नवंबर 2019 को महाविकास अघाड़ी की बैठक में तय हुआ कि उद्धव ठाकरे पांच साल तक सरकार चलाएंगे। अगले दिन 23 नवंबर को तड़के 6:30 बजे शरद पवार एक फोन कॉल से जागे। फोन पर किसी ने घबराहट से कहा, ‘मैं अभी-अभी राजभवन से लौटा हूं, आप एक बार न्यूज चैनल देखिए।’ ये फोन शरद पवार की पार्टी के सदस्य का था।
शरद को कुछ शक हुआ, फोन रखते ही फौरन उन्होंने अखबार देखा। टाइम्स ऑफ इंडिया ने छापा था ‘अगले पांच साल सर्वसम्मति से उद्धव सीएम होंगे। अगले ही पल उन्होंने टेलीविजन पर न्यूज चैनल खंगाले तो देखा हेडलाइन थी- देवेंद्र फडणवीस लेंगे सीएम पद की शपथ। अजित पवार महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम होंगे।
शरद पवार को समझने में देर नहीं लगी। उन्होंने तुरंत उद्धव ठाकरे को फोन घुमाया। 2 दिसंबर 2019 को एक न्यूज चैनल को दिए एक इंटरव्यू में शरद पवार ने बताया था, ‘मैंने सबसे पहले उद्धव ठाकरे को फोन किया और कहा, ये जो कुछ भी हुआ है ये ठीक नहीं है। हमें ठीक करना होगा। हमने जो तय किया है वही होगा।’
बतौर डिप्टी सीएम अजित पवार ने ANI को दिए अपने पहले इंटरव्यू में कहा,
तीनों पार्टियों (कांग्रेस, शिवसेना और एनसीपी) की चर्चा का कोई अंत नहीं है। पिछले एक महीने से सिर्फ बातचीत ही चल रही है, जो कहीं नहीं पहुंचने वाली। राज्य को एक स्थायी सरकार चाहिए इसलिए मैंने ये कदम उठाया है।
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