वित्तमंत्री निर्मला सीतारमन लोकसभा में ने बजट से पहले देश का आर्थिक रिपोर्ट कार्ड यानी इकॉनोमिक सर्व जारी किया है। इकॉनोमिक सर्वे के अनुसार वित्त वर्ष 2026-27 में देश की जीडीपी विकास दर 6.8 से 7.2 रहने का अनुमान लगाया गया है। मौजूदा वित्तिय वर्ष की जीडीपी विकास दर 7.4 है। नया वित्त वर्ष 1 अप्रैल से शुरू होगा। 

इसके अलावा पिछले एक साल में महंगाई ने आपकी थाली पर कितना असर डाला, खेती-किसानी की क्या हालत है और क्या आने वाले समय में आपके लिए नई नौकरियां बढ़ेंगी या नहीं इसकी भी जानकारी सर्वे में दी गई है।

बढ़ेगी महंगाई दर

अर्थिक सर्वे के अनुसार ये बताया गया कि आने वाले वित्तिय वर्ष में महंगाई दर बढ़ सकती है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने अनुमान जताया है कि भारत में मंहगाई दर में धीमी गति से वृध्दी होगी। लेकिन यह आरबीआई के 4% (± 2%) के दायरे से बाहर नही रहेगी।

लोकसाभा में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन

अब, पिछले कुछ वर्षों के सुधारों के बाद यह स्पष्ट है कि भारत की उत्पादन क्षमता मजबूत हुई है और विकास की यह संभावना अब 7% के स्तर को छू रही है। यानी 7 फीसदी की विकास दर अब न्यू नॉर्मल है।

जीएसटी दरें घटाने से मांग को सपोर्ट मिला

आर्थिक रिपोर्ट कार्ड में सरकार की ओर से बताया गया कि महंगाई दर का लक्ष्य अनुमान रेंज के अंदर है। सरकार ने कहा कि जीएसटी की दरें घटाने से मांग को सपोर्ट मिला और अगले वित्त वर्ष में घरेलू मांग, निवेश में मजबूती रहने का अनुमान है लेकिन ग्लोबल ग्रोथ और स्थिरता को लेकर अनिश्चितता भी कायम है।

पांच साल में रिटेल मंहगाई दर घटी

वित्तमंत्री ने जानकारी दी पिछले पांच साल में खुदरा (रिटेल) महंगाई दर 5.5 से 4.3 पर आई। खरीफ की अच्छी पैदावार होने से तथा रबी की बेहतर बुआई को देखते हुए, दिसंबर 2025 में भारतीय रिजर्व बेंक ने वित्त वर्ष 2026 के लिए महंगाई दर का अनुमान 2.6% से घटाकर 2% कर दिया था।

आरबीआई का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2027 की पहली और दूसरी तिमाही में महंगाई दर क्रमश: 3.9% और 4% रह सकती है।

वैश्विक तनाव के बीज भी भारतीय अर्धव्यवस्था मजूबत स्थिति में 

जीडीपी: सर्वे में अनुमान जताया गया है कि वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की जीडीपी विकास दर 6.8% से 7.2% के बीच रह सकती है। वैश्विक स्तर पर जारी तनाव और टैरिफ की अस्थिरता के बावजूद भारतीय अर्धव्यस्था की रफ्तार मजबूत बनी हुई है। सर्वे के अनुसार, चालू वित्त वर्ष 2025-26 में विकास दर 7.4% रहने की उम्मीद है, जो आरबीआई के 7.3% के अनुमान से भी ज्यादा है।

आर्थिक सर्वेक्षण क्यों जरूरी है?

आर्थिक सर्वेक्षण महत्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि इसमें आम तौर पर पिछले वर्ष देश में हुए प्रमुख आर्थिक घटनाक्रमों की समीक्षा की जाती है। इस वर्ष, इसमें वैश्विक अनिश्चितताओं, डोनाल्ड ट्रम्प की टैरिफ नीतियों से उत्पन्न जोखिमों, रोजगार पर एआई के प्रभाव और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये के अवमूल्यन के बीच अर्थव्यवस्था की निरंतर वृद्धि क्षमता पर प्रकाश डालने की उम्मीद है। 

पहली बार कब पेश किया गया आर्थिक सर्वेक्षण

 सबसे पहले 1950-51 में बजट दस्तावेजों के एक घटक के रूप में प्रस्तुत किया गया आर्थिक सर्वेक्षण धीरे-धीरे केंद्रीय बजट से पहले जारी की जाने वाली एक स्वतंत्र रिपोर्ट के रूप में विकसित हो गया है। इस दस्तावेज़ में व्यापक क्षेत्र-वार आकलन भी शामिल हैं, जिन्हें विशिष्ट आर्थिक मुद्दों की विस्तृत जांच करने वाले केंद्रित अध्यायों द्वारा समर्थित किया गया है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा हमारे सुधार एक्सप्रेस को तेजी से आगे बढा़या है

आर्थिक सर्वे से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि -

देश का ध्यान स्वाभाविक रूप से बजट पर केंद्रित है। लेकिन इस सरकार की पहचान सुधार, क्रियान्वयन और परिवर्तन रही है। अब हमने 'सुधार एक्सप्रेस' को तेजी से आगे बढ़ा दिया है। इस 'सुधार एक्सप्रेस' को गति देने में सकारात्मक योगदान के लिए मैं सभी सांसदों का आभार व्यक्त करता हूं। परिणामस्वरूप, 'सुधार एक्सप्रेस' रफ्तार पकड़ रही है।

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प्रधानमंत्री मोदी

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