काटेवाड़ी स्थित विद्या प्रतिष्ठान मैदान में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार

बारामती के काटेवाड़ी क्षेत्र में स्थित विद्या प्रतिष्ठान मैदान गुरुवार को गहरे शोक और भावनाओं का साक्षी बना, जब महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार को अंतिम विदाई दी गई। पूरे राजकीय सम्मान के साथ हुए अंतिम संस्कार में हर आंख नम थी और हर चेहरा अपने प्रिय नेता को खोने के दुख में डूबा हुआ नजर आया। पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार अंतिम संस्कार संपन्न हुआ, जिसमें उनके दोनों बेटों पार्थ पवार और जय पवार ने मुखाग्नि दी।

परिवार और करीबियों की मौजूदगी में भावुक क्षण

अंतिम संस्कार के दौरान अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार, दोनों बेटे पार्थ और जय, उनके चाचा शरद पवार और शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले मौजूद रहीं। परिवार के सदस्यों के लिए यह क्षण अत्यंत पीड़ादायक था। मैदान में मौजूद हर व्यक्ति इस भावुक दृश्य से व्यथित दिखा। लंबे समय तक लोगों की नजरें अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पर टिकी रहीं और वातावरण पूरी तरह शोक में डूबा रहा।


राजनीतिक सीमाओं से ऊपर दिखी श्रद्धांजलि

अजित पवार को श्रद्धांजलि देने के लिए देश और राज्य की राजनीति से जुड़ी कई बड़ी हस्तियां बारामती पहुंचीं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत, महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे, आंध्र प्रदेश के मंत्री नारा लोकेश और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे की मौजूदगी ने यह संदेश दिया कि अजित पवार का कद केवल एक दल तक सीमित नहीं था। अलग-अलग विचारधाराओं के नेताओं ने एक स्वर में उन्हें जननेता बताते हुए अपनी संवेदना व्यक्त की।


अंतिम यात्रा में उमड़ा हजारों लोगों का हुजूम

अजित पवार की अंतिम यात्रा में हजारों की संख्या में आम नागरिक, समर्थक और कार्यकर्ता शामिल हुए। बारामती की सड़कों पर जनसैलाब उमड़ पड़ा। लोगों के हाथों में फूल थे, आंखों में आंसू थे और जुबां पर अपने नेता के लिए सम्मान के शब्द थे। “अजितदादा अमर रहें” जैसे नारों के बीच अंतिम यात्रा आगे बढ़ी। यह दृश्य इस बात का प्रमाण था कि अजित पवार जनता के दिलों में कितनी गहरी जगह बनाए हुए थे।


विमान हादसे ने छीना सक्रिय नेता को

अजित पवार का निधन बुधवार सुबह हुए एक दर्दनाक विमान हादसे में हुआ। उनका चार्टर्ड विमान सुबह करीब 8 बजकर 45 मिनट पर बारामती एयरपोर्ट पर लैंडिंग के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस हादसे में विमान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। दुर्घटना में अजित पवार समेत कुल पांच लोगों की मौत हो गई, जिनमें उनके सुरक्षाकर्मी, दो पायलट और एक महिला क्रू सदस्य शामिल थे। यह खबर फैलते ही पूरे राज्य में शोक की लहर दौड़ गई थी।


चुनावी व्यस्तताओं के बीच हुआ असमय निधन

66 वर्षीय अजित पवार पूरी तरह सक्रिय राजनीति में थे और आने वाले दिनों के लिए उनके कई कार्यक्रम तय थे। जानकारी के अनुसार वे 5 फरवरी को पुणे में होने वाले जिला परिषद चुनावों के लिए चार चुनावी रैलियों को संबोधित करने वाले थे। उनके अचानक चले जाने से न केवल चुनावी समीकरण प्रभावित हुए हैं, बल्कि राज्य की राजनीति को भी गहरा आघात पहुंचा है। उनके समर्थकों और सहयोगियों के लिए यह विश्वास करना कठिन हो रहा है कि वे अब उनके बीच नहीं रहे।


महाराष्ट्र में तीन दिन का राजकीय शोक

अजित पवार के निधन पर महाराष्ट्र सरकार ने तीन दिन के राजकीय शोक की घोषणा की है। इस अवधि में राज्य भर में सरकारी भवनों पर झंडे आधे झुके रहेंगे और किसी भी प्रकार के सरकारी मनोरंजन कार्यक्रम आयोजित नहीं किए जाएंगे। सरकार की ओर से हादसे की जांच के संकेत भी दिए गए हैं, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि यह दुर्घटना किन कारणों से हुई।


जननेता के रूप में याद किए जाएंगे अजित पवार

अजित पवार को एक ऐसे नेता के रूप में याद किया जाएगा, जो सीधे जनता से जुड़कर उनकी समस्याओं को समझते थे। बारामती और आसपास के क्षेत्रों में उनका विशेष प्रभाव था और विकास कार्यों को लेकर वे हमेशा मुखर रहते थे। उनके जाने से जो खालीपन पैदा हुआ है, वह लंबे समय तक महसूस किया जाएगा। अंतिम संस्कार के दौरान उमड़ी भीड़ और लोगों की आंखों में दिखा दर्द इस बात का प्रमाण है कि अजित पवार केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि लाखों लोगों की उम्मीद और भरोसे का नाम थे।

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