आज का दौर पूरी तरह डिजिटल हो चुका है। बैंकिंग, खरीदारी, पढ़ाई और सरकारी काम, सब कुछ इंटरनेट के जरिए किया जा रहा है। ऐसे में साइबर अपराधियों ने भी धोखाधड़ी के नए-नए तरीके निकाल लिए हैं। इन्हीं खतरनाक तरीकों में से एक है डीएनएस स्पूफिंग, जो देखने में सरल लेकिन असर में बेहद गंभीर साइबर हमला माना जाता है।
अधिकतर लोग इंटरनेट पर वेबसाइट खोलते समय केवल नाम देखते हैं और भरोसा कर लेते हैं। लेकिन डीएनएस स्पूफिंग इसी भरोसे का फायदा उठाती है। इसमें व्यक्ति को पता भी नहीं चलता और वह असली वेबसाइट की जगह नकली वेबसाइट पर पहुंच जाता है। यहीं से धोखाधड़ी की शुरुआत होती है।
डीएनएस स्पूफिंग का मतलब आसान भाषा में
जब आप इंटरनेट पर किसी वेबसाइट का नाम लिखते हैं, तो इंटरनेट आपको उस वेबसाइट के सही पते तक पहुंचाने का काम करता है। इस पूरे सिस्टम को डीएनएस कहा जाता है, जो वेबसाइट के नाम और उसके असली पते के बीच पुल का काम करता है। आमतौर पर यह प्रक्रिया सुरक्षित और भरोसेमंद होती है, इसलिए लोग इस पर सवाल नहीं उठाते।
लेकिन डीएनएस स्पूफिंग में साइबर अपराधी इसी रास्ते में छेड़छाड़ कर देते हैं। इसका नतीजा यह होता है कि आपने जिस वेबसाइट को खोलने की कोशिश की, उसकी जगह आप एक नकली वेबसाइट पर पहुंच जाते हैं। यह नकली वेबसाइट देखने में बिल्कुल असली जैसी होती है, इसलिए व्यक्ति को धोखे का एहसास तक नहीं होता। वहां डाली गई सारी जानकारी सीधे साइबर अपराधियों तक पहुंच जाती है।
डीएनएस स्पूफिंग कैसे काम करती है
डीएनएस स्पूफिंग एक तकनीकी साइबर हमला है, लेकिन इसका शिकार आम लोग बहुत आसानी से बन जाते हैं। साइबर अपराधी इंटरनेट के उस तंत्र को निशाना बनाते हैं, जो वेबसाइट और उपयोगकर्ता के बीच सही संपर्क स्थापित करता है। जब इस तंत्र में गड़बड़ी की जाती है, तो उपयोगकर्ता को बिना बताए गलत दिशा में भेज दिया जाता है।
इस दौरान उपयोगकर्ता को यही लगता है कि वह किसी भरोसेमंद और सुरक्षित वेबसाइट पर मौजूद है। लेकिन असल में वह एक ऐसे जाल में फंस चुका होता है, जहां उसकी निजी और संवेदनशील जानकारी चुपचाप चोरी की जा रही होती है। यही वजह है कि डीएनएस स्पूफिंग को साइलेंट साइबर धोखाधड़ी भी कहा जाता है।
डीएनएस स्पूफिंग से क्या-क्या नुकसान हो सकता है
डीएनएस स्पूफिंग का असर केवल एक वेबसाइट तक सीमित नहीं रहता। इसके जरिए व्यक्ति की कई तरह की अहम जानकारियां खतरे में पड़ सकती हैं। बैंक खाते से जुड़ी जानकारी, पासवर्ड, पहचान से जुड़े दस्तावेज और निजी बातचीत तक साइबर अपराधियों के हाथ लग सकती है।
कई मामलों में लोगों को तब पता चलता है कि वे ठगी का शिकार हुए हैं, जब उनके बैंक खाते से पैसे निकल चुके होते हैं या उनकी पहचान का गलत इस्तेमाल हो चुका होता है। यह धोखाधड़ी धीरे-धीरे और बिना शोर के नुकसान पहुंचाती है, इसलिए इसे बेहद खतरनाक माना जाता है।
आम लोग कैसे बनते हैं इसका शिकार
अधिकतर लोग इंटरनेट का इस्तेमाल करते समय ज्यादा सतर्क नहीं रहते। सार्वजनिक इंटरनेट, फ्री वाईफाई या बिना जांचे-परखे लिंक खोलना आम बात बन चुकी है। यही छोटी-छोटी लापरवाहियां साइबर अपराधियों को बड़ा मौका दे देती हैं।
ईमेल, संदेश या ऑनलाइन विज्ञापनों में दिए गए लिंक पर क्लिक करना भी जोखिम बढ़ा देता है। कई बार लोग जल्दबाजी में जानकारी भर देते हैं, जो बाद में बड़े आर्थिक और मानसिक नुकसान का कारण बनती है।
डीएनएस स्पूफिंग के संकेत क्या हो सकते हैं
अगर किसी वेबसाइट का पता सामान्य से थोड़ा अलग दिखाई दे, पेज बार-बार रुक जाए या बिना वजह बार-बार निजी जानकारी मांगी जाए, तो सतर्क हो जाना चाहिए। कई बार वेबसाइट का नाम और डिज़ाइन बिल्कुल सही लगता है, लेकिन अंदर का सिस्टम पूरी तरह नकली होता है।
ऐसे संकेतों को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। समय रहते शक करना और जांच करना ही नुकसान से बचने का सबसे सही तरीका है।
डीएनएस स्पूफिंग से कैसे बचा जा सकता है
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- वेबसाइट का पता ध्यान से जांचें – जानकारी डालने से पहले सुनिश्चित करें कि वेबसाइट असली है और नाम में कोई बदलाव नहीं है।
- सार्वजनिक इंटरनेट पर संवेदनशील काम न करें – खुले या मुफ्त इंटरनेट पर बैंकिंग और निजी जानकारी से जुड़ा कार्य करने से बचें।
- अनजान लिंक से दूरी बनाएं – ईमेल, संदेश या विज्ञापन में आए संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें।
- पासवर्ड समय-समय पर बदलें – नियमित रूप से पासवर्ड बदलने से खाते सुरक्षित रहते हैं।
- जल्दबाजी में कोई जानकारी साझा न करें – इंटरनेट पर जल्दबाजी अक्सर धोखाधड़ी का कारण बनती है, इसलिए हर कदम सोच-समझकर उठाएं।
क्यों जरूरी है इस विषय को जानना
डीएनएस स्पूफिंग कोई काल्पनिक या दुर्लभ घटना नहीं है, बल्कि यह आज के समय में रोज होने वाली सच्ची साइबर धोखाधड़ी का हिस्सा बन चुकी है। इसके बारे में जानकारी होना इसलिए जरूरी है ताकि लोग समय रहते सतर्क हो सकें।
जब आप इस खतरे को समझ लेते हैं, तो न केवल खुद को सुरक्षित रख पाते हैं, बल्कि अपने परिवार और आसपास के लोगों को भी ऐसी धोखाधड़ी से बचा सकते हैं।
निष्कर्ष
डीएनएस स्पूफिंग आज के डिजिटल दौर की एक गंभीर और छुपी हुई साइबर धोखाधड़ी है, जो बिना शोर किए बड़ा नुकसान पहुंचा सकती है। सही जानकारी, सतर्कता और जिम्मेदार इंटरनेट व्यवहार ही इससे बचाव का सबसे मजबूत रास्ता है। इंटरनेट जितना सुविधाजनक है, उतनी ही समझदारी और सावधानी की भी मांग करता है।
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