राज्य के नाम परिवर्तन को लेकर बढ़ी राजनीतिक बहस, निवासियों के संबोधन पर भी चर्चा तेज

नई दिल्ली, 24 फ़रवरी (हि.स.)। केंद्र सरकार द्वारा केरल का नाम बदलकर केरलम् करने के प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक हलकों में तीखी बहस शुरू हो गई है। इस मुद्दे पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सार्वजनिक रूप से सवाल उठाते हुए कहा कि नाम परिवर्तन के बाद राज्य के निवासियों को किस नाम से पुकारा जाएगा, यह एक भाषाई उलझन पैदा करेगा। वहीं, भाजपा के वरिष्ठ नेता और राज्य इकाई के अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने इस कदम का समर्थन करते हुए कहा कि केरलम् नाम राज्य की सांस्कृतिक अस्मिता और ऐतिहासिक विरासत के अनुरूप है।

थरूर ने उठाया भाषाई और व्यावहारिक प्रश्न

शशि थरूर ने सामाजिक माध्यम मंच पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि नाम परिवर्तन भले ही सांस्कृतिक दृष्टि से उचित बताया जा रहा हो, लेकिन अंग्रेजी भाषा में राज्य के निवासियों के संबोधन को लेकर समस्या उत्पन्न होगी। उन्होंने कहा कि अभी तक केरल के लोगों को अंग्रेजी में केरलाइट या केरलन कहा जाता था, जो स्वाभाविक और स्वीकार्य शब्द बन चुके थे।

उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि यदि राज्य का नाम केरलम् कर दिया जाता है, तो क्या लोगों को केरलामाइट कहा जाएगा, जो किसी जीवाणु जैसा प्रतीत होता है, या फिर केरलमियन, जो किसी दुर्लभ खनिज जैसा लगेगा। थरूर ने सुझाव दिया कि यदि नाम परिवर्तन पर अंतिम निर्णय हो चुका है, तो मुख्यमंत्री को चाहिए कि वे इस विषय पर एक सार्वजनिक प्रतियोगिता आयोजित करें, ताकि निवासियों के लिए उपयुक्त और व्यावहारिक संबोधन तय किया जा सके।

थरूर की टिप्पणी ने इस बहस को केवल राजनीतिक ही नहीं, बल्कि भाषाई और सामाजिक आयाम भी दे दिया है। कई लोग इसे व्यावहारिक दृष्टिकोण से उठाया गया प्रश्न मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे नाम परिवर्तन के विरोध के रूप में देख रहे हैं।

भाजपा ने बताया सांस्कृतिक स्वाभिमान का प्रश्न

दूसरी ओर, राजीव चंद्रशेखर ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि केरलम् नाम राज्य की मूल भाषाई और सांस्कृतिक पहचान को प्रतिबिंबित करता है। उनका कहना था कि जब राज्य की आधिकारिक भाषा में उसका नाम केरलम् है, तो उसी स्वरूप को मान्यता देना स्वाभाविक और उचित कदम है।

उन्होंने कहा कि यह परिवर्तन केवल नाम का नहीं, बल्कि सोच और दृष्टिकोण का भी प्रतीक है। भाजपा और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन राज्य में अधूरे विकास कार्यों को पूरा करने और नई आर्थिक दिशा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका दावा था कि हर मलयाली अब बदलाव चाहता है और प्रदर्शन आधारित राजनीति की ओर बढ़ना चाहता है।

राजीव चंद्रशेखर ने यह भी कहा कि राज्य की गौरवशाली विरासत, इतिहास, संस्कृति और परंपराओं की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है। केरलम् नाम उसी दिशा में एक प्रतीकात्मक लेकिन महत्वपूर्ण कदम है, जो राज्य को अपनी जड़ों से जोड़े रखते हुए आधुनिक विकास की ओर अग्रसर करेगा।

नाम परिवर्तन की पृष्ठभूमि और व्यापक प्रभाव

राज्यों के नामों में परिवर्तन का विषय भारत में नया नहीं है। समय-समय पर विभिन्न राज्यों और शहरों के नाम उनकी स्थानीय भाषा और सांस्कृतिक पहचान के अनुरूप बदले गए हैं। ऐसे निर्णयों के पीछे अक्सर ऐतिहासिक संदर्भ, भाषाई शुद्धता और स्थानीय भावनाओं को सम्मान देने का तर्क दिया जाता है।

केरल का नाम केरलम् करने का प्रस्ताव भी इसी क्रम में देखा जा रहा है। समर्थकों का कहना है कि यह नाम राज्य की मूल मलयालम भाषा के अधिक निकट है और इससे स्थानीय पहचान को मजबूती मिलेगी। वहीं आलोचकों का मत है कि नाम परिवर्तन से व्यावहारिक और प्रशासनिक स्तर पर कुछ जटिलताएं उत्पन्न हो सकती हैं, विशेषकर अंतरराष्ट्रीय मंचों और अंग्रेजी संचार के संदर्भ में।

राजनीतिक निहितार्थ भी अहम

इस मुद्दे ने राज्य की राजनीति में भी हलचल पैदा कर दी है। कांग्रेस और भाजपा के बीच पहले से जारी वैचारिक टकराव को इस विषय ने नई दिशा दे दी है। एक ओर कांग्रेस इसे अनावश्यक बदलाव और ध्यान भटकाने वाला मुद्दा बता रही है, तो दूसरी ओर भाजपा इसे सांस्कृतिक पुनर्स्थापन और विकास की नई शुरुआत के रूप में प्रस्तुत कर रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि नाम परिवर्तन का वास्तविक प्रभाव केवल प्रशासनिक दस्तावेजों या आधिकारिक पत्राचार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह राज्य की पहचान, ब्रांडिंग और वैश्विक छवि से भी जुड़ा विषय है। पर्यटन, निवेश और सांस्कृतिक प्रचार-प्रसार पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।

इस प्रकार केरल का नाम केरलम् करने के प्रस्ताव ने केवल एक भाषाई बदलाव का प्रश्न नहीं उठाया है, बल्कि यह पहचान, राजनीति, संस्कृति और व्यवहारिकता के जटिल प्रश्नों को भी सामने ले आया है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि केंद्र और राज्य स्तर पर इस विषय पर क्या अंतिम निर्णय लिया जाता है और विभिन्न पक्षों की चिंताओं का किस प्रकार समाधान किया जाता है।

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