भोपाल। राज्यपाल मंगु भाई पटेल ने कहा है कि “मुख्यमंत्री दुधारू पशुप्रदाय योजना” प्रदेश के सबसे गरीब और पिछड़े जनजातीय समुदायों के जीवन में स्थायी बदलाव लाने का माध्यम बन सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि योजना की रूपरेखा और क्रियान्वयन में गरीब हितग्राहियों के अधिकार सर्वोपरि रहने चाहिए और किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
लोक भवन में आयोजित बैठक में पशुपालन एवं दुग्ध विकास विभाग द्वारा संचालित योजना की समीक्षा की गई। बैठक का आयोजन जनजातीय प्रकोष्ठ ने किया था। इस दौरान पशुपालन एवं दुग्ध विकास राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) लखन पटेल, जनजातीय प्रकोष्ठ के अध्यक्ष दीपक खांडेकर, राज्यपाल के प्रधान सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, विभाग के प्रधान सचिव उमाकांत उमराव सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।
राज्यपाल ने बताया कि यह योजना विशेष रूप से बैगा, भारिया और सहरिया जैसी विशेष पिछड़ी जनजातियों (पीवीटीजी) के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए लागू की गई है। उन्होंने निर्देश दिए कि जनजातीय बहुल सभी जिलों को योजना के दायरे में शामिल किया जाए। साथ ही पारदर्शिता, संवेदनशीलता और त्वरित कार्यवाही सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
दाम में वृद्धि, 10-10 दिन के अंतराल में भुगतान
बैठक में बताया गया कि पशु वितरण की सामुदायिक निगरानी का प्रावधान किया गया है। दुग्ध समितियों और संघों ने महीने में तीन तय तिथियों पर, 10-10 दिन के अंतराल से भुगतान व्यवस्था सुनिश्चित की है। दूध के दाम में भी वृद्धि कर इसे 2 रुपये से बढ़ाकर 8.50 रुपये प्रति यूनिट कर दिया गया है।
लाभार्थियों के चयन में दुग्ध मार्ग और परिवहन सुविधा वाले गांवों को प्राथमिकता दी जा रही है, हालांकि आवश्यकता अनुसार अन्य गांवों को भी जोड़ा जाएगा। चयनित हितग्राहियों को पशु वितरण से पहले तीन दिवसीय प्रशिक्षण दिया जाता है। वितरण के 21 दिन, तीन माह और छह माह बाद क्रमशः समीक्षा की जाएगी। अंशदान जमा करने के बाद पहले एक पशु दिया जाएगा और उसके संतोषजनक रखरखाव पर तीन माह पश्चात दूसरा पशु प्रदान करने की व्यवस्था की गई है।
राज्यपाल ने कहा कि यह योजना तभी सफल मानी जाएगी जब इसका लाभ वास्तविक जरूरतमंद परिवारों तक पूरी पारदर्शिता के साथ पहुंचे और उनके जीवन स्तर में ठोस सुधार दिखाई दे।
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