सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह दिखाई देगा ज्यादा बड़ा और बेहद चमकदार, खगोल प्रेमियों के लिए सुनहरा अवसर

भोपाल। खगोल विज्ञान में रुचि रखने वाले लोगों के लिए शनिवार, 10 जनवरी का दिन बेहद खास और यादगार बनने जा रहा है। इस दिन आकाश में एक महत्वपूर्ण खगोलीय घटना घटित होगी, जब सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह बृहस्पति, हमारा ग्रह पृथ्वी और सूर्य एक ही सरल रेखा में आ जाएंगे। इस खगोलीय स्थिति को खगोल विज्ञान की भाषा में ‘विपरीत स्थिति’ कहा जाता है, जिसमें पृथ्वी और बृहस्पति एक-दूसरे के आमने-सामने होते हैं और सूर्य उनके बीच से हट जाता है। इस कारण बृहस्पति पृथ्वी के सबसे नजदीक पहुंच जाता है और सामान्य दिनों की तुलना में अधिक चमकदार तथा आकार में कुछ बड़ा दिखाई देता है।

मध्यप्रदेश की नेशनल अवॉर्ड प्राप्त विज्ञान प्रसारक सारिका घारू ने शुक्रवार को इस खगोलीय घटना की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि शनिवार दोपहर ठीक 2 बजकर 4 मिनट पर पृथ्वी, बृहस्पति और सूर्य एक सीध में होंगे। इस समय बृहस्पति की पृथ्वी से दूरी लगभग 63 करोड़ 30 लाख 76 हजार किलोमीटर रह जाएगी, जो इसकी न्यूनतम दूरी मानी जाती है। दूरी कम होने के कारण बृहस्पति का प्रकाश अधिक तीव्र दिखाई देगा और यह आकाश में सबसे चमकीले पिंडों में से एक के रूप में नजर आएगा।

सारिका घारू ने बताया कि इस विशेष खगोलीय स्थिति के कारण गुरुदर्शन का यह सबसे उपयुक्त समय है। सामान्य रूप से बृहस्पति आकाश में चमकता हुआ दिखाई देता है, लेकिन इस दिन इसकी चमक और स्पष्टता कहीं अधिक होगी। उन्होंने बताया कि शाम ढलते ही पूर्व दिशा में बृहस्पति को बिना किसी दूरबीन के भी आसानी से देखा जा सकता है। यह ग्रह एक तेज, स्थिर और सफेद चमक वाले तारे की तरह दिखाई देगा, जो टिमटिमाता नहीं है।

यदि किसी के पास दूरबीन या टेलिस्कोप उपलब्ध है, तो यह अवसर और भी रोमांचक हो जाएगा। टेलिस्कोप से देखने पर बृहस्पति की सतह पर मौजूद गहरी और हल्की रंग की पट्टिकाएं स्पष्ट रूप से दिखाई देंगी। इसके साथ ही इसके चार प्रसिद्ध गैलीलियन चंद्रमा—आयो, यूरोपा, गेनीमीड और कैलिस्टो—भी एक सीध में चमकते हुए नजर आएंगे। इस समय बृहस्पति की चमक माइनस 2.68 मैग्नीट्यूड के स्तर पर होगी, जो इसे रात के आकाश में चंद्रमा और शुक्र के बाद सबसे चमकीले पिंडों में शामिल कर देती है।

सारिका ने आगे बताया कि इस समय बृहस्पति आकाश में मिथुन तारामंडल में स्थित है। यह ग्रह शाम को उदित होने के बाद पूरी रात आकाश में दिखाई देगा और मध्यरात्रि के समय लगभग सिर के ठीक ऊपर होगा। सुबह होते-होते यह पश्चिम दिशा में अस्त हो जाएगा। खगोल प्रेमियों और विद्यार्थियों के लिए यह दुर्लभ अवसर है, जब वे पूरी रात बृहस्पति की गति और स्थिति का अवलोकन कर सकते हैं।

बृहस्पति को भारतीय खगोल परंपरा में गुरु भी कहा जाता है और इसे ज्ञान, विस्तार और विशालता का प्रतीक माना जाता है। वैज्ञानिक दृष्टि से भी यह ग्रह अपने आकार और संरचना के कारण अत्यंत महत्वपूर्ण है। बृहस्पति पृथ्वी से लगभग 11 गुना चौड़ा है। यदि पृथ्वी को अंगूर के आकार का माना जाए, तो बृहस्पति का आकार एक बड़े बास्केटबॉल के समान होगा। इसका विशाल गुरुत्वाकर्षण सौरमंडल के अन्य पिंडों को भी प्रभावित करता है और कई बार पृथ्वी की रक्षा में भी भूमिका निभाता है।

सूर्य से बृहस्पति की दूरी इतनी अधिक है कि सूर्य का प्रकाश वहां तक पहुंचने में लगभग 43 मिनट का समय लेता है। यही कारण है कि वहां का वातावरण अत्यंत ठंडा और गैसीय है। अब तक बृहस्पति के 95 चंद्रमा खोजे जा चुके हैं, जो इसे सौरमंडल का सबसे अधिक उपग्रहों वाला ग्रह बनाते हैं। इसके कई चंद्रमा वैज्ञानिकों के लिए विशेष रुचि का विषय हैं, क्योंकि उनमें जीवन की संभावनाओं को लेकर शोध किए जा रहे हैं।

खगोल विज्ञान से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की खगोलीय घटनाएं न केवल वैज्ञानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होती हैं, बल्कि आम लोगों में ब्रह्मांड के प्रति जिज्ञासा और समझ भी बढ़ाती हैं। शनिवार का दिन विशेष रूप से विद्यार्थियों, शिक्षकों और खगोल प्रेमियों के लिए एक सुनहरा अवसर है, जिसे चूकना नहीं चाहिए। साफ आकाश होने पर यह दृश्य और भी मनमोहक दिखाई देगा।

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