जागरूकता: यूपी पुलिस की फिल्म वायरल, नाना पाटेकर ने निभाई अहम भूमिका

विशेष संवाददाता, कानपुर

साइबर अपराधों के बढ़ते मामलों के बीच कानपुर के एक आम नागरिक की सूझ-बूझ अब पूरे प्रदेश के लिए मिसाल बन गई है। ठगी का शिकार होने से बचते हुए साइबर ठग को ही उसके जाल में फंसाने वाले भूपेंद्र सिंह की सच्ची कहानी को उत्तर प्रदेश पुलिस ने शॉर्ट फिल्म के रूप में प्रस्तुत किया है, जो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। यह फिल्म न केवल मनोरंजक है, बल्कि आम लोगों को साइबर ठगी से बचाव का सशक्त संदेश भी देती है।

कानपुर के बर्रा क्षेत्र स्थित विश्वबैंक कॉलोनी निवासी भूपेंद्र सिंह के पास कुछ समय पहले एक फोन कॉल आया। कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच का इंस्पेक्टर बताते हुए गंभीर लहजे में बात शुरू की। उसने भूपेंद्र को डराने के लिए कहा कि उनके बैंक खाते का इस्तेमाल अवैध गतिविधियों में हुआ है और उनके खिलाफ फर्जी प्राथमिकी दर्ज है। गिरफ्तारी से बचने का रास्ता बताते हुए ठग ने 15 लाख रुपये की मांग रख दी।

भूपेंद्र सिंह को कॉल करने वाले की भाषा, अनावश्यक दबाव और प्रक्रिया पर तुरंत संदेह हुआ। घबराने के बजाय उन्होंने संयम से काम लिया और बातचीत को अपने पक्ष में मोड़ दिया। उन्होंने खुद को 16 वर्षीय किशोर बताते हुए कहा कि उनके पास इतनी बड़ी रकम नहीं है। साथ ही यह कहानी गढ़ी कि यदि ठग 10 हजार रुपये भेज दे तो वे अपनी मां की गिरवी रखी सोने की चेन बेचकर पैसा चुका सकते हैं।

लालच में आकर साइबर ठग खुद ही फंस गया और उसने वास्तव में भूपेंद्र के खाते में 10 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद भूपेंद्र ने कॉल काट दी और पूरे मामले की जानकारी तत्काल पुलिस को दे दी। हैरानी की बात यह रही कि इसके बाद कई दिनों तक वही ठग भूपेंद्र को फोन करता रहा और अपने पैसे वापस मांगता रहा, लेकिन तब तक वह कानून के शिकंजे में आ चुका था।

भूपेंद्र सिंह का हुआ सम्मान

इस साहसिक और समझदारी भरे कदम की पुलिस विभाग ने खुले मंच से सराहना की। कानपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान तत्कालीन डीजीपी प्रशांत कुमार ने भूपेंद्र सिंह को सम्मानित किया। उन्होंने इसे साइबर अपराधों के खिलाफ जन-जागरूकता का उत्कृष्ट उदाहरण बताते हुए कहा कि यदि आम नागरिक डरने के बजाय समझदारी से काम लें, तो ठगों की साजिश नाकाम की जा सकती है।

डरने की बजाय संयम से लें काम

इसी सच्ची घटना से प्रेरित होकर उत्तर प्रदेश पुलिस ने 5 मिनट 26 सेकेंड की एक प्रभावशाली शॉर्ट फिल्म तैयार करवाई है। इस फिल्म में प्रसिद्ध अभिनेता नाना पाटेकर ने एक रिटायर्ड रेलवे गार्ड की भूमिका निभाई है। कहानी के माध्यम से दिखाया गया है कि कैसे एक सामान्य व्यक्ति सूझ-बूझ, धैर्य और सही निर्णय लेकर साइबर ठग को ही मात दे देता है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह फिल्म डिजिटल अरेस्ट, फर्जी कॉल, बैंक खाते से जुड़ी धमकियों और ऑनलाइन ठगी जैसे मामलों को पहचानने में आम लोगों की मदद करेगी। साथ ही यह स्पष्ट संदेश भी देती है कि किसी भी संदिग्ध कॉल से घबराने के बजाय उसकी सत्यता की जांच करना, अपने स्तर पर कोई भी आर्थिक लेन-देन न करना और तुरंत पुलिस को सूचना देना ही सबसे सुरक्षित और सही कदम है।

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