व्यापार समझौते, श्रम संहिताओं और अन्य मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे संगठन
भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते और नई श्रम संहिताओं को लेकर उपजा विवाद अब सड़कों पर दिखाई देने लगा है। विपक्षी दलों, केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और विभिन्न किसान संगठनों की ओर से बुलाए गए भारत बंद का असर गुरुवार को देश के कई हिस्सों में देखने को मिला। कई स्थानों पर यातायात प्रभावित रहा, बाजार आंशिक रूप से बंद रहे और सरकारी सेवाओं पर भी असर पड़ने की खबरें सामने आईं।
प्रदर्शनकारियों का आरोप
प्रदर्शन में शामिल संगठनों का कहना है कि प्रस्तावित व्यापार व्यवस्था भारतीय कृषि और स्थानीय कारोबार के हितों के खिलाफ है। उनका आरोप है कि यदि इसे इसी रूप में आगे बढ़ाया गया तो किसानों, मजदूरों और छोटे व्यापारियों पर व्यापक प्रभाव पड़ेगा। इसी आशंका को लेकर वे देशव्यापी बंद के माध्यम से अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं।
कई मांगों को लेकर एकजुटता
बंद का आह्वान करने वाले संगठनों की ओर से श्रम संहिताओं, बिजली विधेयक-2025, बीज विधेयक, पुरानी पेंशन व्यवस्था की बहाली, न्यूनतम वेतन और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की वापसी सहित कई मुद्दों को उठाया गया है। उनका कहना है कि सरकार को इन विषयों पर व्यापक चर्चा करनी चाहिए और बिना सहमति आगे नहीं बढ़ना चाहिए।
सेवाओं पर संभावित असर
इस हड़ताल का असर सबसे ज्यादा बैंकिंग, परिवहन और सरकारी कामकाज पर पड़ने की आशंका जताई गई। राजधानी में कई व्यापारिक संगठनों ने भी किसानों के समर्थन में बाजार बंद रखने की घोषणा की। इससे आम जनजीवन पर मिला-जुला प्रभाव दिखाई दिया, कहीं सामान्य स्थिति रही तो कहीं आवाजाही बाधित हुई।
संसद परिसर में विपक्ष का प्रदर्शन
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और अन्य दलों के सांसदों ने संसद भवन के मकर द्वार पर विरोध प्रदर्शन किया। नेताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की नीतियां किसानों के भविष्य को जोखिम में डाल रही हैं। उन्होंने कहा कि वे किसानों के साथ मजबूती से खड़े हैं और किसी भी जनविरोधी प्रावधान का विरोध जारी रहेगा।
कुछ सांसदों ने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय दबाव में लिए जा रहे निर्णय देश के सम्मान के अनुरूप नहीं हैं। उनके अनुसार व्यापार समझौते जनता के हित में होने चाहिए, न कि किसी दबाव का परिणाम।
जंतर-मंतर पर सभा
नई दिल्ली के जंतर मंतर पर आयोजित जनसभा में विभिन्न संगठनों के नेता मौजूद रहे। ऑल इंडिया किसान यूनियन के महासचिव विजू कृष्णन और सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन्स के अध्यक्ष सुदीप दत्ता सहित कई वक्ताओं ने आंदोलन को व्यापक समर्थन देने की अपील की। सभा में वक्ताओं ने कहा कि किसानों और मजदूरों की मांगों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
राज्यों से भी प्रभाव की खबरें
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के अनुसार त्रिपुरा में कई जगह रेल और सड़क यातायात प्रभावित हुआ है। बड़ी संख्या में दुकानें और प्रतिष्ठान बंद रहे। हड़ताली कार्यकर्ता सड़कों पर उतरकर लोगों से बंद के समर्थन की अपील करते दिखाई दिए। इसी तरह छत्तीसगढ़ के कोरबा और तेलंगाना के सिंगारेनी क्षेत्र से भी कामकाज प्रभावित होने की सूचनाएं मिली हैं।
दिन भर चले इस बंद के दौरान कई स्थानों पर प्रशासन ने सतर्कता बरती। कहीं शांतिपूर्ण प्रदर्शन हुए तो कहीं जाम और नारेबाजी की स्थिति भी बनी। कुल मिलाकर देश के अलग-अलग हिस्सों में इसका प्रभाव अलग-अलग स्तर पर देखने को मिला।
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