संयुक्त वक्तव्य ही आधार, उसी दिशा में आगे बढ़ रही प्रक्रिया
विदेश मंत्रालय ने प्रस्तावित भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते पर सामने आए नए घटनाक्रम को लेकर स्थिति स्पष्ट की है। मंत्रालय का कहना है कि अमेरिकी पक्ष द्वारा जारी तथ्य पत्र में जो बदलाव दिखाई दे रहे हैं, वे दोनों देशों के बीच पहले से बनी ‘साझा समझ’ के अनुरूप हैं।
प्रवक्ता ने क्या कहा
साप्ताहिक पत्रकार वार्ता में मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि 7 फरवरी को जारी संयुक्त वक्तव्य ने पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यापार व्यवस्था के लिए जो ढांचा तय किया था, वही इस पूरी प्रक्रिया का आधार है। अब दोनों देश उसी ढांचे को लागू करने और अंतरिम समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में काम कर रहे हैं।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिकी तथ्य पत्र में हुए संशोधन किसी नई दिशा का संकेत नहीं हैं, बल्कि संयुक्त वक्तव्य में पहले से मौजूद सहमति को ही प्रतिबिंबित करते हैं।
Weekly Media Briefing by the Official Spokesperson (February 12, 2026)
— Randhir Jaiswal (@MEAIndia) February 12, 2026
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अमेरिकी दस्तावेज में प्रमुख बदलाव
व्हाइट हाउस द्वारा जारी पहले तथ्य पत्र में भारत को दालों के निर्यात से संबंधित एक बिंदु शामिल था। संशोधित संस्करण में इसे हटा दिया गया है। इसके अलावा 500 अरब डॉलर के माल आयात के संदर्भ में ‘प्रतिबद्धता’ शब्द को बदलकर ‘इरादा’ कर दिया गया है।
इन शब्दों के परिवर्तन को कूटनीतिक और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे भविष्य की व्याख्याओं और अपेक्षाओं पर असर पड़ सकता है।
दाल आयात का विषय क्यों अहम
भारत में दालों की खरीद और आयात घरेलू कृषि और उपभोक्ता हितों से जुड़ा विषय है। यही कारण है कि प्रारंभिक दस्तावेज में इस बिंदु के सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई थी। अब इस बिंदु के हटने को भारत की संवेदनशीलताओं को ध्यान में रखकर उठाया गया कदम माना जा रहा है।
संयुक्त वक्तव्य को बताया मार्गदर्शक
प्रवक्ता ने दोहराया कि 7 फरवरी का संयुक्त वक्तव्य ही मार्गदर्शक दस्तावेज है। किसी अन्य मसौदे या प्रारंभिक शब्दावली के आधार पर भ्रम पैदा करने की आवश्यकता नहीं है। बातचीत कई स्तरों पर चलती है और अंतिम सहमति तक पहुंचने से पहले इस प्रकार के बदलाव स्वाभाविक हैं।
विपक्ष की प्रतिक्रिया के बीच स्पष्टीकरण
अमेरिकी माल की बड़ी खरीद को लेकर ‘प्रतिबद्धता’ शब्द आने के बाद विपक्ष केंद्र सरकार की आलोचना कर रहा था। विदेश मंत्रालय का ताजा बयान इन आशंकाओं को शांत करने की दिशा में देखा जा रहा है। मंत्रालय ने संकेत दिया कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए ही आगे बढ़ रहा है।
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