बारामती में हुए भीषण विमान हादसे के कारणों का पता लगाने के लिए जांच एजेंसी ने संभाला मोर्चा
नई दिल्ली, 28 जनवरी (हि.स.)। महाराष्ट्र के बारामती में बुधवार सुबह हुए दर्दनाक विमान हादसे की जांच अब औपचारिक रूप से तेज हो गई है। इस दुर्घटना में उपमुख्यमंत्री अजित पवार सहित पांच लोगों की मौत के बाद देश की शीर्ष विमान दुर्घटना जांच एजेंसी विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो की टीम दिल्ली से बारामती के लिए रवाना हो चुकी है। जांच टीम मौके पर पहुंचकर चार्टर विमान के मलबे का गहन निरीक्षण करेगी और यह स्पष्ट करने का प्रयास करेगी कि क्रैश लैंडिंग किन तकनीकी या मानवीय कारणों से हुई।
दुर्घटनाग्रस्त विमान और उड़ान से जुड़ी प्रारंभिक जानकारी
प्राप्त विवरण के अनुसार, मेसर्स वीएसआर वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड का लियरजेट 45 विमान, जिसका पंजीकरण वीटी-एसएसके था, बारामती एयरपोर्ट पर लैंडिंग के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। विमान ने सुबह के समय निर्धारित उड़ान भरी थी और बारामती एयरपोर्ट पर उतरते वक्त हादसे का शिकार हो गया। शुरुआती तथ्यों में यह सामने आया है कि विमान उड़ा रहे पायलट ने किसी भी प्रकार का इमरजेंसी सिग्नल प्रसारित नहीं किया था, जो जांच के लिहाज से एक अहम बिंदु माना जा रहा है।
हालांकि यह भी सामने आया है कि दुर्घटना से ठीक पहले पायलट की एयर ट्रैफिक कंट्रोल से बातचीत हुई थी। इस संवाद के दौरान पायलट ने रनवे दिखाई देने की पुष्टि की थी, जिससे यह संकेत मिलता है कि लैंडिंग की प्रक्रिया सामान्य रूप से आगे बढ़ रही थी। इसके बावजूद कुछ ही क्षणों में हालात बिगड़ गए और विमान रनवे के पास ही क्रैश लैंड हो गया।
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गो-अराउंड के बाद बिगड़ी स्थिति, चश्मदीदों के बयान अहम
हादसे के चश्मदीदों के अनुसार, विमान ने लैंडिंग से पहले गो-अराउंड किया था। विमानन क्षेत्र में गो-अराउंड एक सामान्य प्रक्रिया मानी जाती है, जिसमें पायलट किसी कारणवश विमान को रनवे पर उतारने के बजाय दोबारा ऊपर ले जाता है और फिर सुरक्षित लैंडिंग की कोशिश करता है। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि गो-अराउंड के बाद नीचे आते समय विमान अस्थिर नजर आ रहा था। कुछ लोगों ने यह भी बताया कि विमान का संतुलन ठीक नहीं लग रहा था और कुछ ही सेकंड में वह रनवे के पास जमीन से टकरा गया।
टक्कर के तुरंत बाद विमान में आग लग गई, जिससे स्थिति और भयावह हो गई। आग की लपटों और धुएं ने बचाव कार्य में भी मुश्किलें पैदा कीं।
हादसे में जान गंवाने वालों में अजित पवार भी शामिल
इस दुर्घटना में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार समेत कुल पांच लोगों की मौत हो गई। हादसे की खबर मिलते ही पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई। राजनीतिक, सामाजिक और प्रशासनिक स्तर पर गहरा दुख व्यक्त किया गया। राज्य सरकार और केंद्र सरकार दोनों ने ही इस दुर्घटना को बेहद गंभीर मानते हुए त्वरित जांच के निर्देश दिए।
एएआईबी जांच का दायरा: तकनीक, मौसम और मानवीय पहलू
एएआईबी की टीम दुर्घटनास्थल पर पहुंचकर कई स्तरों पर जांच करेगी। इसमें विमान के फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर, कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर, इंजन के अवशेष, कंट्रोल सिस्टम और ईंधन से जुड़े हिस्सों की जांच शामिल है। इसके साथ ही उस समय की मौसम स्थिति, दृश्यता, रनवे की स्थिति और एयर ट्रैफिक कंट्रोल से हुए संवाद का भी विश्लेषण किया जाएगा।
जांच एजेंसी यह भी परखेगी कि गो-अराउंड के दौरान विमान के सिस्टम में कोई तकनीकी खराबी तो नहीं आई, या फिर मानवीय त्रुटि की कोई भूमिका रही। चूंकि पायलट द्वारा इमरजेंसी कॉल नहीं दी गई, इसलिए यह सवाल भी जांच के केंद्र में रहेगा कि हालात कितनी तेजी से बिगड़े और पायलट को प्रतिक्रिया का समय कितना मिला।
प्रशासन और नागरिक उड्डयन मंत्रालय की नजर
नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने एएआईबी को हर संभव संसाधन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं ताकि जांच निष्पक्ष, विस्तृत और समयबद्ध तरीके से पूरी हो सके। बारामती एयरपोर्ट पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और दुर्घटनास्थल को सील कर दिया गया है, ताकि सबूतों से कोई छेड़छाड़ न हो।
आगे क्या
एएआईबी की प्रारंभिक रिपोर्ट आने में कुछ समय लग सकता है, जबकि विस्तृत अंतिम रिपोर्ट में महीनों लगने की संभावना रहती है। इस रिपोर्ट के आधार पर भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए जरूरी सुधारात्मक कदम सुझाए जाएंगे। फिलहाल पूरा देश इस बात की प्रतीक्षा कर रहा है कि इस भीषण हादसे के पीछे की वास्तविक वजह क्या थी।
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