सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक सामग्री के बाद भड़का तनाव, बीरगंज और धनुषा में हालात काबू में करने के लिए पुलिस को करनी पड़ी सख्ती
काठमांडू। दक्षिणी नेपाल में भारत-नेपाल सीमा के नजदीक स्थित दो कस्बों में साम्प्रदायिक तनाव ने हिंसक रूप ले लिया। सोशल मीडिया पर प्रसारित आपत्तिजनक धार्मिक सामग्री के बाद पहले एक मस्जिद में तोड़फोड़ की घटना सामने आई और फिर उसके विरोध में हुए प्रदर्शन हिंसा में बदल गए। हालात इतने बिगड़ गए कि प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पथराव किया और थाने में घुसकर तोड़फोड़ की। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले दागने पड़े। इस हिंसा में सात पुलिसकर्मी घायल हुए हैं, जबकि कई सरकारी और निजी संपत्तियों को नुकसान पहुंचा है।
सोशल मीडिया से भड़की चिंगारी, जमीन पर दिखा उबाल
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, विवाद की जड़ सोशल मीडिया पर प्रसारित वह सामग्री है, जिसे स्थानीय प्रशासन ने धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला बताया है। धनुषा जिले में सामने आए एक वीडियो को लेकर पहले तनाव पैदा हुआ। पुलिस का कहना है कि दो युवकों ने एक सोशल मीडिया मंच पर हिंदू विरोधी सामग्री प्रसारित की थी। इसके बाद प्रतिक्रिया स्वरूप धनुषा जिले के कमला नगरपालिका क्षेत्र के सखुवा मारन इलाके में कुछ असामाजिक तत्वों ने मस्जिद में तोड़फोड़ कर दी। इस घटना ने पूरे इलाके में आक्रोश फैला दिया और देखते ही देखते हालात नियंत्रण से बाहर होने लगे।
बीरगंज में विरोध प्रदर्शन, पथराव और आगजनी
मस्जिद में तोड़फोड़ की खबर फैलते ही भारत के रक्सौल से सटे परसा जिले के बीरगंज कस्बे में शनिवार को विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। रविवार सुबह स्थिति और गंभीर हो गई, जब प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर टायर जलाकर आवागमन बाधित किया। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान कुछ उपद्रवी तत्वों ने पुलिसकर्मियों पर पत्थर फेंके और थाने में घुसकर तोड़फोड़ की। हालात बिगड़ते देख पुलिस को आंसू गैस का सहारा लेना पड़ा, ताकि भीड़ को तितर-बितर किया जा सके।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि हिंसा के दौरान सात पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। उन्हें स्थानीय अस्पतालों में उपचार दिया जा रहा है। प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर दिए हैं और लगातार गश्त की जा रही है, ताकि किसी भी तरह की नई घटना को रोका जा सके।
हिरासत में लिए गए आरोपी, जांच जारी
धनुषा पुलिस ने बताया कि टिकटॉक पर आपत्तिजनक वीडियो पोस्ट करने और मस्जिद में तोड़फोड़ की घटना में शामिल होने के आरोप में तीन लोगों को हिरासत में लिया गया है। उनसे पूछताछ की जा रही है और डिजिटल साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया के जरिए अफवाह फैलाने और धार्मिक भावनाओं को भड़काने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और किसी भी भ्रामक सूचना पर भरोसा न करने की अपील की है। साथ ही सोशल मीडिया पर निगरानी बढ़ा दी गई है, ताकि किसी भी तरह की भड़काऊ सामग्री को समय रहते हटाया जा सके।
सीमा से सटे इलाकों में बढ़ी चिंता
भारत-नेपाल सीमा से सटे क्षेत्रों में इस तरह की घटनाओं ने दोनों देशों के स्थानीय प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। बीरगंज जैसे सीमावर्ती कस्बे व्यापार और आवागमन के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण हैं। यहां किसी भी तरह का तनाव न केवल स्थानीय लोगों के जीवन को प्रभावित करता है, बल्कि सीमा पार आवाजाही और कारोबार पर भी असर डालता है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, हालात पर कड़ी नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त कदम उठाए जाएंगे।
जेन-जी आंदोलन की जांच और राजनीतिक हलचल
इसी बीच नेपाल की राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है। जेन-जी आंदोलन के दौरान 8 और 9 सितंबर 2025 को हुई गोलीबारी और अन्य घटनाओं की जांच कर रहे आयोग ने पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को बयान दर्ज कराने के लिए नोटिस जारी किया है। आयोग ने यह नोटिस ओली के गुंडु स्थित आवास पर तामील कराया है। उल्लेखनीय है कि ओली ने सार्वजनिक रूप से आयोग के समक्ष पेश न होने की बात कही थी, जिसके बाद यह नोटिस जारी किया गया।
जेन-जी आंदोलन के दौरान हुई हिंसक घटनाओं को लेकर पहले से ही देश में राजनीतिक बहस चल रही है। अब आयोग की ओर से पूर्व प्रधानमंत्री को नोटिस दिए जाने से यह मामला और संवेदनशील हो गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इससे नेपाल की आंतरिक राजनीति पर भी असर पड़ सकता है।
शांति बहाली की कोशिशें, प्रशासन सतर्क
नेपाल सरकार और स्थानीय प्रशासन दोनों ही स्तरों पर शांति बहाल करने के प्रयास किए जा रहे हैं। धार्मिक नेताओं और सामाजिक संगठनों से भी संवाद किया जा रहा है, ताकिा ताकि समुदायों के बीच भरोसा कायम किया जा सके। प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।
सुरक्षा एजेंसियां यह भी जांच कर रही हैं कि कहीं इस पूरे घटनाक्रम के पीछे संगठित साजिश तो नहीं है। सीमावर्ती क्षेत्रों में अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है और खुफिया तंत्र को भी सक्रिय किया गया है।
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