नगर परिषद चुनाव के बाद सियासी भूचाल, कांग्रेस ने दल-बदल को बताया असांविधानिक, पार्षदों को अयोग्य ठहराने की तैयारी

मुंबई। महाराष्ट्र के ठाणे जिले की अंबरनाथ नगर परिषद में चुनाव नतीजों के बाद शुरू हुआ राजनीतिक घमासान लगातार तेज होता जा रहा है। नगर परिषद में सत्ता गठन को लेकर पैदा हुए विवाद के बीच कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। पार्टी द्वारा निलंबित किए गए सभी 12 पार्षद अब औपचारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए हैं। इस घटनाक्रम ने स्थानीय राजनीति के साथ-साथ राज्य की सियासत में भी हलचल मचा दी है।

अंबरनाथ नगर परिषद में चुनाव परिणाम सामने आने के बाद कांग्रेस और राकांपा के गठबंधन को भाजपा ने सिरे से खारिज कर दिया था। इसके तुरंत बाद कांग्रेस नेतृत्व ने कड़ा रुख अपनाते हुए अपने 12 नव-निर्वाचित पार्षदों और ब्लॉक अध्यक्ष को पार्टी से निलंबित कर दिया। कांग्रेस का आरोप था कि इन नेताओं ने पार्टी लाइन से हटकर कदम उठाए और संगठनात्मक अनुशासन का उल्लंघन किया। हालांकि, इस कार्रवाई के बाद राजनीतिक घटनाक्रम ने नया मोड़ ले लिया और निलंबित पार्षदों ने कांग्रेस से नाता तोड़ते हुए भाजपा का दामन थाम लिया।

बुधवार देर रात महाराष्ट्र भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण ने इन सभी पार्षदों के भाजपा में शामिल होने की औपचारिक घोषणा की। इस मौके पर उन्होंने कहा कि भाजपा विकास, स्थिरता और पारदर्शी प्रशासन की राजनीति करती है और अंबरनाथ के पार्षदों ने इसी विचारधारा से प्रभावित होकर पार्टी में शामिल होने का निर्णय लिया है। भाजपा नेताओं ने इसे जनता के जनादेश का सम्मान बताते हुए कहा कि नगर परिषद में अब मजबूत और स्थिर नेतृत्व सुनिश्चित होगा।

दूसरी ओर, कांग्रेस ने इस पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से लेते हुए कानूनी कार्रवाई का संकेत दिया है। महाराष्ट्र कांग्रेस ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि वह अंबरनाथ के 12 पार्षदों को अयोग्य ठहराने के लिए विधिक प्रक्रिया शुरू करेगी। पार्टी का कहना है कि ये सभी पार्षद कांग्रेस के चुनाव चिन्ह पर चुने गए थे और बाद में दल-बदल कर भाजपा में शामिल हुए, जो संविधान और दल-बदल विरोधी कानून का सीधा उल्लंघन है।

कांग्रेस के प्रवक्ता सचिन सावंत ने कहा कि पार्षदों का यह कदम न केवल अवैध है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों के भी खिलाफ है। उन्होंने दावा किया कि चुनाव के समय जनता ने कांग्रेस के घोषणापत्र और चुनाव चिन्ह पर भरोसा जताया था, ऐसे में जीत के बाद पार्टी बदलना जनता के साथ विश्वासघात है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे को अदालत और चुनाव आयोग दोनों के समक्ष उठाएगी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अंबरनाथ नगर परिषद में हुआ यह घटनाक्रम महाराष्ट्र की शहरी राजनीति में बदलते समीकरणों का संकेत है। एक ओर भाजपा इसे अपनी बढ़ती राजनीतिक स्वीकार्यता के रूप में देख रही है, वहीं कांग्रेस इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था पर चोट बता रही है। आने वाले दिनों में यह मामला कानूनी मोर्चे पर और अधिक गरमाने की संभावना है, क्योंकि दल-बदल विरोधी कानून के तहत पार्षदों की सदस्यता पर संकट खड़ा हो सकता है।

अंबरनाथ नगर परिषद में सत्ता संतुलन बदलने से स्थानीय प्रशासन और विकास कार्यों पर भी असर पड़ने की चर्चा है। भाजपा का दावा है कि अब परिषद में स्थिर सरकार बनेगी और विकास कार्यों को गति मिलेगी, जबकि कांग्रेस का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया जनादेश के साथ खिलवाड़ है। कुल मिलाकर, अंबरनाथ की राजनीति फिलहाल राज्य की सियासत का केंद्र बनी हुई है और आगे के घटनाक्रम पर सभी की नजरें टिकी हैं।

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