वाइमर प्रारूप में पहली बैठक, यूक्रेन संघर्ष, भारत-यूरोप संबंध और हिंद-प्रशांत क्षेत्र की रणनीतिक चुनौतियों पर हुआ गहन संवाद

पेरिस (फ्रांस), 08 जनवरी (हि.स.)। फ्रांस के आधिकारिक दौरे पर पहुंचे भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पेरिस में जर्मनी, फ्रांस और पोलैंड के विदेश मंत्रियों के साथ वाइमर प्रारूप में पहली बार व्यापक वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की। इस बैठक में भारत-यूरोपीय संघ संबंधों को मजबूत करने, यूक्रेन संघर्ष की स्थिति और इंडो-पैसिफिक यानी हिंद-प्रशांत क्षेत्र में उभरती चुनौतियों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। विदेश मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत एक मुक्त, खुला और समावेशी हिंद-प्रशांत क्षेत्र का समर्थक है और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए सहयोग को आवश्यक मानता है।

वाइमर प्रारूप में पहली बार भारत की भागीदारी

यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि पहली बार भारत ने वाइमर समूह के देशों—जर्मनी, फ्रांस और पोलैंड—के साथ इस स्तर पर संवाद किया। विदेश मंत्री जयशंकर ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर बैठक की जानकारी साझा करते हुए बताया कि चर्चा खुली और स्पष्ट रही, जिसमें सभी पक्षों ने अपने-अपने दृष्टिकोण सामने रखे। बैठक के बाद संयुक्त संवाददाता सम्मेलन के माध्यम से वाइमर देशों और भारत के साझा रुख से दुनिया को अवगत कराया गया।

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यूक्रेन संघर्ष पर विचारों का आदान-प्रदान

बैठक के दौरान यूक्रेन संघर्ष पर भी गंभीर चर्चा हुई। जयशंकर ने कहा कि भारत ने इस मुद्दे पर अपना संतुलित और व्यावहारिक दृष्टिकोण रखा है। भारत लगातार संवाद और कूटनीति के जरिए समाधान का पक्षधर रहा है। उन्होंने कहा कि वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए संघर्षों का शांतिपूर्ण समाधान जरूरी है और इसी दिशा में भारत अपने अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ बातचीत करता रहेगा।

भारत-यूरोपीय संघ संबंधों को मजबूत करने पर जोर

विदेश मंत्री ने कहा कि यूरोप आज वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में एक अहम भूमिका निभा रहा है। ऐसे में भारत और यूरोपीय संघ के बीच संबंधों का मजबूत होना समय की मांग है। जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत और यूरोप मिलकर वैश्विक स्तर पर स्थिरता, विकास और संतुलन ला सकते हैं। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और गहराई देने की अपार संभावनाएं हैं।

फ्रांस के विदेश मंत्री से द्विपक्षीय बातचीत

वाइमर बैठक से पहले जयशंकर ने फ्रांस के विदेश मंत्री जीन नोएल बैरट से भी मुलाकात की। इस दौरान भारत-फ्रांस द्विपक्षीय संबंधों, वैश्विक राजनीति और आर्थिक सहयोग पर चर्चा हुई। जयशंकर ने कहा कि भारत और फ्रांस वैश्विक मंच पर स्थिरता लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं और दोनों देशों के बीच भरोसे और सहयोग का मजबूत आधार है।

भारत करेगा यूरोपीय नेताओं की मेजबानी

जयशंकर ने जानकारी दी कि भारत आने वाले कुछ हफ्तों में जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मेर्ज, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और यूरोपीय संघ के शीर्ष नेताओं की मेजबानी करेगा। उन्होंने कहा कि इन उच्चस्तरीय दौरों से भारत-यूरोप संबंधों को नई गति मिलेगी और रणनीतिक सहयोग को और मजबूती मिलेगी।

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क्या है इंडो-पैसिफिक और क्यों है अहम

उल्लेखनीय है कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र आज उभरता हुआ भू-राजनीतिक और आर्थिक केंद्र बन चुका है। इसमें हिंद महासागर और प्रशांत महासागर के आसपास के देश और जलक्षेत्र शामिल हैं। यह क्षेत्र पूर्वी अफ्रीका के तट से लेकर पश्चिमी प्रशांत महासागर तक फैला हुआ है और विश्व की बड़ी आबादी, व्यापारिक मार्ग और आर्थिक गतिविधियों का केंद्र है। भारत, चीन, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश इस क्षेत्र में अहम भूमिका निभाते हैं।

भारत का दृष्टिकोण: मुक्त, खुला और समावेशी क्षेत्र

भारत इंडो-पैसिफिक को एक मुक्त, खुला और समावेशी क्षेत्र के रूप में देखता है, जहां सभी देशों की संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सम्मान हो। इसी दृष्टिकोण के तहत भारत ने इंडो-पैसिफिक ओशन इनिशिएटिव की शुरुआत की है, जिसका उद्देश्य समुद्री सुरक्षा, सहयोग और सतत विकास को बढ़ावा देना है। इसके समानांतर अमेरिका ने इंडो-पैसिफिक इकोनॉमिक फ्रेमवर्क की पहल की है, जो आर्थिक सहयोग को मजबूत करने का एक मंच है, जिसमें 14 देश शामिल हैं।

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वैश्विक शक्ति संतुलन में हिंद-प्रशांत की भूमिका

हिंद-प्रशांत क्षेत्र वैश्विक शक्ति संतुलन और समुद्री सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां से गुजरने वाले समुद्री मार्ग विश्व व्यापार की रीढ़ हैं। ऐसे में इस क्षेत्र में स्थिरता और सहयोग न केवल एशिया बल्कि यूरोप और पूरी दुनिया के लिए जरूरी है। जयशंकर की पेरिस यात्रा और वाइमर देशों के साथ हुई यह बैठक इसी दिशा में भारत की सक्रिय कूटनीति को दर्शाती है।

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