राज्यों के परिवहन मंत्रियों की बैठक में सड़क सुरक्षा, कैशलेस इलाज, हिट एंड रन मुआवजा और परिवहन सुधारों पर हुए बड़े फैसले

नई दिल्ली, 08 जनवरी (हि.स.)। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि केंद्र सरकार सड़क दुर्घटनाओं में घायल होने वाले पीड़ितों के लिए एक व्यापक कैशलेस इलाज योजना को बहुत जल्द पूरे देश में लागू करने जा रही है। इस योजना का मकसद हादसे के बाद इलाज में होने वाली देरी को खत्म करना और सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवाने वालों की संख्या को कम करना है। गडकरी ने स्पष्ट किया कि इस योजना के तहत दुर्घटना पीड़ित को अस्पताल पहुंचाने वाले व्यक्ति को 25 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी, जबकि घायल व्यक्ति को अस्पताल में भर्ती होने की स्थिति में सात दिन तक अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिलेगा।

कैशलेस इलाज योजना से खत्म होगी आर्थिक चिंता

गडकरी ने बताया कि इस योजना के अंतर्गत इलाज का पूरा खर्च बीमा कंपनियां वहन करेंगी। जिन मामलों में पीड़ित के पास बीमा कवर नहीं होगा, वहां सरकार रोड सेफ्टी फंड के माध्यम से इलाज का खर्च उठाएगी। उन्होंने कहा कि अक्सर देखा गया है कि सड़क दुर्घटनाओं के बाद आर्थिक कारणों से इलाज में देरी होती है, जिससे जान जाने का खतरा बढ़ जाता है। कैशलेस इलाज योजना इस समस्या का स्थायी समाधान साबित होगी और आम नागरिकों को बड़ी राहत देगी।

राज्यों के परिवहन मंत्रियों की अहम बैठक

गुरुवार को नई दिल्ली में आयोजित देश के सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के परिवहन मंत्रियों की वार्षिक बैठक में सड़क सुरक्षा और परिवहन व्यवस्था से जुड़े 12 महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। इन विषयों में सड़क सुरक्षा, यात्रियों और आम लोगों की सुविधा, व्यापार करने में आसानी, ऑटोमोबाइल नियम, कैशलेस ट्रीटमेंट स्कीम, हिट एंड रन पीड़ितों को मुआवजा, ई-डीएआर, सड़क सुरक्षा मित्र कार्यक्रम, राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह, सड़क सुरक्षा अभियान, स्क्रैपिंग पॉलिसी, बस बॉडी कोड, दिव्यांगजनों के लिए सुगमता, बीएनसीएपी 2.0, ट्रकों और बसों में एडीएएस और मोटर व्हीकल एक्ट में प्रस्तावित संशोधन शामिल रहे।

GADKARI

पायलट प्रोजेक्ट के बाद देशभर में लागू होगी योजना

गडकरी ने कैशलेस इलाज योजना को लेकर राज्यों की तैयारियों की समीक्षा करते हुए कहा कि असम, चंडीगढ़, पंजाब, उत्तराखंड, हरियाणा, पुडुचेरी और उत्तर प्रदेश में इस योजना के पायलट प्रोजेक्ट सफल रहे हैं। इन राज्यों में मिले सकारात्मक परिणामों के आधार पर अब इसे पूरे देश में लागू किया जा रहा है। उन्होंने राज्यों से अपील की कि वे इस योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए जरूरी ढांचे और प्रक्रियाओं को समय रहते मजबूत करें।

केंद्र और राज्यों के तालमेल पर जोर

गडकरी ने कहा कि परिवहन संविधान के तहत एक समवर्ती विषय है, इसलिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच निरंतर और मजबूत तालमेल बेहद जरूरी है। नीतियों में सामंजस्य, सहकारी संघवाद को मजबूत करना और नागरिक-केंद्रित परिवहन व्यवस्था विकसित करने के लिए नियमित संवाद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा जैसे गंभीर विषय पर किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार्य नहीं है।

ड्राइविंग ट्रेनिंग पॉलिसी से बढ़ेगी सड़क सुरक्षा

बैठक में नई ड्राइविंग ट्रेनिंग पॉलिसी पर भी चर्चा हुई, जिसे 15 जनवरी 2025 से लागू किया गया था। गडकरी ने बताया कि पहले सात वर्षों में ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर स्थापित करने में कई व्यावहारिक और कानूनी अड़चनें आईं, यहां तक कि मद्रास हाई कोर्ट ने इस पर दो साल तक रोक भी लगाई थी। हालांकि नई नीति लागू होने के बाद एक ही वर्ष में 44 ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर स्थापित किए जा चुके हैं और 87 अन्य केंद्र पाइपलाइन में हैं। इससे प्रशिक्षित चालकों की संख्या बढ़ेगी और दुर्घटनाओं में कमी आने की उम्मीद है।

हिट एंड रन मामलों में मुआवजा बढ़ा

बैठक में देशभर में दर्ज 1.85 लाख हिट एंड रन मामलों पर भी चर्चा की गई। गडकरी ने बताया कि अब तक 12,273 मामलों का निपटारा किया जा चुका है। उन्होंने राज्यों से आग्रह किया कि वे इस योजना के बारे में जागरूकता बढ़ाएं और दावों की प्रक्रिया को तेज करें। सरकार ने मुआवजे की राशि बढ़ाते हुए गंभीर चोट के मामलों में 50 हजार रुपये और मृत्यु के मामलों में दो लाख रुपये कर दी है।

जीरो फेटालिटी डिस्ट्रिक्ट्स प्रोग्राम पर फोकस

गडकरी ने बताया कि जीरो फेटालिटी डिस्ट्रिक्ट्स प्रोग्राम के तहत देश के 100 ऐसे जिलों की पहचान की गई है, जहां सड़क दुर्घटनाओं की संख्या सबसे अधिक है। इन जिलों में वैज्ञानिक और डेटा आधारित विश्लेषण के जरिए दुर्घटनाओं को कम करने के प्रयास किए जाएंगे। नागपुर, उन्नाव और कामरूप जैसे जिलों में इस कार्यक्रम से पहले ही सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।

दिव्यांगजनों के लिए सुलभ होगी सिटी बस सेवा

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि सभी सिटी बसों को दिव्यांगजन-फ्रेंडली बनाया जाएगा। इसके तहत लो फ्लोर हाइट, हाइड्रोलिक नीलिंग सिस्टम, व्हीलचेयर की सुविधा, लिफ्ट, रैंप और सहायक हैंडल जैसी सुविधाएं अनिवार्य की जाएंगी। गडकरी ने कहा कि सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था सभी वर्गों के लिए समान रूप से सुलभ होनी चाहिए।

बस बॉडी कोड और सुरक्षा मानकों में सख्ती

पिछले तीन महीनों में हुई छह बस दुर्घटनाओं में 145 लोगों की मौत का जिक्र करते हुए गडकरी ने कहा कि इन हादसों के लिए खराब डिजाइन और घटिया सामग्री जिम्मेदार पाई गई है। संशोधित बस बॉडी कोड लागू होने के बावजूद सामने आई समस्याओं को देखते हुए निर्णय लिया गया है कि स्लीपर कोच बसें अब केवल ऑटोमोबाइल कंपनियां ही बनाएंगी। इसके साथ ही मौजूदा बसों में फायर डिटेक्शन सिस्टम, इमरजेंसी एग्जिट, इमरजेंसी लाइटिंग और ड्राइवर ड्रोसिनेस इंडिकेटर जैसी सुरक्षा सुविधाएं अनिवार्य होंगी।

स्क्रैपिंग पॉलिसी से रोजगार और राजस्व में बढ़ोतरी

गडकरी ने बताया कि स्क्रैपिंग पॉलिसी के तहत दिसंबर 2025 तक 3.94 लाख वाहनों को स्क्रैप किया गया है, जिनमें 1.65 लाख सरकारी और 2.29 लाख निजी वाहन शामिल हैं। इस नीति के तहत निजी क्षेत्र ने करीब 2700 करोड़ रुपये का निवेश किया है, जिससे 40 हजार करोड़ रुपये का जीएसटी राजस्व और लगभग 70 लाख अतिरिक्त रोजगार सृजित हुए हैं।

वाहन-से-वाहन संचार तकनीक पर भी काम

अंत में गडकरी ने कहा कि वाहन-से-वाहन संचार तकनीक को भी लाने पर विचार किया जा रहा है। इस तकनीक के जरिए वाहन वायरलेस तरीके से एक-दूसरे से जुड़कर गति, स्थान और ब्रेकिंग जैसी जानकारियां साझा करेंगे। इससे दुर्घटनाओं को रोकने में मदद मिलेगी और ब्लाइंड स्पॉट में मौजूद वाहनों की पहचान संभव हो सकेगी। दूरसंचार विभाग ने इसके लिए 30 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम के उपयोग की अनुमति सिद्धांत रूप में दे दी है।

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