सोशल मीडिया बयान से पार्टी नेतृत्व, समीक्षा प्रक्रिया और भविष्य की दिशा पर उठे गंभीर सवाल

राजद में खुलकर सामने आई अंदरूनी खींचतान

पटना, 27 जनवरी (हि.स.)। राष्ट्रीय जनता दल के भीतर चल रही अंदरूनी कलह एक बार फिर सार्वजनिक रूप से सामने आ गई है। पार्टी प्रमुख लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने बिना नाम लिए पार्टी के वरिष्ठ नेता और बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि दशकों तक चले लालू यादव के संघर्ष और पार्टी कार्यकर्ताओं की मेहनत को दरकिनार कर दिया गया है, जिससे राजद की वैचारिक और सांगठनिक नींव कमजोर हो रही है।

सोशल मीडिया पोस्ट से बढ़ा सियासी तूफान

रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि लालू यादव और पार्टी के लिए किसने क्या किया है, यह हालिया लोकसभा चुनाव, हाल में संपन्न विधानसभा चुनावों के नतीजों और पार्टी की मौजूदा हालत से साफ झलकता है। उनके अनुसार चुनावी परिणाम खुद इस बात की गवाही दे रहे हैं कि पार्टी किस दिशा में जा रही है और संगठन को किस तरह संचालित किया जा रहा है।

“आयातित गुरु” पर कटाक्ष, नेतृत्व पर सीधा आरोप

अपने बयान में रोहिणी आचार्य ने तीखा तंज कसते हुए कहा कि जिसे पार्टी की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, उसने अपने “आयातित गुरु” और उनके सहयोगियों के साथ मिलकर लालू यादव और पार्टी के प्रति समर्पित लालूवादियों के दशकों पुराने संघर्ष को धो-पोंछ कर रख दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि जमीन से जुड़े कार्यकर्ताओं को हाशिए पर डालकर कुछ चुनिंदा लोगों को सर्वेसर्वा बना दिया गया, जिससे पार्टी आज बर्बादी के कगार पर खड़ी दिखाई दे रही है।

खुले मंच पर सवालों का सामना करने की चुनौती

रोहिणी आचार्य ने कहा कि सवाल पहले भी उठे थे, आज भी उठ रहे हैं और आगे भी उठते रहेंगे। उन्होंने पार्टी नेतृत्व को चुनौती देते हुए कहा कि यदि नैतिक साहस है तो खुले मंच पर सवालों का सामना करने की हिम्मत दिखानी चाहिए। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि “ज्ञान कौन दे रहा है और ज्ञान देने की आड़ में सच्चाई से मुंह कौन चुरा रहा है, यह अब ज्यादा समय तक छिपा नहीं रहेगा।”

समीक्षा प्रक्रिया पर गंभीर सवाल

रोहिणी आचार्य ने पार्टी की समीक्षा प्रक्रिया को लेकर भी कड़े सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि आज पार्टी का हर सच्चा कार्यकर्ता, समर्थक और हितैषी यह जानना चाहता है कि जिन कुछ लोगों को लालू यादव को नजरअंदाज कर सर्वेसर्वा बना दिया गया, उन्होंने पार्टी के लिए आखिर किया क्या है। उन्होंने पूछा कि समीक्षा के नाम पर जो प्रक्रिया अपनाई गई, वह केवल दिखावा क्यों साबित हुई, अब तक उस पर कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई और समीक्षा रिपोर्ट को सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया। साथ ही जिन लोगों पर सवाल उठे, उनके खिलाफ कार्रवाई न होने को लेकर भी उन्होंने नाराजगी जताई।

पहले भी जता चुकी हैं असहमति

यह पहला मौका नहीं है जब रोहिणी आचार्य ने पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठाए हों। इससे पहले 25 जनवरी को तेजस्वी यादव को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने पर उन्होंने तीखी प्रतिक्रिया दी थी। उस फैसले को उन्होंने लालू प्रसाद यादव की गौरवशाली राजनीतिक यात्रा का एक तरह से “पटाक्षेप” बताते हुए “कठपुतली बने शहजादे की ताजपोशी” जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था, जिससे पार्टी के भीतर असहजता और चर्चाओं का दौर शुरू हो गया था।

लालूवादी विचारधारा की रक्षा का दावा

अपने ताजा बयान में रोहिणी आचार्य ने स्पष्ट किया कि जो व्यक्ति वास्तव में लालूवादी विचारधारा में विश्वास करता है और जिसने वंचित, शोषित और हाशिए पर खड़े वर्गों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया है, वही पार्टी की मौजूदा हालत के लिए जिम्मेदार लोगों से सवाल करेगा। उन्होंने कहा कि लालू प्रसाद यादव की राजनीतिक विरासत और सामाजिक-आर्थिक न्याय की विचारधारा को आगे बढ़ाने की चिंता रखने वाले लोग, परिणाम की परवाह किए बिना, अपनी आवाज उठाते रहेंगे।

बिहार की राजनीति में बढ़ी सरगर्मी

रोहिणी आचार्य के इस बयान के बाद राजद के भीतर असंतोष और मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह विवाद केवल पारिवारिक या व्यक्तिगत नहीं, बल्कि पार्टी के नेतृत्व, दिशा और भविष्य को लेकर गहरे मतभेद का संकेत देता है। इस घटनाक्रम के बाद बिहार की राजनीति में सरगर्मी तेज हो गई है और आने वाले दिनों में इसके सियासी और चुनावी असर को लेकर चर्चाएं और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

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