मकर संक्रांति पर एकादशी का विशेष संयोग, 23 साल बाद बना दुर्लभ योग
मकर संक्रांति हिंदू धर्म का एक पावन और महत्वपूर्ण पर्व है। यह त्योहार भगवान सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने पर मनाया जाता है। इस दिन से सूर्य उत्तरायण होते हैं, जिसे शुभ माना जाता है। मकर संक्रांति पर पवित्र नदियों में स्नान, दान-पुण्य और सूर्य देव की पूजा का विशेष महत्व होता है। देशभर में यह पर्व अलग-अलग नामों से मनाया जाता है, जैसे पंजाब में लोहड़ी, तमिलनाडु में पोंगल, असम में बिहू और उत्तर भारत में खिचड़ी पर्व।
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इस वर्ष मकर संक्रांति का पर्व और भी खास बन गया है, क्योंकि इसी दिन एकादशी व्रत का भी संयोग बन रहा है। यह दुर्लभ संयोग पूरे 23 साल बाद बना है। एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित होती है और इस दिन व्रत, पूजा और भक्ति का विशेष महत्व होता है।
मकर संक्रांति का धार्मिक महत्व
मकर संक्रांति सूर्य देव की आराधना का पर्व है। मान्यता है कि इस दिन सूर्य देव की पूजा करने से जीवन में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा आती है। इस दिन लोग गंगा, यमुना, गोदावरी जैसी पवित्र नदियों में स्नान करते हैं और दान-पुण्य करते हैं। तिल, गुड़, खिचड़ी, वस्त्र और अन्न का दान करना शुभ माना जाता है।
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एकादशी व्रत का महत्व
एकादशी व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से सभी पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। जब मकर संक्रांति और एकादशी एक साथ पड़ती हैं, तो इस दिन की पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है।
पूजा विधि और शुभ समय
मकर संक्रांति और एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठना शुभ माना जाता है। स्नान के बाद साफ कपड़े पहनकर भगवान विष्णु और सूर्य देव का ध्यान करें। इसके बाद तांबे के लोटे में जल, अक्षत और फूल डालकर सूर्य देव को अर्घ्य दें। अर्घ्य देते समय यह मंत्र बोलें –
“ॐ सूर्याय नमः”
इसके बाद भगवान विष्णु की पूजा करें, तुलसी के पत्ते चढ़ाएं और एकादशी व्रत का संकल्प लें।
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दान-पुण्य का महत्व
इस दिन तिल का दान विशेष रूप से शुभ माना जाता है। मान्यता है कि तिल का दान करने से शनि दोष शांत होता है और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं। इसके अलावा खिचड़ी, गुड़, कपड़े और अन्न का दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है।
आध्यात्मिक लाभ
मकर संक्रांति और एकादशी का यह विशेष संयोग भक्तों के लिए बड़ा अवसर है। इस दिन की गई पूजा, व्रत और दान से आत्मिक शुद्धि होती है और जीवन में सुख-शांति आती है। यह दिन नई शुरुआत और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। 23 साल बाद बना मकर संक्रांति और एकादशी का यह दुर्लभ संयोग बेहद शुभ है। इस दिन सूर्य देव और भगवान विष्णु की पूजा, व्रत और दान करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। इसलिए इस पावन दिन को पूरे श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाना चाहिए।
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