साबरमती आश्रम से पतंगोत्सव तक दिखी भारत-जर्मनी मित्रता, व्यापार और रणनीतिक सहयोग पर रही खास चर्चा
अहमदाबाद, 12 जनवरी (हि.स.)। जर्मनी के चांसलर Friedrich Merz सोमवार को अपने दो दिवसीय भारत दौरे पर गुजरात के अहमदाबाद पहुंचे। चांसलर बनने के बाद यह उनकी पहली एशिया यात्रा है, जिसे भारत-जर्मनी संबंधों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रधानमंत्री Narendra Modi ने साबरमती आश्रम पहुंचकर उनका आत्मीय स्वागत किया। इस दौरान दोनों नेताओं ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की और आश्रम परिसर में चल रही पुनर्विकास परियोजना की समीक्षा की।
Sharing my remarks during the joint press meet with Chancellor Friedrich Merz of Germany.@bundeskanzler@_FriedrichMerzhttps://t.co/QStqeCG1qo
— Narendra Modi (@narendramodi) January 12, 2026
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साबरमती आश्रम में गांधी दर्शन और विकास पर संवाद
साबरमती आश्रम में हुई मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और चांसलर मर्ज ने महात्मा गांधी के जीवन, उनके विचारों और वैश्विक शांति में उनके योगदान पर चर्चा की। प्रधानमंत्री ने कहा कि गांधीजी के सत्य, अहिंसा और आत्मनिर्भरता के सिद्धांत आज भी दुनिया को दिशा दिखाते हैं। आश्रम पुनर्विकास परियोजना के तहत किए जा रहे कार्यों की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि इसका उद्देश्य गांधीजी की विरासत को संरक्षित रखते हुए आने वाली पीढ़ियों तक उनके विचारों को पहुंचाना है।
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एक ही कार से रिवरफ्रंट तक का सफर
साबरमती आश्रम से निकलने के बाद प्रधानमंत्री मोदी और चांसलर मर्ज एक ही कार में सवार होकर साबरमती रिवरफ्रंट के लिए रवाना हुए। यह दृश्य दोनों देशों के बीच बढ़ती आपसी निकटता और विश्वास का प्रतीक माना गया। मार्ग में स्थानीय लोगों ने दोनों नेताओं का उत्साहपूर्वक स्वागत किया।
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अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव 2026 का रंग
साबरमती रिवरफ्रंट पर प्रधानमंत्री मोदी ने अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव 2026 का उद्घाटन किया। उत्तरायण के इस पारंपरिक उत्सव में देश-विदेश से आए पतंग प्रेमियों ने हिस्सा लिया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी और जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने पारंपरिक अंदाज में पतंग उड़ाकर महोत्सव का आनंद लिया। दोनों नेताओं को भगवान हनुमान की आकृति वाली और “ऑपरेशन सिंदूर” लिखी हुई विशेष पतंग उड़ाते देखा गया, जिसने कार्यक्रम में मौजूद लोगों का ध्यान आकर्षित किया।
संस्कृति के माध्यम से कूटनीति
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पतंगोत्सव केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत और लोक परंपराओं का उत्सव है। उन्होंने बताया कि इस तरह के आयोजन दुनिया को भारत की विविधता, रचनात्मकता और सांस्कृतिक समृद्धि से परिचित कराते हैं। चांसलर मर्ज ने भी भारतीय संस्कृति की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से देशों के बीच जन-जन का जुड़ाव मजबूत होता है।
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व्यापार, निवेश और रक्षा सहयोग पर फोकस
जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज का यह दौरा व्यापार, निवेश, रक्षा और महत्वपूर्ण तकनीकों के क्षेत्रों में भारत-जर्मनी सहयोग को नई गति देने के उद्देश्य से हो रहा है। दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय वार्ता प्रस्तावित है, जिसमें रणनीतिक साझेदारी, हरित ऊर्जा, उन्नत तकनीक, रक्षा उत्पादन और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। भारत और जर्मनी पहले से ही आर्थिक और तकनीकी सहयोग के मजबूत साझेदार हैं, और यह यात्रा इस रिश्ते को और गहरा करने की दिशा में अहम मानी जा रही है।
युवा राष्ट्र-निर्माण की आधारशिला: प्रधानमंत्री मोदी
स्वामी विवेकानंद के विचारों को बताया आज के युवाओं के लिए मार्गदर्शक
नई दिल्ली, 12 जनवरी (हि.स.)। राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने युवाओं की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि स्वामी विवेकानंद का दृढ़ विश्वास था कि युवा शक्ति ही राष्ट्र-निर्माण की सबसे सशक्त आधारशिला है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय युवा अपने जोश, ऊर्जा और जुनून के बल पर हर संकल्प को साकार करने की क्षमता रखते हैं।
प्रधानमंत्री ने स्वामी विवेकानंद के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि आज का युवा आत्मविश्वास, नवाचार और परिश्रम के माध्यम से देश को नई ऊंचाइयों तक ले जा रहा है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए शिक्षा, तकनीक और सेवा के क्षेत्र में योगदान दें। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में संस्कृत श्लोक का उल्लेख करते हुए कहा कि दृढ़ संकल्प वाला व्यक्ति सीमित साधनों में भी असाधारण परिणाम प्राप्त कर सकता है।
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प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि भारत का युवा इसी संकल्प के साथ आत्मनिर्भर और विकसित भारत के निर्माण में निर्णायक भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद के विचार आज भी युवाओं को आत्मगौरव, सेवा और राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा देते हैं।
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