पौराणिक मान्यताओं के बीच गंगा-सागर संगम पर उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब, सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
कोलकाता: मकर संक्रांति के पावन अवसर पर पश्चिम बंगाल के गंगासागर में आस्था, श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। बुधवार सुबह से ही गंगा और सागर के संगम तट पर लाखों श्रद्धालु पुण्य स्नान के लिए उमड़ पड़े। सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार, श्रद्धालुओं ने उसी शुभ मुहूर्त में आस्था की डुबकी लगाई, जिस मुहूर्त में त्रेता युग में गंगा के स्पर्श से राजा सगर के साठ हजार पुत्रों को मोक्ष की प्राप्ति हुई थी। यह दृश्य न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि भारतीय संस्कृति की जीवंतता को भी दर्शाता है।
त्रेता युग से जुड़ी पौराणिक मान्यता
हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, त्रेता युग में राजा सगर के साठ हजार पुत्र कपिल मुनि के आश्रम के पास भस्म हो गए थे। बाद में भगीरथ के कठोर तप से मां गंगा का पृथ्वी पर अवतरण हुआ और गंगासागर तट पर गंगा के स्पर्श से उन सभी को मोक्ष प्राप्त हुआ। तभी से मकर संक्रांति के अवसर पर गंगासागर में स्नान को विशेष पुण्यदायी माना जाता है। यही कारण है कि हर वर्ष देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु इस दुर्गम द्वीप पर पहुंचते हैं।
सुबह से ही संगम तट पर शुरू हुआ स्नान
बुधवार सुबह करीब छह बजे से ही श्रद्धालुओं ने गंगा-सागर संगम पर स्नान प्रारंभ कर दिया। अंधेरे में भी श्रद्धालु अपने-अपने शिविरों से निकलकर तट की ओर बढ़ते नजर आए। जैसे-जैसे सूर्य की पहली किरणें पड़ीं, संगम तट पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। हर ओर “हर-हर गंगे” और “जय गंगा मैया” के उद्घोष गूंजते रहे। ठंड और समुद्री हवाओं के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह और श्रद्धा देखते ही बन रही थी।
पुण्य स्नान का शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व
कपिल मुनि आश्रम के महंत ज्ञान दास ने बताया कि बुधवार रात 9 बजकर 19 मिनट पर सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेगा। इसके बाद पुण्य स्नान का विशेष काल आरंभ होगा, जो गुरुवार दोपहर 1 बजकर 20 मिनट तक रहेगा। इसी कारण धार्मिक दृष्टि से गुरुवार सुबह का स्नान विशेष फलदायी माना जा रहा है। हालांकि श्रद्धालुओं ने बुधवार से ही स्नान शुरू कर दिया, जिससे पूरे दिन संगम क्षेत्र में भारी भीड़ बनी रही।
लाखों श्रद्धालुओं की मौजूदगी, आंकड़ों का इंतजार
राज्य सरकार की ओर से अभी तक आधिकारिक आंकड़े जारी नहीं किए गए हैं, लेकिन अनुमान है कि अब तक करीब 15 लाख श्रद्धालुओं ने गंगासागर में पुण्य स्नान कर लिया है। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, कुल मिलाकर लगभग 30 लाख से अधिक श्रद्धालु गंगासागर द्वीप पर पहुंच चुके हैं। इनमें पश्चिम बंगाल के अलावा उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, ओडिशा, मध्यप्रदेश, राजस्थान और अन्य राज्यों के श्रद्धालु शामिल हैं।
सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। पुलिस, सिविल डिफेंस और होमगार्ड के साथ-साथ नौसेना और तटरक्षक बल के जवान भी तैनात हैं। कुल मिलाकर 10 हजार से अधिक सुरक्षा कर्मी पूरे मेले क्षेत्र में निगरानी कर रहे हैं। समुद्र में स्नान के दौरान किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए विशेष बचाव दल, नावें और मेडिकल टीमें भी तैनात की गई हैं। ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों के जरिए भीड़ पर नजर रखी जा रही है।
प्रशासन और स्वयंसेवकों की भूमिका
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रशासन द्वारा अस्थायी सड़कें, पेयजल, शौचालय, चिकित्सा शिविर और प्रकाश की व्यवस्था की गई है। स्वयंसेवी संगठन भी भोजन वितरण, मार्गदर्शन और बुजुर्गों की सहायता में जुटे हुए हैं। प्रशासन का दावा है कि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए हर स्तर पर सतर्कता बरती जा रही है।
आस्था और परंपरा का जीवंत संगम
गंगासागर मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और सामाजिक समरसता का प्रतीक है। यहां साधु-संतों की टोलियां, भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठान पूरे वातावरण को भक्तिमय बना देते हैं। मकर संक्रांति के अवसर पर गंगासागर में स्नान करने की परंपरा आज भी उतनी ही जीवंत है, जितनी सदियों पहले थी।
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