सर्दियों का मौसम अपने पूरे शबाब पर होता है, जब हल्की धूप शरीर को सुकून देती है, आसमान में पतंगें लहराती हैं और घर-घर से तिल-गुड़ की मिठास की खुशबू फैलती है। इसी सुहाने समय में आता है मकर संक्रांति का पर्व, जो केवल एक त्योहार नहीं बल्कि ऋतु परिवर्तन, सूर्य उपासना और नए आरंभ का प्रतीक है। यह वह क्षण होता है जब सूर्य देव दक्षिणायन से उत्तरायण की ओर अपनी यात्रा प्रारंभ करते हैं, अर्थात् अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने का संकेत देते हैं।
मकर संक्रांति को भारत में अनेक नामों और परंपराओं के साथ मनाया जाता है, लेकिन इसका सार एक ही है – सूर्य का मकर राशि में प्रवेश और प्रकाश के नए चरण की शुरुआत। यह वह समय है जब प्रकृति अपने जीवन चक्र में एक नया मोड़ लेती है। खेतों में फसलें झूमने लगती हैं, हवा में ठंडक होते हुए भी एक नई ऊर्जा का संचार होता है, और लोग नए जोश के साथ तिल, गुड़ और खिचड़ी के साथ इस परिवर्तन का उत्सव मनाते हैं।
हर वर्ष जब मकर संक्रांति की तारीख नज़दीक आती है, तो लोगों में यह जिज्ञासा रहती है कि आखिर इस साल खिचड़ी कब बनेगी – 14 या 15 जनवरी को। ऐसा इसलिए क्योंकि सूर्य के संक्रमण का सटीक समय हर वर्ष बदलता रहता है। और अगर सूर्य का मकर राशि में प्रवेश रात्रि में हो, तो पुण्यकाल अगले दिन माना जाता है। यही कारण है कि कभी यह पर्व 14 जनवरी को मनाया जाता है, तो कभी 15 जनवरी को।
यह केवल एक पर्व नहीं, बल्कि प्रकाश, ऊर्जा और नए जीवन की शुरुआत का संदेश है। यह समय है जब ठंड की सुबहें भी भक्ति और उल्लास से भर जाती हैं, और जीवन में एक नई सकारात्मकता का संचार होता है।
मकर संक्रांति का महत्व
मकर संक्रांति का पर्व सूर्य के मकर राशि में प्रवेश का प्रतीक है। यह वह समय होता है जब दिन बड़े होने लगते हैं और रातें छोटी। यह परिवर्तन केवल खगोलीय नहीं बल्कि आध्यात्मिक भी है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन से देवताओं का दिन अर्थात उत्तरायण काल आरंभ होता है।
इस दिन स्नान, दान और सूर्य देव की उपासना का विशेष महत्व होता है। श्रद्धालु नदियों में स्नान करते हैं, तिल और गुड़ का दान करते हैं और भगवान सूर्य से स्वास्थ्य, समृद्धि और ज्ञान की कामना करते हैं।
पुराणों में वर्णन है कि मकर संक्रांति के दिन किया गया दान अनेक गुना फल देता है। यही कारण है कि इस पर्व को दान पर्व भी कहा जाता है।
मकर संक्रांति 2026 की तिथि और समय
ज्योतिषियों के मुताबिक, 14 जनवरी को मकर संक्रांति के दिन दोपहर 3 बजकर 13 मिनट पर सूर्य मकर राशि में गोचर करेंगे। यही कारण है कि, इस समय को दिन का सबसे पुण्य काल माना जा रहा है। इसके अलावा एकादशी तिथि 14 जनवरी को सूर्योदय से लेकर शाम 05:52 मिनट तक रहेगी। आप इस अवधि में सूर्यदेव और भगवान विष्णु की उपासना कर सकते हैं। वहीं सुबह 7:15 से दोपहर 3:03 तक सर्वार्थ सिद्धि योग बना रहगेा। इस दौरान सुबह 7:15 से 03:03 तक अमृत सिद्धि योग भी रहने वाला है।
एकादशी के संयोग का धार्मिक महत्व
इस बार का संयोग बेहद विशेष है क्योंकि मकर संक्रांति के दिन पौष मास की एकादशी तिथि भी रहेगी।
एकादशी को भगवान विष्णु की उपासना के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है। जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है और उसी दिन एकादशी पड़ती है तो इसका प्रभाव अत्यंत शुभ होता है।
शास्त्रों में कहा गया है कि इस संयोग में किया गया स्नान, व्रत और दान जीवन के सभी पापों को नष्ट करता है और आत्मिक शुद्धता प्रदान करता है।
कहा जाता है कि मकर संक्रांति पर एकादशी आने से भक्तों को सूर्य और विष्णु दोनों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
खिचड़ी पर्व का प्रतीक और परंपरा
मकर संक्रांति को देश के कई हिस्सों में खिचड़ी पर्व के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन लोग तिल, गुड़, चावल और दाल से बनी खिचड़ी बनाते हैं।
खिचड़ी सिर्फ एक भोजन नहीं बल्कि एकता और समरसता का प्रतीक है। इसमें कई तत्व मिलकर एक स्वाद बनाते हैं, जैसे समाज में विभिन्न लोग मिलकर एक संस्कृति बनाते हैं।
इस दिन गरीबों और जरूरतमंदों को खिचड़ी, तिल और गुड़ का दान करने से पुण्य प्राप्त होता है।
इस बार खिचड़ी बनाने और दान करने का सबसे शुभ समय 15 जनवरी 2026 की सुबह का रहेगा।
मकर संक्रांति की परंपराएँ और क्षेत्रीय रूप
- भारत के अलग-अलग राज्यों में यह पर्व विभिन्न नामों और परंपराओं के साथ मनाया जाता है।
- उत्तर भारत: खिचड़ी, तिल-गुड़ और सूर्य पूजा का प्रचलन है।
- महाराष्ट्र: लोग तिळगुळ घ्या, गोड़ गोड़ बोला कहते हुए मिठाई बांटते हैं।
- गुजरात और राजस्थान: पतंगबाज़ी का पर्व उत्तरायण बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है।
- दक्षिण भारत: यहाँ इसे पोंगल कहा जाता है, जहाँ नई फसल का उत्सव मनाया जाता है।
- पंजाब: लोहड़ी के रूप में यह दिन आग के चारों ओर गीत और नृत्य के साथ मनाया जाता है।
दान और पूजा विधि
- मकर संक्रांति के दिन तिल, गुड़, कंबल, ऊनी वस्त्र और अन्न का दान अत्यंत शुभ माना गया है।
- सुबह स्नान के बाद सूर्य देव को जल अर्पित करें और तिल मिश्रित जल से अर्घ्य दें।
- इसके बाद तिल और गुड़ से बनी मिठाई या खिचड़ी का दान करें।
- जो व्यक्ति इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नान और दान करता है, उसे अनंत पुण्य की प्राप्ति होती है।
इस संयोग में विशेष क्या है
- इस बार एकादशी और मकर संक्रांति का योग बनना अत्यंत शुभ है।
- भक्तों को सूर्य देव और भगवान विष्णु दोनों की कृपा प्राप्त होगी।
- इस दिन किया गया दान और व्रत अनेक जन्मों के पापों को नष्ट करता है।
- सूर्य के उत्तरायण होने से नई ऊर्जा और स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है।
निष्कर्ष
मकर संक्रांति केवल एक त्यौहार नहीं बल्कि जीवन में परिवर्तन और प्रकाश का प्रतीक है।
वर्ष 2026 का यह पर्व एक विशेष योग लेकर आ रहा है जब एकादशी और मकर संक्रांति साथ पड़ रही हैं।
ऐसा दुर्लभ संयोग वर्षों में एक बार बनता है, इसलिए इस दिन स्नान, दान, खिचड़ी और सूर्य उपासना का विशेष महत्व है।
14 जनवरी की रात से ही शुभ कार्यों की शुरुआत होगी और 15 जनवरी की सुबह इसका पुण्य काल रहेगा।
इस मकर संक्रांति पर अपने जीवन में सकारात्मकता, ऊर्जा और समृद्धि के सूर्य को उगने दें।
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