राष्ट्रीय परियोजनाओं को लेकर मुख्यमंत्री निवास पर मीडिया से चर्चा, प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों को बताया निर्णायक

भोपाल: मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने मुख्यमंत्री निवास, भोपाल में राष्ट्रीय परियोजनाओं के संबंध में मीडिया से विस्तृत चर्चा की। इस अवसर पर वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि आधुनिक तकनीक, प्रक्रियात्मक सुधार और केंद्र-राज्य के बेहतर समन्वय के कारण आज विकास कार्य तय समय सीमा में पूरे हो रहे हैं। उन्होंने इसे सुशासन का प्रत्यक्ष प्रमाण बताया और कहा कि इससे सरकारों की कार्यसंस्कृति में ऐतिहासिक बदलाव आया है।

केंद्र सरकार के साथ पोर्टल से बढ़ी कार्यों की गति

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के साथ समन्वय स्थापित करते हुए केंद्र सरकार के साथ पोर्टल प्रणाली की शुरुआत मध्यप्रदेश ने प्रारंभिक दौर में ही कर दी थी। इसके परिणामस्वरूप प्रदेश के विकास कार्यों की निरंतर निगरानी संभव हो सकी और लंबित प्रक्रियाओं में तेजी आई। उन्होंने कहा कि राजनीतिक आपाधापी के बीच प्रक्रियात्मक सुधार होना आसान नहीं होता, लेकिन वर्तमान दौर में तकनीक के माध्यम से यह संभव हुआ है।

गुड गवर्नेंस की दिशा में बड़ा परिवर्तन

मुख्यमंत्री ने कहा कि आधुनिक तकनीक के बल पर आज परियोजनाओं की निगरानी सीधे जनप्रतिनिधियों के हाथ में है। इससे जवाबदेही बढ़ी है और कार्यों में पारदर्शिता आई है। उन्होंने कहा कि आज प्रधानमंत्री से लेकर राज्यों के मुख्यमंत्रियों तक, सभी जिम्मेदार लोग तय समय में कार्य पूर्ण कराने के लिए प्रत्यक्ष रूप से जुड़े हैं। इससे न केवल प्रशासनिक दक्षता बढ़ी है, बल्कि देश की छवि भी वैश्विक स्तर पर सशक्त हुई है।

24 दलों की सरकारों के दौर के दुष्परिणामों का उल्लेख

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है, लेकिन अतीत में 24-24 दलों की सरकारों के कारण देश को असमान विकास का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि उस दौर में नीतिगत स्पष्टता का अभाव था, जिससे मनमानी फैसले हुए और संसाधनों का संतुलित उपयोग नहीं हो पाया। रेल मंत्रालय का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि पहले इसके लिए राजनीतिक प्रतिस्पर्धा रहती थी, जिससे योजनाएं बिखरी रहीं।

रेल बजट को मुख्य बजट से जोड़ना ऐतिहासिक कदम

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी के उस निर्णय को ऐतिहासिक बताया, जिसमें रेल बजट को मुख्य बजट से जोड़ा गया। उन्होंने कहा कि इससे पहले अंग्रेजों की पद्धति के अनुसार परिवहन पर अलग नियंत्रण था, लेकिन वर्तमान व्यवस्था में समग्र विकास की सोच के साथ सभी राज्यों में समान रूप से निवेश हो रहा है। इसका सीधा लाभ मध्यप्रदेश सहित पूरे देश को मिला है।

असम और नागालैंड का उदाहरण देकर समझाया समान विकास

मुख्यमंत्री ने हाल ही में असम और नागालैंड में आयोजित निवेश सम्मेलन का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां निवेश को आकर्षित करने के लिए केंद्र सरकार ने दीर्घकालिक कर राहत जैसी योजनाएं लागू की हैं। उन्होंने बताया कि निवेशकों को दी जा रही सुविधाएं भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तय की गई हैं। यह पूर्वोत्तर राज्यों को मुख्यधारा में लाने की दिशा में मजबूत पहल है।

मध्यप्रदेश में रेल और आधारभूत संरचना का विस्तार

मुख्यमंत्री ने कहा कि गोंदिया-जबलपुर रेल लाइन परियोजना से बालाघाट, मंडला और नागपुर सीधे जुड़ रहे हैं, जिससे इटारसी होकर आने की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी। उन्होंने बताया कि गोंदिया से सीधी ट्रेन चलने की योजना से क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलेगी। इसके साथ ही मनमाड़-इंदौर रेल मार्ग और साढ़े अठारह हजार करोड़ की रेल परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि ये सभी योजनाएं प्रदेश को विकास की मुख्यधारा में आगे ले जा रही हैं।

केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय की मिसाल

मुख्यमंत्री ने कहा कि भले ही राजनीतिक मतभेद हों, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में केंद्र और राज्यों के बीच विकास को लेकर बेहतर समन्वय स्थापित हुआ है। उन्होंने कहा कि देश के लिए केरल, तमिलनाडु, मध्यप्रदेश सभी समान महत्व रखते हैं। भूमि उपयोग और परियोजनाओं से जुड़े जटिल मुद्दों का समाधान पोर्टल के माध्यम से केंद्र और राज्य के अधिकारी मिलकर कर रहे हैं।

अन्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों की स्वीकारोक्ति

मुख्यमंत्री ने कहा कि हाल ही में दिल्ली में हुई मुलाकात के दौरान तेलंगाना के मुख्यमंत्री Revanth Reddy ने भी यह स्वीकार किया कि वर्तमान केंद्र सरकार सभी राज्यों को समान अवसर प्रदान कर रही है। उन्होंने कहा कि आंध्र और तेलंगाना के विभाजन के बाद केंद्र सरकार से मिले सहयोग के कारण बड़े प्रोजेक्ट संभव हो सके हैं।

पुरानी परियोजनाओं को पूरा करने का संकल्प

मुख्यमंत्री ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी के समय प्रारंभ हुई केन-बेतवा लिंक परियोजना को अब गति मिली है, जिसमें केंद्र सरकार की ओर से एक लाख करोड़ की सहायता मिली है। उन्होंने बताया कि लंबे समय से लंबित परियोजनाओं की दिल्ली स्तर पर निगरानी हो रही है और प्रधानमंत्री या गृहमंत्री से मुलाकात के दौरान पहले इन परियोजनाओं की प्रगति पर चर्चा होती है।

मध्यप्रदेश में ऐतिहासिक प्रगति के आंकड़े

मुख्यमंत्री ने कहा कि बदलती कार्यसंस्कृति और केंद्र-राज्य के समन्वय से मध्यप्रदेश में 108 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जिनकी लागत दो लाख इकसठ हजार करोड़ से अधिक है। इसके अलावा पांच लाख चौबीस हजार करोड़ की 101 योजनाएं क्रियान्वयन में हैं। लगभग 49 प्रतिशत की प्रगति संतोषजनक है और यह दर्शाती है कि प्रदेश विकास की सही दिशा में आगे बढ़ रहा है। रेलवे, नवीकरणीय ऊर्जा और वन संरक्षण के क्षेत्र में भी प्रदेश को विशेष लाभ मिला है।

किसानों और पर्यावरण से जुड़े प्रयास

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के सहयोग से वन क्षेत्रों में संरक्षण को बढ़ावा मिला है और किसानों के जीवन में भी सकारात्मक बदलाव आया है। पीएम मित्र योजना के माध्यम से लाखों किसानों को लाभ पहुंचा है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हुई है।

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