राष्ट्रपति शासन समाप्त होने से पहले भाजपा ने विधायक दल का नेता चुनकर सरकार गठन का रास्ता किया साफ

मणिपुर। मणिपुर में लंबे समय से जारी राजनीतिक अस्थिरता के बीच भारतीय जनता पार्टी ने बड़ा कदम उठाते हुए राज्य को नया मुख्यमंत्री देने की प्रक्रिया लगभग पूरी कर ली है। भाजपा विधायक दल की बैठक में मंगलवार को युमनाम खेमचंद सिंह को सर्वसम्मति से विधायक दल का नेता चुन लिया गया। इसके साथ ही यह लगभग तय हो गया है कि युमनाम खेमचंद मणिपुर के अगले मुख्यमंत्री होंगे। राज्य में आगामी 12 फरवरी को राष्ट्रपति शासन की अवधि समाप्त होने जा रही है और उससे पहले सरकार गठन को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने तेज गति से राजनीतिक गतिविधियां शुरू कर दी थीं।

राष्ट्रपति शासन से पहले सरकार गठन की कवायद

मणिपुर में बीते कई महीनों से राष्ट्रपति शासन लागू है। केंद्र सरकार के स्तर पर यह स्पष्ट संकेत दिया जा चुका था कि यदि राजनीतिक हालात अनुकूल बने तो निर्धारित समय से पहले ही निर्वाचित सरकार का गठन किया जाएगा। इसी रणनीति के तहत भाजपा के सभी विधायक सोमवार को दिल्ली पहुंचे थे, जहां पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के साथ लगातार बैठकों का दौर चला। इन बैठकों में संगठनात्मक संतुलन, क्षेत्रीय समीकरण और राज्य में शांति बहाली को प्राथमिक मुद्दा बनाया गया।

राष्ट्रपति शासन की अवधि खत्म होने से ठीक पहले भाजपा ने अपने राष्ट्रीय महामंत्री तरुण चुघ को मणिपुर के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त किया। इस कदम को सरकार गठन की दिशा में निर्णायक माना गया। पर्यवेक्षक की मौजूदगी में ही विधायक दल की बैठक आयोजित की गई, जिसमें युमनाम खेमचंद के नाम पर सहमति बनी।

हिंसा के बाद खाली हुआ था मुख्यमंत्री पद

मणिपुर में पिछले वर्ष भड़की व्यापक हिंसा ने राज्य की राजनीति को झकझोर कर रख दिया था। कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति और राजनीतिक दबाव के चलते तत्कालीन मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। उनके इस्तीफे के बाद राज्य में संवैधानिक संकट की स्थिति उत्पन्न हो गई, जिसके परिणामस्वरूप राष्ट्रपति शासन लागू करना पड़ा। तब से ही मुख्यमंत्री का पद रिक्त था और राज्य प्रशासन केंद्र के नियंत्रण में संचालित हो रहा था।

युमनाम खेमचंद का राजनीतिक सफर

युमनाम खेमचंद सिंह मणिपुर की राजनीति में एक अनुभवी और संतुलित नेता माने जाते हैं। वह सिंगजामेई विधानसभा सीट से दो बार विधायक चुने जा चुके हैं। विधायी अनुभव के साथ-साथ उन्हें संसदीय प्रक्रियाओं की गहरी समझ है, जिसका प्रमाण उनके विधानसभा स्पीकर के कार्यकाल में भी देखने को मिला। स्पीकर रहते हुए उन्होंने सदन की कार्यवाही को मर्यादित और नियमबद्ध ढंग से संचालित करने की कोशिश की थी।

2022 में गठित बीरेन सिंह सरकार में युमनाम खेमचंद को कैबिनेट मंत्री बनाया गया था। उस दौरान उन्हें प्रशासनिक जिम्मेदारियों का प्रत्यक्ष अनुभव मिला, जिससे पार्टी नेतृत्व के बीच उनकी स्वीकार्यता और मजबूत हुई। पार्टी सूत्रों के अनुसार, मौजूदा हालात में ऐसे नेता की आवश्यकता थी जो प्रशासनिक अनुभव के साथ-साथ सभी समुदायों के बीच संवाद स्थापित कर सके, और इसी कारण खेमचंद के नाम पर सहमति बनी।

भाजपा की रणनीति और आगे की चुनौतियां

भाजपा के लिए मणिपुर केवल एक राज्य नहीं, बल्कि पूर्वोत्तर भारत में राजनीतिक स्थिरता का अहम केंद्र है। हिंसा के कारण उत्पन्न अविश्वास और सामाजिक तनाव को देखते हुए पार्टी नेतृत्व चाहता है कि नई सरकार शांति बहाली, पुनर्वास और विकास को प्राथमिक एजेंडा बनाए। युमनाम खेमचंद के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही होगी कि वे विभिन्न समुदायों के बीच भरोसा बहाल करें और प्रशासन को फिर से पटरी पर लाएं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा ने मुख्यमंत्री चयन में अपेक्षाकृत शांत छवि वाले नेता को आगे कर यह संकेत दिया है कि पार्टी अब टकराव के बजाय संवाद और स्थिरता पर जोर देना चाहती है। केंद्र सरकार का भी पूरा समर्थन नई सरकार को मिलने की संभावना है, जिससे विकास योजनाओं और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूती मिल सकती है।

शपथ ग्रहण की तैयारी

विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद अब अगला औपचारिक कदम राज्यपाल को सरकार गठन का दावा पेश करना होगा। इसके बाद शपथ ग्रहण समारोह की तारीख तय की जाएगी। माना जा रहा है कि राष्ट्रपति शासन की समाप्ति से पहले ही नई सरकार शपथ ले लेगी, ताकि संवैधानिक प्रक्रिया में कोई व्यवधान न आए।

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