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विरिष्ठ पत्रकार सुदेश गौड़

निवेश, कर और संपत्ति नियमों में राहत से बढ़ी भारत वापसी की संभावनाएँ

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा 1 फरवरी को पेश किए गए केंद्रीय बजट 2026 को यदि केवल आंकड़ों और योजनाओं से आगे जाकर देखा जाए, तो यह साफ संकेत देता है कि सरकार अब विदेश में रहने वाले भारतीयों को भारत से दोबारा जोड़ने की गंभीर कोशिश कर रही है। यह बजट सीधे-सीधे “भारत लौटो” का नारा तो नहीं देता, लेकिन नीति और व्यवस्था के स्तर पर ऐसे बदलाव करता है, जो भारत वापसी को व्यावहारिक और सुरक्षित विकल्प बनाते हैं।

बजट में एनआरआई यानी अनिवासी भारतीयों के लिए भारतीय कंपनियों में निवेश की सीमा बढ़ाई गई है। पहले वह किसी भारतीय कंपनी में 5% तक निवेश कर सकते थे अभी यह सीमा बढ़ाकर 10% की जाएगी। इस कारण अब वे भारतीय शेयर बाजार और लिस्टेड कंपनियों में पहले से कहीं अधिक हिस्सेदारी ले सकेंगे और भारतीय ग्रोथ स्टोरी का हिस्सा बन सकेंगे। इससे एक ओर विदेशी पूंजी को बढ़ावा मिलेगा, वहीं दूसरी ओर भारत को लेकर एनआरआई का भरोसा भी और मजबूत होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारत को केवल “भावनात्मक मातृभूमि” नहीं, बल्कि आर्थिक अवसरों का केंद्र बनाता है।

अबतक भारत में संपत्ति बेचने को लेकर एनआरआई सबसे ज्यादा उलझन में रहते थे। टैक्स कटौती, टीडीएस, टैन नंबर  और जटिल प्रक्रियाओं के कारण कई लोग वर्षों तक अपनी संपत्ति नहीं बेच पाते थे। बजट में पैन नंबर आधारित सरल प्रक्रिया का प्रावधान कर इस बड़ी बाधा को हटाने की कोशिश की गई है। इससे वे एनआरआई, जो अपनी संपत्ति बेचना या निवेश करना चाहते हैं, अब खुलकर योजना बना सकते हैं। बजट में टैक्स अनुपालन को सरल करते हुए कुछ श्रेणियों के एनआरआई को अतिरिक्त टैक्स प्रावधानों से राहत दी गई है। इसके अलावा, विदेशी संपत्ति और आय के पुराने मामलों में एकमुश्त खुलासे का अवसर देकर सरकार ने यह संदेश दिया है कि पुरानी भूलों के कारण भविष्य के रास्ते बंद नहीं होंगे। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह बजट हर एनआरआई को वापस नहीं लाएगा क्योंकि विदेशों में बेहतर वेतन, सामाजिक सुरक्षा और जीवनशैली अब भी एक बड़ा आकर्षण हैं। लेकिन जो एनआरआई रिटायरमेंट के करीब हैं, उद्यमी हैं या भारत में संपत्ति और निवेश को लेकर असमंजस में थे, उनके लिए यह बजट एक मजबूत संकेत है।

सरकार का बदलता संदेश

अब तक भारत सरकार की ओर से अनिवासी भारतीयों के लिए संदेश था कि नियमों को मानिए। इस बजट के माध्यम से भारत सरकार ने लचीला रुख अपनाते हुए अब संदेश दिया है कि यदि आप भारत आने का जरा भी विचार करते हैं तो आपका रास्ता हम आसान करेंगे। यह बजट भावनाओं से ज्यादा आर्थिक तर्क पर आधारित है। सरकार मानती है कि यदि व्यवस्था सरल होगी, तो भारत से जुड़ाव अपने आप बढ़ेगा। केंद्रीय बजट 2026 को विदेश में बसे भारतीयों के लिए एक “विश्वास बहाल करने वाला बजट” कहा जा सकता है। यह बजट भारत वापसी को अनिवार्य नहीं बनाता, लेकिन संभव जरूर बनाता है। जो भारतीय पहले से ही भारत लौटने की सोच रहे थे, उनके लिए यह बजट अंतिम प्रोत्साहन साबित हो सकता है, जबकि अन्य के लिए भारत अब निवेश और भविष्य की योजनाओं का एक भरोसेमंद ठिकाना बनता दिख रहा है।

3.54 करोड़ भारतीय विदेशों में

दुनिया भर में प्रवासी भारतीयों की संख्या बहुत बड़ी है, जिसमें अनिवासी भारतीय और भारतीय मूल के वे लोग शामिल हैं, जिन्होंने अब किसी अन्य देश की नागरिकता प्राप्त कर ली है। विश्व में कुल लगभग 35.4 मिलियन (3.54 करोड़) भारतीय विदेशों में रहते हैं। आंकड़ों के अनुसार शीर्ष 5 देशों के नाम इस प्रकार है, जहाँ भारतीयों और भारतीय मूल के लोगों की सबसे बड़ी आबादी है। इन देशों की सूची में संयुक्त राज्य अमेरिका नंबर एक पर है जहां 5.69 मिलियन भारतीय आबादी है। इसके बाद नंबर आता है संयुक्त अरब अमीरात का, जहां 3.90 मिलियन भारतीय हैं। कनाडा में 3.61 मिलियन, मलेशिया में 2.94 मिलियन और सऊदी अरब में 2.75 मिलियन भारतीय आबादी रहती है।
मोदी सरकार ने प्रवासी भारतीयों को वापस भारत लाने और उनका भारत में निवेश बढ़ाने के लिए राजनयिक, निवेश-उन्मुख नीतिगत, सांस्कृतिक तथा संवादात्मक पहलों के रूप में कई कदम उठाए हैं। इन प्रयासों का उद्देश्य भारत से जुड़े प्रवासी समुदाय को देश के विकास से और अधिक जोड़ना और उन्हें निवेश के अवसरों की तरफ आकर्षित करना है। सरकार प्रवासी भारतीय दिवस का आयोजन करती है, जहाँ प्रधानमंत्री और अन्य शीर्ष नेता प्रवासी समुदाय से सीधे संवाद करते हैं। यह कार्यक्रम संस्कृति, पहचान और निवेश को जोड़ने का मंच भी बनता है। प्रधानमंत्री मोदी ने प्रवासी भारतीयों से भारत में निवेश करने का आह्वान किया है, खासकर डिजिटल वित्त, स्टार्ट-अप, ‘मेक इन इंडिया’ तथा उच्च वृद्धि वाले क्षेत्रों में। इससे विदेशी निवेश प्रवाह भी बढ़ा है। प्रधानमंत्री मोदी ने प्रवासी भारतीय समुदाय को ब्रांड इंडिया को विश्व स्तर पर प्रचार देने, स्थानीय बाजारों में ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों को अपनाने तथा भारत की सकारात्मक आर्थिक छवि फैलाने का आग्रह किया है। सरकार प्रवासी भारतीयों को भारत की सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने के लिए प्रयास कर रही है। इससे न सिर्फ भावनात्मक जुड़ाव बढ़ता है बल्कि देश में निवेश और पर्यटन को भी बल मिलता है। मोदी सरकार ने वंदे भारत मिशन, ऑपरेशन गंगा, ऑपरेशन राहत जैसी बड़ी वापसी/सुरक्षा योजनाओं के जरिए विदेशों में फंसे भारतीयों को सुरक्षित वापस लाया है, इससे प्रवासी भारतीयों में भारत की चिंता और सहायता के प्रति विश्वास बढ़ा है। अब प्रवासी भारतीयों को तय करना है कि वे भारत की ग्रोथ स्टोरी का कितना, कब और कैसे हिस्सा बनते हैं।

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