7.66 करोड़ से घटकर 7.08 करोड़ हुई मतदाताओं की संख्या, ‘स्वीकृत’, ‘हटाए गए’ और ‘निर्णयाधीन’ तीन श्रेणियों में वर्गीकरण

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्वाचन आयोग ने चरणबद्ध तरीके से संशोधित मतदाता सूची का प्रकाशन शुरू कर दिया है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, राज्य के विभिन्न जिलों में मतदाता सूची की हार्ड कॉपियां जारी की जा रही हैं, जबकि ऑनलाइन सूची अभी उपलब्ध नहीं कराई गई है। इस प्रक्रिया को आगामी बड़े चुनाव से पहले व्यापक मतदाता सूची शुद्धिकरण अभियान के रूप में देखा जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, मतदाता सूची से हटाए गए नामों की कुल संख्या को लेकर अभी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन केवल बैंकुरा जिले में ही लगभग 1.35 लाख नाम हटाए जाने की आशंका जताई जा रही है। संशोधित सूची में कुल 7.08 करोड़ मतदाताओं को तीन श्रेणियों ‘स्वीकृत’, ‘हटाए गए’ और ‘निर्णयाधीन’ में वर्गीकृत किया गया है।

तीन श्रेणियों में वर्गीकरण

निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, ‘स्वीकृत’ श्रेणी में वे मतदाता शामिल हैं जिनके नाम सत्यापन के बाद बरकरार रखे गए हैं। ‘हटाए गए’ श्रेणी में वे नाम हैं जिन्हें मृत्यु, पलायन, दोहराव या पता न चल पाने जैसी वजहों से सूची से बाहर किया गया है। वहीं ‘निर्णयाधीन’ श्रेणी में वे मतदाता हैं जिनके दस्तावेज या विवरण की जांच न्यायिक अधिकारियों द्वारा की जा रही है और जिन पर अंतिम निर्णय पूरक सूची के माध्यम से लिया जाएगा। 

West Bengal Border Residents Scramble for Papers, As Voter List ...

मतदाता संख्या में बड़ी गिरावट

16 दिसंबर को जारी ड्राफ्ट सूची के अनुसार, अगस्त 2025 तक राज्य की मतदाता संख्या 7.66 करोड़ थी, जो अब घटकर 7.08 करोड़ रह गई है। निर्वाचन आयोग के अनुसार, लगभग 58 लाख नाम विभिन्न कारणों से हटाए गए हैं। इनमें मृत्यु, स्थायी पलायन, एक से अधिक स्थानों पर नाम दर्ज होना या पहचान की पुष्टि न हो पाना शामिल है। दूसरे चरण में लगभग 1.67 करोड़ मतदाताओं की सुनवाई की गई। इनमें से 1.36 करोड़ मतदाताओं को तथाकथित ‘तार्किक विसंगतियों’ के आधार पर चिह्नित किया गया था, जबकि 31 लाख मामलों में मैपिंग अधूरी पाई गई। फिलहाल लगभग 60 लाख मतदाता अब भी ‘निर्णयाधीन’ श्रेणी में हैं, जिनके बारे में अंतिम फैसला आना बाकी है।

2002 के बाद पहली राज्यव्यापी प्रक्रिया

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2002 के बाद यह पहला अवसर है जब पश्चिम बंगाल में राज्यव्यापी विशेष गहन पुनरीक्षण किया गया है। यह प्रक्रिया 4 नवंबर को मतदाताओं के बीच गणना प्रपत्र वितरण के साथ शुरू हुई थी और करीब 116 दिनों तक चली। राजनीतिक विवाद, दस्तावेज सत्यापन नियमों में संशोधन और कानूनी चुनौतियों के बीच आयोग ने ‘अधूरी अंतिम सूची’ जारी की है।

राजनीतिक और कानूनी असर

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर बदलाव आगामी चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकते हैं। विपक्षी दलों ने प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाए हैं, जबकि आयोग का कहना है कि यह अभियान वैधानिक नियमों के तहत और पारदर्शी तरीके से संपन्न किया गया है।

निर्वाचन आयोग द्वारा हार्ड कॉपी जारी किए जाने के बाद अब मतदाताओं और राजनीतिक दलों की नजरें इस बात पर हैं कि ‘निर्णयाधीन’ श्रेणी के मामलों पर अंतिम निर्णय कब और कैसे लिया जाएगा। ऑनलाइन सूची उपलब्ध होने के बाद व्यापक स्तर पर प्रतिक्रिया सामने आने की संभावना है।

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